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Date of publication : 11/7/2018 16:0
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ईरान की दो टूक, अमेरिकी दबाव मे फैसला लिया तो पछताएगा भारत, सारी सहूलते करेंगे ख़त्म ।

अगर भारत, ईरान की जगह सऊदी अरब, इराक और अमेरिका जैसे देशों से तेल लेना चाहता है तो फिर उसे ऊंचे दामों पर तेल लेने को मजबूर होना पड़ेगा। इससे भारत को ईरान की तरफ से मिलने वाले खास फायदे बंद हो जाएंगे। ईरान ने भारत को अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 के बीच 18.4 मिलियन टन कच्‍चा तेल सप्‍लाई किया है।

विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार ईरान ने चाबहार पोर्ट पर निवेश के वादों को पूरा न करने की वजह से भारत की आलोचना की है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर भारत का रवैया ऐसा ही रहा और उसने ईरान से तेल आयात करना बंद किया तो फिर भारत इस पोर्ट को गंवा सकता है। भारत में ईरान के डिप्‍टी-एंबेसडर और घरेलू मामलों के इंचार्ज मसूद रिज़ावानियान रहक़ी ने इस सिलसिले मे एक अहम बयान दिया है। याद रहे कि पिछले दिनों अमेरिका ने भारत, चीन समेत तमाम देशों को अल्‍टीमेट देते हुए चार नवंबर तक ईरान से तेल बंद करने का आदेश दिया था। रहक़ी ने कहा अगर नई दिल्ली अमेरिकी दबाव मे आकर फैसला करती है और भारत ने ईरान की जगह सऊदी अरब, रूस, इराक, अमेरिका जैसे दूसरे देशों से तेल लेना शुरू किया तो ईरान, भारत को मिलने वाले तमाम सुविधाओं को खत्‍म कर देगा अगर । रहक़ी ने कहा कि यह काफी दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि चाबहार पोर्ट के विस्‍तार के लिए जिस भारतीय निवेश का वादा किया गया था और इससे दूसरे हिस्‍सों से जोड़ने के लिए जिन प्रोजेक्‍ट्स की बात की गई थी, उन्‍हें अभी तक पूरा नहीं किया गया है। उम्‍मीद है कि भारत इस दिशा में जरूरी कदम उठाएगा । चाबहार पोर्ट को भारत के लिए ईरान और अफगानिस्‍तान के अलावा सेंट्रल एशिया के देशों में व्‍यापार के लिए सुनहरा मौका माना जा रहा है। खासतौर पर तब जब पाकिस्‍तान, भारत को अपने यहां से गुजरने वाले रास्‍ते को देने से इंकार कर रहा है। मई 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्‍तान के बीच एक समझौता हुआ जिसके तहत तीन देशों से होकर गुजरने वाले चाबहार पोर्ट को ट्रांसपोर्ट के लिए प्रयोग किया जा सकता था। यह ईरान में सबसे बड़ा पोर्ट है जो समुद्र के रास्‍ते होने वाले व्‍यापार में फायदेमंद साबित होगा। अमेरिका की ओर से ईरान के तेल के पर लगाई गई पाबंदी पर रहक़ी ने कहा कि उनका देश हमेशा से भारत के लिए ऊर्जा का भरोसेमंद साथी रहा है। ईरान ने हमेशा से ही तेल के उचित दाम की नीति का पालन किया है ताकि दोनों देशों में तेल के उपभोक्‍ताओं और सप्‍लायर्स का फायदा होता रहे। उन्‍होंने कहा कि अगर भारत, ईरान की जगह सऊदी अरब, इराक और अमेरिका जैसे देशों से तेल लेना चाहता है तो फिर उसे ऊंचे दामों पर तेल लेने को मजबूर होना पड़ेगा। इससे भारत को ईरान की तरफ से मिलने वाले खास फायदे बंद हो जाएंगे। ईरान ने भारत को अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 के बीच 18.4 मिलियन टन कच्‍चा तेल सप्‍लाई किया है।
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