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Date of publication : 10/7/2018 14:5
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पैदल हज

मैंने ख़्वाब देखा कि किसी शख़्स ने मुझसे सवाल किया कि आख़िर क्या राज़ है कि इमाम हसन अ.स. हज के लिए पैदल चलते थे और सवारियां उनके साथ चला करती थीं तो मैंने उनको यह जवाब दिए...
विलायत पोर्टल :  इस्लाम के बुनियादी क़ानूनों में से एक क़ानून यह भी है कि अल्लाह अमल अंजाम देते समय होने वाली तकलीफ़ को देख कर सवाब देता है यही वजह है कि पैदल हज अंजाम देने का सवाब सवारी पर सफ़र करने से ज़्यादा है, लेकिन इस जगह पर हज के बारे में एक हदीस मिलती है कि जिसका मज़मून कुछ इस तरह है कि इमाम हसन अ.स. हज के लिए पैदल जाते थे तो सवारी साथ चलती थी जिसकी वजह से कुछ एतेराज़ भी सामने आते है।
जैसा कि वसाएलुश-शिया के लेखक शैख़ हुर्रे आमुली ने अपनी किताब फ़वाएद में इस क़िस्से को को बयान किया है कि मैं हज पर तीसरी बार जा रहा था रास्ते में एक जगह मेरी आँख लग गई, एहराम पहनने के बाद लगभग सत्तर लोग मेरे साथ पैदल चल रहे थे, मैंने ख़्वाब देखा कि किसी शख़्स ने मुझसे सवाल किया कि आख़िर क्या राज़ है कि इमाम हसन अ.स. हज के लिए पैदल चलते थे और सवारियां उनके साथ चला करती थीं तो मैंने उनको यह जवाब दिए...
1- ताकि लोग पैसे बचाने के लिए हज न करें
2- पैसा बचाने जैसा बुरा ख़्याल इमाम अ.स. के बारे में दिमाग़ में न पैदा हो सके
3- पैदल हज के मुस्तहब होने का एलान किया जा सके
4- अल्लाह की राह में माल ख़र्च किया जाए और सवारियों का बंदोबस्त किया जाए
5- अराफात के मैदान में उन सवारियों का इस्तेमाल हो सके
6- अगर किसी भी वजह से पैदल चलना मुश्किल हो जाए तो उन सवारियों से सफ़र को आगे बढ़ाया जा सके
7- सवारी साथ में होने से इंसान संतुष्ट रहे कि सवारी मौजूद है, जैसाकि इमाम अली अ.स. ने फ़रमाया जिसे पानी मिलने का यक़ीन होता है उसे प्यास का एहसास कम होता है
8- हज से वापसी के समय उन सवारियों पर सवार हो कर वापसी की जा सके
9- कमज़ोर लोगों की मदद करते हुए उन्हें सवार किया जा सके
10- अगर रास्ते में डाकू वग़ैरह मिल जाएं तो उनसे नजात हासिल की जा सके
11- सवारियां तबर्रुक के तौर पर मक्का अराफात और मुज़दलेफ़ा में हाज़िर रह सकें
12- अपनी हैबत और बुजु़र्गी का एलान हो सके कि यह काम किसी फ़क़ीर का नहीं है
13- अल्लाह की नेमतों को दुनिया के सामने ज़ाहिर किया जा सके
14- अगर किसी वजह से जंग वग़ैरह हो जाए तो सवारी काम आ सके
मैं जब ख़्वाब से चौंका तो मुझे यही 14 कारण याद रह गए जिनको मैंने लिख लिया, हो सकता है इसके अलावा और भी कारण हों जहां तक आम इंसान का दिमाग़ नहीं पहुंच सकता है इसलिए कि इमाम अ.स. का इल्म हर हाल में आम इंसानों से ज़्यादा होता है जहां तक किसी भी आम इंसान का दिमाग़ नहीं पहुंच सकता।
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