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Date of publication : 2/8/2018 15:25
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ईरान जानता है ट्रम्प से कैसे निपटना है, अमेरिका से डरते हैं अरब देश : अब्दुल बारी अतवान

ट्रम्प ने ईरान के मुक़ाबले अरब नाटो और अरब - इस्राईल गठजोड़ का हौव्वा खड़ा किया लेकिन ईरान को डराने में नाकाम रहा, हाँ यमनी जियालों ने बाबुल मंदब में अमेरिका की कठपुतली सऊदी अरब के युद्धपोतों को निशाना बनाकर साम्राज्यवादी शक्तियों को यह सन्देश ज़रूर दे दिया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग और दुनिया भर की ज़रूरत का आधे से अधिक तेल जिस रास्ते से गुज़रता है वह ईरान और प्रतिरोधी आंदोलनों के अधीन है आज बाबुल मंदब है कल हुर्मुज़ जलडमरू भी हो सकता है।
विलायत पोर्टल :  प्राप्त जानकारी के अनुसार अरब जगत के विख्यात समाचार पत्र रायुल यौम के संपादक अब्दुल बारी अतवान ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी पर एक लेख लिखते हुए कहा है कि ट्रम्प को ईरानियों से बेहतर कोई नहीं समझ सका है।  ट्रम्प की वार्ता की पेशकश पर ईरान के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने कोई बयान नहीं दिया है बल्कि अन्य अधिकारियों ने ट्रम्प के बयान की धज्जियाँ उड़ा कर उसे परमाणु समझौते से निकलने की मूर्खता का अहसास करा दिया है । दुनिया के सबसे मुर्ख और क्रूर सत्ताधिकारी के रूप में पहचान बना चुका ट्रम्प अन्य देशों को धमकी के सहारे मेज़ की वार्ता तक लाने वाले के रूप में कुख्यात हो चुका है, जिसे राजनीती की कुछ समझ है ही नहीं, अगर ऐसा न होता तो वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने एक नौसिखिया नेता के रूप में न आता और उनके आगे सीरिया में अमेरिका द्वारा 70 अरब डॉलर खर्च कर ईरान , रूस , सीरिया और हिज़्बुल्लाह के मुक़ाबले पर नाकाम रहने का रोना न रोता।  ट्रम्प ने ईरान के मुक़ाबले अरब नाटो और अरब - इस्राईल गठजोड़ का हौव्वा खड़ा किया लेकिन ईरान को डराने में नाकाम रहा, हाँ यमनी जियालों ने बाबुल मंदब में अमेरिका की कठपुतली सऊदी अरब के युद्धपोतों को निशाना बनाकर साम्राज्यवादी शक्तियों को यह सन्देश ज़रूर दे दिया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग और दुनिया भर की ज़रूरत का आधे से अधिक तेल जिस रास्ते से गुज़रता है वह ईरान और प्रतिरोधी आंदोलनों के अधीन है आज बाबुल मंदब है कल हुर्मुज़ जलडमरू भी हो सकता है।  ट्रम्प केवल अरब के शासकों के लिए शेर है वह उनसे वसूली कर सकता है यह अरब शासक उस के इशारों पर नाच सकते हैं, उसे लगान और भारी भारी रक़म दे सकते हैं ताकि इन का ताज और सत्ता बची रही अगर अमेरिका न हो तो यह एक हफ्ते भी सत्ता में ना रह सकें, वहीँ ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने 8 बार ट्रम्प के मुलाक़ात के आग्रह को ठुकराया है यह कहते हुए कि जो आदमी अपने वादों और समझौतों का सम्मान नहीं करता वह भरोसे के लायक नहीं है वही बात जो आयतुल्लाह ख़ामेनई बार बार कहते रहे हैं कि अमेरिकी नेताओं से बात करना मतलब वक़्त की बर्बादी, और यही फ़र्क़ है ईरान के नेताओं और ट्रम्प से मुलाक़ात की बार बार भीख मांगने वाले अरब शासकों में !
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