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Date of publication : 28/8/2018 17:34
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ईदे ग़दीर की फज़ीलत और उसके आमाल

इमाम अली रज़ा अ.स. ने फ़रमाया जहां कहीं भी रहो कोशिश करो कि ग़दीर के दिन इमाम अली अ.स. की क़ब्र पर हाज़िर हो, अल्लाह ने उस दिन हर मोमिन और मोमिना के साठ साल के गुनाहों को माफ़ कर देता है और उस दिन जहन्नुम की आग से माहे रमज़ान, शबे क़द्र शबे ईदुल् फ़ितर से दो गुना ज़्यादा लोगों आज़ाद कर देता है और उस दिन मोमिन भाई को एक दिरहम देना हज़ार दिरहम देने के बराबर है, उस दिन अपने मोमिन भाई के साथ एहसान करो और मोमेनीन और मोमेनात को ख़ुश करो, ख़ुदा की क़सम अगर लोगों को इस दिन की फज़ीलत मालूम हो जाए तो वह दस बार फ़रिश्तों से मुसाफ़ेहा करेंगेl


विलायत पोर्टल :सारी तारीफ़ उस अल्लाह के लिए जिसने हमको इमाम अली अ.स. और बाक़ी इमामों की विलायत से जुड़े रहने वालों में से क़रार दियाl
ईदे ग़दीर अल्लाह की अज़ीम ईद है इसे ईदुल्लाह कहा गया है, आले मोहम्मद अ.स. के लिए सबसे अहम ईदों में से यही ईदे विलायत है, अल्लाह ने हर नबी के लिए इस दिन को ईद क़रार देते हुए उसे अहम बताया है, इसका नाम आसमान में ईदे मौऊद और ज़मीन में यौमे मीसाक़े माख़ूज़ और जम-ए-मशहूद तय पाया है, पैग़म्बर स.अ. ने इमाम अली अ.स. से वसीयत की कि ग़दीर के दिन को ईद का दिन समझें और हर नबी ने अपने वसी और जानशीन से वसीयत की कि इस दिन को ईद क़रार दें, यह बेहद मुबारक और बरकत वाला दिन है और शियों के आमाल क़ुबूल होने का दिन है और उनके ग़मों के दूर होने का दिन हैl
इस दिन यानी 18 ज़िलहिज 10 हिजरी को पैग़म्बर स.अ. ने अपने आख़िरी हज से वापसी में आयए बल्लिग़ नाज़िल होने के बाद अल्लाह के हुक्म पर अमल करते हुए मन कुंतो मौलाहो फ़हाज़ा अलिय्युन मौलाहो कह कर अपने बाद के लिए इमाम अली अ.स. को अपना वसी, जानशीन और बिला फ़स्ल ख़लीफ़ा होने का ऐलान कर दिया जिसके बाद आयए इकमाल नाज़िल हुई जिसमें अल्लाह ने फ़रमाया कि "आज के दिन काफ़िर मायूस हो गए इसलिए तुम उनसे न डरो और मुझ से डरो, आज मैंने तुम्हारे लिए दीन को कामिल कर दिया और अपनी नेमतों को तमाम कर दिया और तुम्हारे लिए दीने इस्लाम को पसंदीदा बना दिया है..." इस आयत के बाद दीन के हमेशा बाक़ी रहने और काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की मायूसी का ऐलान हो गयाl
इमाम अली रज़ा अ.स. ने फ़रमाया जहां कहीं भी रहो कोशिश करो कि ग़दीर के दिन इमाम अली अ.स. की क़ब्र पर हाज़िर हो, अल्लाह ने उस दिन हर मोमिन और मोमिना के साठ साल के गुनाहों को माफ़ कर देता है और उस दिन जहन्नुम की आग से माहे रमज़ान, शबे क़द्र शबे ईदुल् फ़ितर से दो गुना ज़्यादा लोगों आज़ाद कर देता है और उस दिन मोमिन भाई को एक दिरहम देना हज़ार दिरहम देने के बराबर है, उस दिन अपने मोमिन भाई के साथ एहसान करो और मोमेनीन और मोमेनात को ख़ुश करो, ख़ुदा की क़सम अगर लोगों को इस दिन की फज़ीलत मालूम हो जाए तो वह दस बार फ़रिश्तों से मुसाफ़ेहा करेंगेl
इस दिन जनाब मूसा ने जादूगरों पर कामयाबी हासिल की, इसी दिन अल्लाह ने जनाब इब्राहीम के लिए नमरूद की आग को बुझा दिया, इसी दिन जनाब मूसा ने यूशा इब्ने नून को अपना जानशीन बनाया, इसी दिन जनाब ईसा ने शमऊन को अपना जानशीन बनाया, इसी दिन जनाब सुलैमान ने अपनी उम्मत को आसिफ़ इब्ने बरख़िया के ख़लीफ़ा होने पर गवाह बनाया, पैग़म्बर स.अ. ने असहाब के बीच (उख़ुव्वत) भाईचारे का रिश्ता क़ायम कियाl


