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Code : 194452
Date of publication : 8/7/2018 15:3
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अपमानित जीवन जी रहा यमन का अपदस्थ भगोड़ा राष्ट्रपति, न घर का रहा न घाट का ।

अभी जून में अबू धाबी में बिन ज़ायद और अपने दूसरे आकाओं से मुलाक़ात में उसने अदन छोड़कर रियाज़ में रहने पर सहमति जता दी थी लेकिन आले सऊद और अबुधाबी की ओर से लगातार अपमानित होने वाले मंसूर हादी ने अदन पलट कर रियाज़ में रहने के वादे को तोड़ दिया था जिस से नाराज़ अबू धाबी ने मंसूर को ज़लील कर सऊदी अरब द्वारा उसे अदन छोड़ने पर मजबूर कर दिया है

विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार यमन का अपदस्थ राष्ट्रपति मंसूर हादी बेहद ही अपमानित जीवन गुज़ार रहा है, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के इशारों पर देश को युद्ध की दलदल में धकेलने वाला मंसूर हादी संयुक्त अरब अमीरात के निर्देश पर न चाहते हुए भी अदन से निकल कर रियाज़ में रहने के लिए विवश है तथा उस ने अदन छोड़ने पर हामी भर दी है । सूत्रों के अनुसार अभी जून में अबू धाबी में बिन ज़ायद और अपने दूसरे आकाओं से मुलाक़ात में उसने अदन छोड़कर रियाज़ में रहने पर सहमति जता दी थी लेकिन आले सऊद और अबुधाबी की ओर से लगातार अपमानित होने वाले मंसूर हादी ने अदन पलट कर रियाज़ में रहने के वादे को तोड़ दिया था जिस से नाराज़ अबू धाबी ने मंसूर को ज़लील कर सऊदी अरब द्वारा उसे अदन छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार मंसूर हादी की हालत धोबी के उस कुत्ते की तरह हो गई है जो न घर का रहे न घाट का, न चाहते हुए भी मंसूर ने रियाज़ में रहने की योजना बना ली है।
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