Thursday - 2018 July 19
Languages
Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 194498
Date of publication : 12/7/2018 18:15
Hit : 265

अल्लाह का ज़िक्र और दिलों का आराम

बेचैनी और स्ट्रेस आमतौर से बेतुके ख़्यालों की वजह से पैदा होता है और यह बेतुके ख़्याल उसी समय पैदा होते हैं जब दिमाग़ में अल्लाह का ख़्याल और दिल में अल्लाह की याद न रहे, अल्लाह के ख़्याल और अल्लाह की याद से बड़ा और मज़बूत कोई सहारा नहीं है, यह हर उल्टे सीधे ख़्याल के की ज़ंजीरों को तोड़ देता हैl
विलायत पोर्टल :इंसान की परेशानी का राज़ उसकी ज़ाती कमज़ोरी और उसपर बे सहारा होने का एहसास है, बच्चा दुनिया में आकर इसलिए रोता है क्योंकि इतनी बड़ी दुनिया में ख़ुद को कमज़ोर पाता है और तन्हाई महसूस करता है यही वजह है जब मां का सहारा मिल जाता है तो उसे सुकून और आराम मिलता हैl
अल्लाह का यह सबसे बड़ा करम है कि उसने अकेला पैदा किया लेकिन रिश्तों का सहारा दे कर भेजा ताकि तन्हाई और अकेलेपन की वजह से इंसान दम न तोड़ेl
हज़रत आदम और हव्वा को बिना किसी रिश्ते के पैदा किया तो जन्नत के माहौल में रखा ताकि दुनिया में अकेलेपन से बचे रहेंl
बच्चे को मां का सहारा भी आंसुओं द्वारा मिलता है, रोना फ़ितरी परेशानी और पैदाइशी घुटन का फ़ितरी इलाज हैl
रोना ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के काम भी आता है और ताक़तवर की हमदर्दी और रहमत के हासिल करने का भी स्रोत हैl
बचपन की छाप ख़त्म नहीं होती और यही वजह है कि सारी ज़िंदगी ऐसे ही चलता रहता है, इंसान अपनी कमज़ोरी को देखता है तो परेशान हो जाता है और जैसे ही कोई सहारा दिखाई देता है उसे आराम और सुकून महसूस करता हैl
इंसान की हालत मोर जैसी है परों को देख कर अकड़ जाता है और पैरों को देख कर मायूस हो जाता है, पैर सामने की कमज़ोरी है और परों द्वारा मिलने वाली ख़ूबसूरती ऊपर से मिलने वाला सहाराl
दुनिया में मिलने वाला हर सहारा सीमित है इसीलिए हर सहारा कुछ पलों का सुकून दे कर फिर परेशानी पैदा कर देता हैl
दीन ने एक ऐसे सहारे का पता बताया जिससे ताक़तवर कोई नहीं इसीलिए उसका दिया सुकून और आराम कभी परेशानी और बेचैनी में नहीं बदल सकताl
बेचैनी और स्ट्रेस आमतौर से बेतुके ख़्यालों की वजह से पैदा होता है और यह बेतुके ख़्याल उसी समय पैदा होते हैं जब दिमाग़ में अल्लाह का ख़्याल और दिल में अल्लाह की याद न रहे, अल्लाह के ख़्याल और अल्लाह की याद से बड़ा और मज़बूत कोई सहारा नहीं है, यह हर उल्टे सीधे ख़्याल के की ज़ंजीरों को तोड़ देता हैl
इस्लामी इतिहास और हादसों में भी ख़ौफ और डर उसी ताक़त और सहारे की कमज़ोरी का नतीजा थी, ग़ार में डरना, बद्र के मैदान में शैतानी ख़्याल, ओहद में शैतानी आवाज़ का असर, अहजा़ब में कलेजों का मुंह तक आ जाना, ख़ैबर में लगातार मैदान से भागना और भी ऐसे बहुत सारे हादसे उसी उल्टे सीधे ख़्याल का नतीजा थे और उसकी बुनियादी वजह दिमाग़ का अल्लाह के ख़्याल और दिल का अल्लाह की याद से ख़ाली होना था यही वजह है कि पैग़म्बर स.अ. ने बार बार मुसलमानों को याद दिलाया कि डरो मत घबराओ नहीं अल्लाह हमारे साथ हैl
और इसके विपरीत कर्बला का मैदान है जहां कड़ी से कड़ी मुश्किल और मुसीबत में दिलों का सुकून उसी अल्लाह की याद और उसके ख़्याल का नतीजा है, जहां हर इस्लाम का सिपाही हर मुसीबत का मुक़ाबला अल्लाह के ख़्याल और उसकी याद द्वारा कर रहा था और चूंकि अल्लाह की याद से दिल भरे हुए थे इसीलिए उनके दिलों में कोई डर, घबराहट और स्ट्रेस नहीं था, दुश्मनों में जंग की तैयारी थी और हुसैनी खै़मों में अल्लाह के ज़िक्र की गूंज थी, दुश्मन कमान में तीर जोड़ रहे थे इधर अली अकबर अ.स. अज़ान दे रहे थे, ज़ोहर के समय दुश्मन तीर की बारिश कर रहे थे इधर ज़ोहर की नमाज़ अदा हो रही थी, अस्र के समय उधर क़त्ल की तैयारी हो रही थी इधर अल्लाह का सजदा मुकम्मल किया जा रहा था, शामे ग़रीबां में उधर रात के सन्नाटे का डरावना मंज़र था इधर जले हुए खै़मों की राख पर अल्लाह की इबादतl
दुनिया को अगर दिलों का सुकून चाहिए तो कर्बला की याद ज़रूरी है, कर्बला और उसके पैगा़म से दूर रहने वाली क़ौम डर कर यहूदियों के हाथों बिक सकती हैं लेकिन कर्बला से अल्लाह की याद हासिल करने वाली क़ौम इस अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सकती, कर्बला की याद को बिदअत बताने वाले लोग हर ताक़त के दबाव में आ सकते हैं लेकिन कर्बला को दिल से लगाने वाले लोग किसी ताक़त के आगे झुकने वाले नहीं हैंl
जिसका 6 महीने का बच्चा तीर खा कर मुस्कुरा सकता हो उस क़ौम को कौन डरा सकता है, इस क़ौम का रोना भी एक ख़ामोश जेहाद है और ज़ुल्म के विरुद्ध एतेहासिक प्रतिरोध हैl


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :