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Date of publication : 1/10/2018 6:35
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अरबईन की ज़ियारत को कैसे मानवी बनाएं

अरबईन का सफ़र अपनी सारी विशेषताओं के साथ एक शानदार और लाजवाब सफ़र है, और अगर एक ख़ास मक़सद और मानवियत के साथ हो तो उसकी बरकतें और ज़्यादा उस ज़ाएर की ज़िंदगी में नज़र आएंगी इसीलिए एक ज़ाएर की कोशिश यही होने चाहिए कि जितना हो सके अरबईन से रूहानियत और मानवियत को अपने लिए हासिल करे, इस लेख में कुछ उन अहम बातों की तरफ़ इशारा किया जाएगा जिससे एक ज़ाएर ज़्यादा से ज़्यादा मानवियत को हासिल कर सकता है।

विलायत पोर्टल : इंसान की ज़िंदगी में कुछ लम्हे ऐसे होते हैं जो हमेशा बाक़ी रहने वाले नहीं होते इसीलिए इंसान को चाहिए कि जितना ज़्यादा हो सके इन लम्हों से फ़ायदा हासिल करे, जैसाकि पैग़म्बर स.अ. की हदीस है कि बेशक तुम्हारी ज़िंदगी में नसीमे इलाही के झोंके आएंगे, ध्यान रहे ऐसे समय में तुम ख़ुद को उसी के बीच रखना, अरबईन का सफ़र अपनी सारी विशेषताओं के साथ एक शानदार और लाजवाब सफ़र है, और अगर एक ख़ास मक़सद और मानवियत के साथ हो तो उसकी बरकतें और ज़्यादा उस ज़ाएर की ज़िंदगी में नज़र आएंगी इसीलिए एक ज़ाएर की कोशिश यही होने चाहिए कि जितना हो सके अरबईन से रूहानियत और मानवियत को अपने लिए हासिल करे, इस लेख में कुछ उन अहम बातों की तरफ़ इशारा किया जाएगा जिससे एक ज़ाएर ज़्यादा से ज़्यादा मानवियत को हासिल कर सकता है।

** अरबईन के सफ़र का ख़ास ख़्याल

अरबईन का सफ़र मानवियत और अहलेबैत अ.स. से इश्क़ को मज़बूत करने के लिए एक बेहतरीन ज़रिया है, अरबईन पर जाने वाले ज़ाएर को यह ध्यान में रखना चाहिए कि यह सफ़र साल में केवल एक बार ही नसीब होता है और ज़ाहिर है कि ज़िंदगी के कामों और दूसरी बहुत सारी चीज़ों को ध्यान में रखते हुए हर साल यह इस सफ़र पर कोई भी हाज़िर नहीं हो पाता, और दूसरे यह भी मुमकिन है कि इंसान की ज़िंदगी वफ़ा न करे या इराक़ के शांतिपूर्वक हालात बिगड़ जाएं जिसके कारण अरबईन के मौक़े पर जाना मुमकिन न हो सके या सब कुछ होते हुए बीमारी के कारण इंसान इस अज़ीम सफ़र पर न जा सके, कहने का मतलब यह है कि ज़रूरी नहीं कि कोई हर साल अरबईन पर पहुंच सके इसलिए ज़रूरी है कि इंसान अपने उस अरबईन के सफ़र को आख़िरी सफ़र समझते हुए जितना हो सके मानवी फ़ायदा हासिल करे।

** ख़ुद को पहले से इस सफ़र के लिए तैयार करें

अरबईन पर जाने वाला वह ज़ाएर जो इस सफ़र से ज़्यादा से ज़्यादा मानवी फ़ायदा हासिल करना चाहता है उसे पहले से ही ख़ुद को तैयार करना पड़ेगा, जैसे अगर उसे मस्जिदे कूफ़ा, मस्जिदे सहला और इन जैसी दूसरी जगहों या नजफ़ से कर्बला तक के पैदल सफ़र के लिए पहले से ही हर जगह के लिए कि कहां कितना समय लगना है तय करना होगा और इसके अलावा रूहानी और मानवी तौर से अपने आप को इस सफ़र के लिए इस तरह तैयार करें कि वह समझ सके कि कहां जा रहे हैं और किस लिए जा रहे हैं और किस पाक ज़मीन पर क़दम रख रहे हैं।

** क़ुर्आन की तिलावत करके इमाम हुसैन अ.स. और दूसरे इमामों को हदया करना

एक और अहम काम जिससे मानवियत काफ़ी प्रभावित होती है वह इमाम हुसैन अ.स. और उनके वफ़ादार असहाब के लिए क़ुर्आन की तिलावत करके उन्हें हदया करना है, ज़ाहिर है कि ज़ाएर को इस मानवी सफ़र पर दुआ और क़ुर्आन की तिलावत का ठीक ठाक समय मिल जाता है इसलिए बेहतर है कि इस सफ़र पर वहां रहते हुए एक पूरे पारे या कम से कम आधे पारे की तिलावत करके उन्हें हदया करें।

** इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी हासिल करें

जितना ज़्यादा इमाम हुसैन अ.स. की मारेफ़त ज़ाएर के अंदर होगी उतना ही वह इस सफ़र से मानवी फ़ायदा हासिल कर सकेगा, इसलिए एक ज़ाएर के लिए ज़रूरी है कि इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला से संबंधित किताबों को ज़्यादा से ज़्यादा पढ़े ताकि उसकी मालूमात बढ़ सके और जितनी ज़्यादा मालूमात होगी उतना ही ज़्यादा मानवी फ़ायदा हासिल कर सकता है।

** इमाम हुसैन अ.स., कर्बला और अरबईन की अज़मत के बारे में ग़ौर करना

कर्बला का हादसा और इमाम हुसैन अ.स. का इंक़ेलाब इतिहास का ऐसा हादसा और इंक़ेलाब है जिसका प्रभाव दुनिया के हर देश के कोने कोने तक देखने को मिलता है और यह इतिहास का इकलौता अभी तक ज़िंदा रहने वाला इंक़ेलाब है जिससे हर क़ौम और मज़हब के लोग प्रभावित हो रहे हैं, ज़ाहिर है ऐसे अज़ीम इंक़ेलाब और उस इंक़ेलाब के लाने वालों के बारे में और उसके प्रभाव के बारे में ग़ौर करना हर ज़ाएर के लिए ज़रूरी है, और जितना ज़्यादा ज़ाएर ग़ौर करेगा उसके प्रभाव और उसके असर को उतना ही ज़्यादा अपने वुजूद और समाज में महसूस करेगा, बेशक कर्बला में इमाम हुसैन अ.स. का सब्र, हौसला, आत्मसम्मान, गुमराहों की हिदायत का तरीक़ा, इसके अलावा उन पर ढ़ाई जाने वाली मुसीबतें और उनके घर की औरतों और बच्चों को सताए जाने पर सब्र बहुत सारी सीख हमें देता है, इसी तरह इराक़ के शियों का इमाम अ.स. के ज़ायरीन की इस तरह ख़िदमत करना भी बहुत कुछ पैग़ाम देता है, और यह सारी चीज़ें तभी हासिल हो सकती हैं जब ज़ाएर ऊपर बताई गई चीज़ों में ग़ौर करेगा।



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