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Date of publication : 2/10/2018 19:43
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यज़ीद का दरबार और हज़रत ज़ैनब स.अ. का ख़ुत्बा

ऐ यज़ीद! तू क्या समझता है कि तूने हमारे लिए ज़मीन और आसमान को सीमित कर दिया है? और क्या आले रसूल अ.स. को ज़ंजीरों और रस्सियों में जकड़ कर इधर उधर फिराने से तू अल्लाह से क़रीब और आले रसूल अ.स. ज़लील हो जाएंगे? तेरे ख़्याल में क्या हम मज़लूम हो कर ज़लील हो गए और तूने हम पर ज़ुल्म कर के इज़्ज़त हासिल कर ली?



विलायत पोर्टल :  सारी तारीफ़ उस अल्लाह के लिए जो इस दुनिया का मालिक है, अल्लाह की रहमतें नाज़िल हों पैग़म्बर स.अ. और उनके अहलेबैत अ.स. पर....

बेशक उन लोगों का अंजाम बुरा है जिन्होंने अपने दामन को बुराईयों की सियाही से मैला कर के अपने अल्लाह की आयतों को झुठलाया और उनका मज़ाक़ उड़ाया।

ऐ यज़ीद! तू क्या समझता है कि तूने हमारे लिए ज़मीन और आसमान को सीमित कर दिया है? और क्या आले रसूल अ.स. को ज़ंजीरों और रस्सियों में जकड़ कर इधर उधर फिराने से तू अल्लाह से क़रीब और आले रसूल अ.स. ज़लील हो जाएंगे? तेरे ख़्याल में क्या हम मज़लूम हो कर ज़लील हो गए और तूने हम पर ज़ुल्म कर के इज़्ज़त हासिल कर ली? क्या तू यह समझता है कि हम पर ज़ुल्म कर के तुझे अल्लाह की बारगाह में शान और शौकत हासिल हो गई? क्या तू अपनी ज़ाहिरी जीत की ख़ुशी के नशे में चूर हो कर नाक भंव चढ़ा कर अपने को जीता हुआ समझ कर इतरा रहा है और ख़िलाफ़त जो केवल हमारा हक़ है उसे हमसे छीन कर जश्न मना रहा है? तो सुन, अपनी ग़लत सोच पर घमंड मत कर और ज़रा होश में आ और यह बता कि क्या तूने अल्लाह का यह फ़रमान भुला दिया है कि हक़ का इंकार करने वाले यह न सोचे कि हमने उन्हें जो मौक़ा दिया है वह उनके हक़ में है, बल्कि हमनें तो उन्हें ढ़ील दे रखी है ताकि वह अपने गुनाहों को और बढ़ा लें (जिससे फिर कभी वापस बाहर न आ सकें) और उनके लिए ख़ौफ़नाक और दर्दनाक अज़ाब तय हो चुका है।

ऐ हमामे बाप दादा के आज़ाद किए हुए ग़ुलामों की औलाद! क्या तेरा यही इंसाफ़ है कि तू अपने घर की औरतों को चार दीवारी के अंदर चादर में रखे और रसूल स.अ. की बेटियां खुले सर दर दर भटकती रहें? तूने पाक औरतों की चादरें लूटी और उनका अपमान किया है, तेरे हुक्म पर ज़ालिमों ने रसूल स.अ. की बेटियों को बेनक़ाब कर के पूरे शहर में घुमाया है, तेरे हुक्म पर तेरे ज़ालिम सिपाही लोगों की भीड़ में पाकीज़ा औरतों को खुले सर लेकर आए हैं और लोग रसूल स.अ. की बेटियों के खुले सर को देख कर उनका मज़ाक़ उड़ा रहे हैं, दूर वाले हों या क़रीब वाले, सब निगाहें उठा कर देख रहे हैं, हर शरीफ़ और ज़लील की निगाहें इन पाक औरतों के खुले सर पर जमी हैं।

आज रसूल स.अ. के घराने की औरतों के साथ हमदर्दी करने वाला कोई नहीं है, आज इन क़ैदी औरतों के साथ इनके मर्द मौजूद नहीं हैं जो इनकी सरपरस्ती करें, आज आले मोहम्मद अ.स. की कोई मदद करने वाला नहीं है, और उस शख़्स से भलाई की उम्मीद भी क्या हो सकती है जो जिसकी दादी ने नेक लोगों के कलेजे को चबा कर थूक दिया हो, और उस शख़्स से इंसाफ़ की क्या उम्मीद की जा सकती है जिसके बदन का गोश्त और खाल शहीदों के लहू से तैयार हुई हो, वह शख़्स कैसे हम अहलेबैत अ.स. पर ज़ुल्म ढ़हाने में कमी कर सकता है जिसके दिल में हसद और ईर्ष्या भरी हुई हो।

