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Code : 193437
Date of publication : 26/4/2018 6:23
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शहीद अली सम्माद, सऊदी हमलों में मारे गए यमन राजनैतिक परिषद के अध्यक्ष का जीवन परिचय

सऊदी अरब और उसके सहयोगी इस ग़लतफ़हमी में हैं कि अली सम्माद की मौत से यमन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया जाएगा, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि किसी भी राष्ट्र का आंदलोन किसी एक नेता की शहादत से समाप्त नहीं हो जाता है, बल्कि इसके विपरीत सम्माद का ख़ून रंग लाएगा और यमन के दुश्मनों को पराजय का सामना करना पड़ेगा।

विलायत पोर्टल :  यमन की सर्वोच्च राजनैतिक परिषद (Supreme Political Council) के प्रमुख सालेह अली सम्माद गुरुवार को सऊदी अरब के हवाई हमले में शहीद हो गए। यमन के अल-मसीरा टीवी चैनल की रुपोर्ट के मुताबिक़, मेहदी अल-मश्शात को अल-सम्माद का उत्तराधिकारी एवं सर्वोच्च राजनैतिक परिषद का प्रमुख नियुक्त किया गया है। अली सम्माद का यमन की नई राजनीतिक व्यवस्था में कितना महत्व था इसका अंदाज़ा, अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रमुख अब्दुल मलिक अल-हौसी के उस बयान से समझा जा सकता है, जो उन्होंने सम्माद की शहादत पर दिया है। अल-हौसी ने सोमवार को टीवी पर प्रसारित होने वाले अपने बयान में कहा, वाशिंगटन और रियाज़ के नेतृत्व में अतिक्रमणकारी बल, इस अपराध और उसके सभी परिणामों के लिए ज़िम्मेदार हैं।
 सालेह अली अल-सम्माद कौन थे?
 सम्माद का जन्म 1979 में उत्तरी यमन के सअदा प्रांत में स्थित सह्हार इलाक़े में हुआ था, सनआ विश्वविद्यालय से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और सअदा प्रांत लौटकर वहां एक स्कूल में पढ़ाने लगे। 2011 में अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनैतिक कार्यालय के प्रमुख नियुक्त हुए और सितम्बर 2014 में उन्होंने यमन के राष्ट्रपति के राजनैतिक सलाहकार का पदभार संभाला।
सम्माद को 6 अगस्त 2016 में यमन की सर्वोच्च राजनैतिक परिषद का अध्यक्ष बनाने की घोषणा की गई, 14 अगस्त 2016 में उन्होंने संसद में इस पद की शपथ ली। अली सम्माद एक दक्ष राजनीतिज्ञ होने के साथ साथ ही उच्चकोटि के युद्ध रणनीतिकार थे, यही वजह थी सऊदी अरब की हिट लिस्ट में उनका दूसरा नम्बर था। अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रमुख अब्दुल मलिक अल-हौसी ने उल्लेख किया है कि अली सम्माद की शहादत में अमेरिका ने बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि सऊदी अरब और उसके सहयोगी इस ग़लतफ़हमी में हैं कि अली सम्माद की मौत से यमन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया जाएगा, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि किसी भी राष्ट्र का आंदलोन किसी एक नेता की शहादत से समाप्त नहीं हो जाता है, बल्कि इसके विपरीत सम्माद का ख़ून रंग लाएगा और यमन के दुश्मनों को पराजय का सामना करना पड़ेगा।
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