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Code : 195462
Date of publication : 25/9/2018 20:8
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हज़रत मीसम तम्मार

तारीख़ की किसी किताब से यह नहीं पता चलता कि वह कब कूफ़ा आए, बनी असद के क़बीले की औरत कैसे आपकी मालिक बनी, वह कब इस्लाम लाए? हालांकि कुछ ऐसी बातें मौजूद हैं जिनसे कहा जा सकता है कि इमाम अली अ.स. की ग़ुलामी में आने से पहले ही वह मुसलमान हो चुके थे, इमाम अली अ.स. ने जब उनसे कहा कि पैग़म्बर स.अ. मुझे ख़बर दे चुके हैं कि तुम्हारे वतन अजम (अरब के अलावा इलाक़ों को अजम कहा जाता है) में तुम्हारे वालिद ने तुम्हारा नाम मीसम रखा था तो मीसम ने कहा था कि सच कहा अल्लाह और उसके रसूल ने और सच कहा अमीरुल मोमेनीन अ.स. ने, इस जुमले से हज़रत मीसम के बारे में 2 बातें पता चलती हैं, पहली यह कि आप अरब से नहीं थे बल्कि अजम थे दूसरे यह कि इमाम अली अ.स. की ख़िदमत में आने से पहले आप केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि मोमिन और आपके ख़ास चाहने वालों में से थेl

विलायत पोर्टल :अबू सालिम मीसम तम्मार इब्ने यहया तम्मार, इमाम अली अ.स. के आज़ाद किए हुए ग़ुलाम आपके सहाबी और उन क़रीबी लोगों में थे जिनसे इमाम अली अ.स. अपने राज़ बयान किया करते थे, अल्लामा इब्ने अबिल हदीद लिखते हैं:
मीसम को इमाम अली अ.स. ने बहुत से इल्म और राज़ बताए थे, ज़रूरी यह था कि हदीस, सीरत और तारीख़ की किताबों में इनके ज़िंदगी के हालात और इनके इल्मी कारनामों का ज़िक्र होता क्योंकि मीसम जैसे बुज़ुर्ग और बुलंद मर्तबे वाले इंसान की ज़िंदगी और इल्मी शख़्सियत सारे मुसलमानों के लिए बेहतरीन आइडियल हैं, मगर अफ़सोस कि मीसम जैसे इल्म और अमल की दावत देने वाले बहुत से बुज़ुर्गों की तारीख़ और उनकी सीरत इतिहास के पन्नों से ग़ायब हो गए, किताबों में उनकी बहुत कम ज़िंदगी के पहलू नज़र आते हैं उनकी ज़िंदगी के बहुत से पहलुओं पर पर्दा पड़ा हुआ है जैसे वह किस क़बीले से थे?उनका कहां के रहने वाले थे? और वह किस जगह को छोड़ कर कूफ़ा आए? कब मुसलमान हुए? क्या उनके वालिद उनसे पहले मुसलमान हो चुके थे? क्या उनके वालिद भी ग़ुलाम थे? उम्र के किस पड़ाव में शहीद हुए? उनके इल्मी आसार क्या हैं? ऐसी बहुत से सवाल और बहुत सी बातें हैं जो किताबों में ढूंढने से भी नहीं मिलतीl
हमें उनके जितने भी हालात मिले हम यहां संक्षेप में बयान कर रहे हैंl

मीसम का इस्लाम
तारीख़ की किसी किताब से यह नहीं पता चलता कि वह कब कूफ़ा आए, बनी असद के क़बीले की औरत कैसे आपकी मालिक बनी, वह कब इस्लाम लाए? हालांकि कुछ ऐसी बातें मौजूद हैं जिनसे कहा जा सकता है कि इमाम अली अ.स. की ग़ुलामी में आने से पहले ही वह मुसलमान हो चुके थे, इमाम अली अ.स. ने जब उनसे कहा कि पैग़म्बर स.अ. मुझे ख़बर दे चुके हैं कि तुम्हारे वतन अजम (अरब के अलावा इलाक़ों को अजम कहा जाता है) में तुम्हारे वालिद ने तुम्हारा नाम मीसम रखा था तो मीसम ने कहा था कि सच कहा अल्लाह और उसके रसूल ने और सच कहा अमीरुल मोमेनीन अ.स. ने, इस जुमले से हज़रत मीसम के बारे में 2 बातें पता चलती हैं, पहली यह कि आप अरब से नहीं थे बल्कि अजम थे दूसरे यह कि इमाम अली अ.स. की ख़िदमत में आने से पहले आप केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि मोमिन और आपके ख़ास चाहने वालों में से थेl


पैग़म्बर स.अ. और मीसम

हज़रत मीसम की शान और अज़मत यह है कि पैग़म्बर स.अ. ने आपके बारे में इमाम अली अ.स. से वसीयतें फ़रमाईं, पैग़म्बर स.अ. के बाद आने वालों में हमें गिनती के दो चार ही लोग ऐसे मिलते हैं जिनका ज़िक्र पैग़म्बर स.अ. की ज़ुबान पर आया हो, जैसे ज़ैद इब्ने सौहान, ओवैसे करनी, मीसम तम्मार वग़ैरह, हालांकि बाद में आने वाले मुसलमानों की तादाद भी बहुत ज़्यादा थी और उनमें नेक और सालेह लोग और बुज़ुर्ग उलमा भी थेl


इमाम अली अ.स. और मीसम

इमाम अली अ.स. से मीसम को वही निसबत थी जो सलमान को पैग़म्बर स.अ. से थी, इब्ने ज़ेयाद ने आपको इसी इमाम अली अ.स. से क़रीब सहाबी होने और आपसे मोहब्बत करने को जुर्म बता कर आपको क़त्ल कर दिया था, इब्ने ज़ेयाद ने उन्हें क़त्ल करते समय कहा था कि मुझे ख़बर मिली है कि तुम इमाम अली अ.स. से सबसे ज़्यादा मोहब्बत करते हो और सबसे ज़्यादा अली (अ.स.) के क़रीबी थे, आपने इमाम अली अ.स. से इतना इल्म हासिल किया कि आपके सारे सहाबियों में इल्म के एतेबार से सबसे ज़्यादा आपका ही ज़िक्र आता है, इमाम अली अ.स. मस्जिद से निकल कर मीसम की खजूर की दुकान पर तशरीफ़ लाते और वहां बैठ कर मीसम से बातें करते थे और कभी कभी मीसम को किसी काम से भेजते तो उनकी जगह आप ख़ुद खजूर तौल कर देते थेl


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