ऐ यज़ीद! क्या तुझे शर्म नहीं आती कि तू इतने भयानक जुर्म के बाद भी घमंड करते हुए यह कह रहा है कि आज अगर मेरे बाप दादा होते तो उनके दिल ख़ुशी से झूम उठते और मुझे दुआएं देते हुए कहते कि ऐ यज़ीद तेरे हाथ कभी शल न हों?

ऐ यज़ीद! क्या तुझे शर्म नहीं आती कि तू जन्नत के जवानों के सरदार हुसैन इब्ने अली अ.स. के मुबारक दांतों पर छड़ी मार कर गुस्ताख़ी कर रहा है?

ऐ यज़ीद! तू ख़ुश हो भी क्यों न, तूने अपनी हिंसा और अपने अत्याचार से हमारे ज़ख़्मी दिलों को और भी गहरे ज़ख़्म दिए हैं और शजरए तय्यबा की जड़ें काटने का घिनौना जुर्म किया है, तूने रसूल स.अ. की औलाद के ख़ून से अपने हाथ रंगीन किए हैं।

तूने अब्दुल मुत्तलिब के ख़ानदान के उन जवानों को क़त्ल कर डाला जिनकी अज़मत और किरदार ज़मीन के कोने कोने को रौशन किए हुए थे।

ऐ यज़ीद! आज तू आले रसूल अ.स. को क़त्ल कर के अपने बद किरदार बाप दादा को पुकार कर उन्हें अपनी जीत के क़सीदे सुनाने में मगन है, तू बहुत जल्द अपने उन काफ़िर बुज़ुर्गों के पास पहुंच जाएगा और उस समय अपने किरदार और अपने रवैये पर शर्मिंदा हो कर यह आरज़ू करेगा कि काश मेरे हाथ शल हो जाते और मेरी ज़ुबान गूंगी हो जाती और मैंने जो कुछ किया और कहा वह सब न किया और कहा होता।

उसके बाद हज़रत ज़ैनब स.अ. ने आसमान की तरफ़ सर उठा कर अल्लाह की बारगाह में फ़रियाद की....

ऐ हमारे परवरदिगार! तू हमारा हक़ इन ज़ालिमों से हमें वापस दिला दे और तू इनसे हमारे हक़ का बदला ले, ऐ अल्लाह तू ही इन ज़ालिमों से हमारा बदला ले और ऐ मेरे अल्लाह तू ही इन पर अपना क़हर नाज़िल कर जिसने हमारे अज़ीज़ों को ख़ून में नहलाया और हमारी मदद करने वालों को क़त्ल कर दिया।

ऐ यज़ीद! तूने यह जो भी ज़ुल्म किया है वह अपने आप पर किया है, तूने किसी और का नहीं बल्कि ख़ुद का गला काटा है, तू अल्लाह के रसूल स.अ. के सामने एक मुजरिम बना कर लाया जाएगा और तुझसे तेरे इस घिनौने जुर्म की पूछताछ होगी कि तूने रसूल स.अ. की औलाद का नाहक़ ख़ून क्यों बहाया और रसूल स.अ. बेटियों को इधर उधर भटकने पर क्यों मजबूर किया।

ऐ यज़ीद! याद रख अल्लाह तुझसे आले रसूल अ.स. का इंतेक़ाम लेकर उन मज़लूमों का हक़ उन्हें दिलवाएगा और उन्हें दिली सुकून अता करेगा इसलिए कि ख़ुद अल्लाह का फ़रमान है कि जो लोग अल्लाह की राह में क़त्ल कर दिए गए उन्हें मुर्दा मत समझो बल्कि वह हमेशा बाक़ी रहने वाली ज़िंदगी पा चुके हैं और अल्लाह के यहां से रोज़ी हासिल कर रहे हैं।

