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Date of publication : 11/10/2018 8:18
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हानी इब्ने उरवह

मसऊदी की रिवायत के अनुसार, हानी का अपने क़बीले में इस हद तक प्रभाव था कि जब वह बनी मुराद वालों को मदद के लिए पुकारते थे तो 4000 घुड़सवार और 8000 पैदल फ़ौजी उनकी आवाज़ पर जमा हो जाते थे लेकिन जब हानी को क़त्ल करने के लिए ले जाया जा रहा था तो कोई एक भी मदद करने आगे नहीं आया।

विलायत पोर्टल :  हानी इब्ने उरवह मुरादी, इमाम अली अ.स. के ख़ास सहाबी और कूफ़े के बुज़ुर्ग लोगों में से थे, आप जमल और सिफ़्फ़ीन की जंग में भी मौजूद थे, जब हुज्र इब्ने अदी ने ज़ेयाद इब्ने अबीह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो हानी इब्ने उरवह उनके मिशन का अहम हिस्सा थे, और यज़ीद की बैअत के हमेशा विरोधी रहे, और उबैदुल्लाह इब्ने ज़ेयाद के कूफ़ा पहुंचने के समय हानी का घर शियों के राजनीतिक और फ़ौजी लोगों का सेंटर था, मुस्लिन इब्ने अक़ील के क़ेयाम में आपका अहम किरदार था, मुस्लिम इब्ने अक़ील की शहादत के बाद आपका सर भी इब्ने ज़ेयाद के हुक्म से आपके बदन से अलग कर दिया गया, आपकी शहादत की ख़बर इमाम हुसैन अ.स. को कूफ़े के रास्ते में मिली, इमाम अ.स. आपकी शहादत की ख़बर सुन कर बहुत रोए और आप पर रहमत नाज़िल करने की अल्लाह से दुआ की, आपको कूफ़े के दारुल एमारह में ही दफ़्न किया गया और आज शिया उनकी क़ब्र पर ज़ियारत के लिए जाते हैं।
आपका ख़ानादान
हानी इब्ने उरवह, इमाम अली अ.स. के बहुत सच्चे शिया, (आयानुश शिया, जिल्द 7, पेज 344) और ख़ास सहाबियों में से थे, (रेजाले तूसी, पेज 85) आप बनी मुराद के मशहूर ख़ानदान मज़हज (जमहोरतुल अनसाबिल अरब, पेज 406) के शैख़ और सरदार के घराने से थे, (क़ामूसुर रेजाल, जिल्द 10, पेज 490) आप कूफ़ा वालों की निगाह में एक जानी मानी हस्ती और मशहूर शख़्सियत थे। (अल-इमामह वस सियासह, जिल्द 2, पेज 4)
जनाब मुस्लिम के क़ेयाम में हानी का किरदार
मुस्लिम इब्ने अक़ील को जब उबैदुल्लाह की धमकी और उसके कूफ़ा आने की ख़बर मिली तो आप मुख़्तार के घर से निकल कर हानी के घर चले गए (अंसाबुल अशराफ़, बिलाज़री, जिल्द 2, पेज 336, तारीख़े तबरी, जिल्द 5, पेज 362, आलामुल वरा, जिल्द 1, पेज 438) जनाब मुस्लिम ने हानी का घर कूफ़े के सियासी हालात को देखते हुए चुना, हानी ने आख़िरी समय तक जनाब मुस्लिम की रक्षा की, और उन हालात में जितनी मदद हो सकती थी हर तरह से आपकी मदद की। इब्ने ज़ेयाद जैसे दरिंदे जिसके ख़ौफ़ की वजह से वही कूफ़ा वाले जिन्होंने इमाम अ.स. को ख़त लिख कर बुलाया था वही अपने अपने घरों में छिप कर बैठे थे ऐसे हालात में जनाब मुस्लिम जो इमाम अ.स. के सफ़ीर थे उन्हें अपने घर में पनाह देना, उनकी मदद करना, उनकी हिफ़ाज़त का बंदोबस्त करना यह हानी के ईमान की बुलंदी और अहलेबैत अ.स. के घराने की मोहब्बत को ज़ाहिर करता है।
आपकी गिरफ़्तारी और शहादत
उबैदुल्लाह इब्ने ज़ेयाद ने अपने शामी ग़ुलाम को हुक्म दिया कि वह हानी के घर पर नज़र रखे, और चूंकि हानी इब्ने ज़ेयाद से मुलाक़ात के लिए नहीं गए थे इसलिए उसने बड़ी मक्कारी से मोहम्मद इब्ने अशअस और अम्र इब्ने हज्जाज ज़ुबैदी जो हानी के दोस्त और ख़ानदान से थे उनके द्वारा उन्हें दारुल एमारह लाया गया और यह चाल न केवल हानी को गिरफ़्तार करने के लिए थी बल्कि हानी को जनाब मुस्लिम से दूर करने की भी थी, यही वजह है कि हानी के गिरफ़्तार होते ही दूसरे वह साथी जो हानी के घर में थे और जिनके साथ इब्ने ज़ेयाद की मक्कारी से निपटने की मीटिंग होती थी सभी एक के बाद एक गिरफ़्तार कर लिए गए जिसके नतीजे में जनाब मुस्लिम तन्हा रह गए और इस तरह आपका मिशन मुकम्मल न हो सका, और फिर जब हानी ने जनाब मुस्लिम को इब्ने ज़ेयाद के हवाले करने से साफ़ इंकार कर दिया तो आप पर बहुत ज़ुल्म किया गया जिसमें आपकी नाक ज़ख़्मी हो गई और फिर आपको जेल में डाल दिया गया। (तारीख़े तबरी, जिल्द 5, पेज 365, मुरव्वजुज़ ज़हब, मसऊदी, जिल्द 2, पेज 252) जनाब मुस्लिम की शहादत के बाद हानी के हाथों और पैरों को बांध कर बाज़ार में घसीटा गया और फिर इब्ने ज़ेयाद के हुक्म से उसके ग़ुलाम ने उसी बाज़ार में आपका सर काट दिया। (तबक़ात इब्ने साद, जिल्द 5, पेज 122, तारीख़े तबरी, जिल्द 5, पेज 365-367)
मसऊदी की रिवायत के अनुसार, हानी का अपने क़बीले में इस हद तक प्रभाव था कि जब वह बनी मुराद वालों को मदद के लिए पुकारते थे तो 4000 घुड़सवार और 8000 पैदल फ़ौजी उनकी आवाज़ पर जमा हो जाते थे लेकिन जब हानी को क़त्ल करने के लिए ले जाया जा रहा था तो कोई एक भी मदद करने आगे नहीं आया। (मुरव्वजुज़ ज़हब, मसऊदी, जिल्द 3, पेज 255)
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