इस दिन के कुछ आमाल

रोज़ा रखना, (यह रोज़ा दुनिया की उम्र के रोज़े के बराबर, सौ मक़बूल हज और सौ मक़बूल उमरे के बराबर और साठ साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा है) ग़ुस्ल करना, इमाम अली अ.स. की ज़ियारत पढ़ना, ईद की नमाज़ पढ़ना, दुआए नुदबा पढ़नाl
इस दिन ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करना, मोहम्मद (स.अ.) व आले मोहम्मद (अ.स.) को याद करना और उन पर ज़्यादा से ज़्यादा दुरूद पढ़ना चाहिए और उन पर ज़ुल्म करने वालों से दूरी का ऐलान करना चाहिए, इमाम अली अ.स. की क़ब्र की ज़ियारत, मोमेनीन को ईदी देना, मोमिन भाईयों के साथ नेकी करना, मोमेनीन को ख़ुश करना, अच्छे कपड़े पहनना, सजना संवरना, ख़ुशबू लगाना, मोमिन भाईयों की ग़लती को माफ़ करना उनकी ज़रूरतों को पूरा करना, रोज़ा रखने वालों को इफ़्तार कराना, बीवी बच्चों को ख़ुश करना और उनके लिए अच्छी ज़िंदगी का इन्तेज़ाम करना, मोमेनीन से मुलाक़ात के लिए जाना उनके लिए तोहफ़े (गिफ़्ट) ले कर जाना, विलायत जैसी अज़ीम नेमत पर शुक्र अदा करना, ज़्यादा से ज़्यादा सलवात पढ़ना और इबादत करने की बहुत ज़्यादा ताकीद की गई हैl
इस दिन किसी मोमिन भाई को एक रुपया देना बाक़ी के दिनों में एक लाख रुपए देने के बराबर हैl
और इसी तरह इस दिन मोमिन भाई को खाना खिलाना सारे नबियों और सिद्दीक़ीन को खाना खिलाने जैसा है, और इमाम अली अ.स. के ख़ुत्बे में है कि ग़दीर के दिन जो शख़्स किसी रोज़ेदार को इफ़्तार के समय इफ़्तार कराए तो वह ऐसा है जैसे उसने उसने दस "फेआम" को को इफ़्तार कराया, किसी से सवाल किया ऐ अमीरूल मोमेनीन यह फेआम क्या है? आपने फ़रमाया:एक लाख नबी, सिद्दीक़ और शहीदl तो अब सोचिए उस इंसान का क्या होगा जो सारे मोमेनीन और मोमेनात को खाना खिलाए उनका रोज़ा इफ़्तार कराए, फिर आपने फऱमाया जो ऐसा करेगा मैं उसके काफ़िर न होने और फक़ीरी से हमेशा दूर रहने की ज़िम्मेदारी लेता हूंl

ग़दीर की नमाज़

इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. का इरशाद है कि ज़वाल से आधा घंटा पहले (अल्लाह के शुक्र की नियत से) दो रकत नमाज़ पढ़े जिसमें हर रकत में दस बार सूरए अल-हम्द दस बार सूरए तौहीद दस बार आयतुल कुर्सी और दस बार सूरए इन्ना अंज़लनाह पढ़े, इस नमाज़ के पढ़ने वाले को अल्लाह एक लाख हज एक लाख उमरे का सवाब देगा और वह जो भी दुनिया और आखे़रत की हाजत का सवाल करेगा अल्लाह उसे आसानी से क़ुबूल करेगाl

मौलाना मोहम्मद हसनैन बाक़री




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