ऐ यज़ीद! याद रख यह तूने जो ज़ुल्म आले मोहम्मद अ.स. पर ढ़हाए हैं हम अल्लाह की बारगाह में इसकी शिकायत करेंगे और जिब्रईल इसकी गवाही देंगे जिसके बाद अल्लाह अपने अद्ल और इंसाफ़ की बिना पर तुझे सख़्त अज़ाब में गिरफ़्तार कर देगा और यही बात तेरे बुरे अंजाम के लिए काफ़ी है।

बहुत जल्द वह लोग भी अपने अंजाम को पहुंच जाएंगे जिन्होंने तेरे लिए ज़ुल्म और अत्याचार की बुनियादें मज़बूत कीं और तेरी तानाशाही का सपोर्ट करते हुए तुझे सारे मुसलमानों पर थोप दिया उन लोगों को भी बहुत जल्द मालूम हो जाएगा कि ज़ालिमों का अंजाम बुरा होता है।

ऐ यज़ीद! यह हालात की मजबूरी है जो मुझे तुझ जैसे घटिया और नीच इंसान से मुख़ातिब होना पड़ रहा है लेकिन याद रख मेरी निगाह में तू एक नीच और घटिया इंसान है और तुझ जैसे से बात करना शरीफ़ लोगों का अपमान है, तू चाहे मेरी इस हक़ बयानी और बहादुरी की वजह से मुझे ज़ुल्म का निशाना ही क्यों न बना दे फिर भी मैं इसे एक अज़ीम इम्तेहान समझते हुए सब्र करूंगी और तेरा बुरा सुलूक और तेरी बद ज़बानी मेरे हौसले और सब्र को नहीं तोड़ सकते।

ऐ यज़ीद! आज हमारी आंखों में आंसू हैं और हमारे सीनों में ग़म के शोले भड़क रहे हैं, अफ़सोस तो इस बात इस बात पर है कि शैतान सिफ़त लोगों और बदनाम लोगों ने रहमान के सिपाहियों और नेक सीरत लोगों की गर्दनों को काट डाला और अभी तक इस शौतानी लश्कर के हाथों से हमारे पाक लहू की बूंदें टपक रही हैं उनके नजिस मुंह हमारा गोश्त चबाने में लगे हुए हैं और जंगल के दरिंदे उन पाक शहीदों की मज़लूम लाशों के इर्द गिर्द घूम रहे हैं और नजिस जानवर उन पाकीज़ा जिस्मों की तौहीन कर रहे हैं।

ऐ यज़ीद! अगर आज तू हमारी मज़लूमियत पर ख़ुश हो रहा है और उसे अपने दिल की ठंडक का कारण समझ रहा है तो याद रख जब क़यामत के दिन अपने इस घटिया अमल की सज़ा पाएगा तो उसका बर्दाश्त करना तेरे बस से बाहर होगा, अल्लाह आदिल है वह अपने बंदों पर ज़ुल्म नहीं करता और हम उसकी बारगाह में अपनी मज़लूमियत की दुहाई देते हैं और हर हाल में उसकी अदालत और इंसाफ़ पर हमें भरोसा है।

ऐ यज़ीद! तू चाहे जितनी मक्कारी और छल कपट कर ले और जितनी चाहे कोशिश कर के देख ले लेकिन तू न हमारी याद लोगों के दिलों से मिटा सकता है और ना ही अल्लाह के पैग़ाम को नाबूद कर सकता है।

तूने जो घिनौना जुर्म किया है उसका धब्बा कभी अपने दामन से नहीं मिटा सकता, याद रख तेरी हुकूमत बस कुछ ही दिन की रह गई है, तेरे सारे साथी तेरा साथ छोड़ देंगे और तेरे पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं होगा और उस समय बस एक ही आवाज़ गूंज रही होगी कि ज़ालिमों पर अल्लाह की लानत हो।

हम अल्लाह की बारगाह में शुक्र अदा करते हैं कि मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ. द्वारा हमें सआदत बख़्शी और इमाम हुसैन अ.स. को शहादत जैसी नेमत अता की, और हम उसकी बारगाह में दुआ करते हैं कि वह हमारे शहीदों के सवाब को और बढ़ाए और हम बाक़ी बचे हुए लोगों पर अपना करम फ़रमाए, बेशक अल्लाह ही रहमत नाज़िल करने वाला और हक़ीक़ी मेहेरबान है, हमें अल्लाह की इनायत और उसके करम के अलावा कुछ नहीं चाहिए और हमें केवल उसी पर भरोसा है इसलिए कि उससे बेहतर कोई सहारा नहीं है।


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