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Date of publication : 17/10/2014 23:10
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हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई

ग़दीर की घटना सेकुलररिज़्म विचारधारा का करारा जवाब।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने ग़दीर खुम में पैगम्बर इस्लाम (स.अ) की हदीस के प्रचलित अर्थ यानी हज़रत अली (अ) की इमामत के ऐलान और हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पैग़म्बर इस्लाम (स) के वसी और उत्तराधिकारी बनने की ओर इशारा करते हुए कहा इस हदीस के दूसरे अर्थ भी हैं जिनकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए और उसके दूसरे अर्थ में इस्लामी राष्ट्र की लीडरशिप और राजनीति के बारे में इस्लाम की विशेष निगाह शामिल है।


विलायत पोर्टलः इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई ने सोमवार को ईदे ग़दीर के पावन अवसर पर जनता के विभिन्न वर्गों पर आधारित हजारों लोगों से मुलाकात में हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम की इमामत का ऐलान और इस्लाम की राजनीति और हुकूमत पर विशेष ध्यान को ग़दीर के दो मुख्य संदेश बताया और मुसलमानों के बीच एकता और एकजुटता की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर ताकीद करते हुए कहा कि हर ऐसा कदम जो शिया और सुन्नी के बीच मतभेद डालने का कारण बने वह अमेरिका, ब्रिटेन और इस्राईल की मदद के समान होगा यानी वह क़दम जाहिल और तकफ़ीरी समूहों को वुजूद में लाने वालों की मदद माना जाएगा।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने ईदे ग़दीर के अवसर पर बधाई दी और ग़दीर को इस्लामी इतिहास की प्रमुख और महत्वपूर्ण घटना बताया जिसमें शक व संदेह की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्लाम के सभी अनुयायी ग़दीर की घटना और पैगम्बरे इस्लाम (स.अ) की इस हदीस शरीफ “من کنت مولاه فهذا علی مولاه” को मानते हैं और उस पर विश्वास करते हैं और उन्हें इस हदीस और इस घटना के बारे में किसी प्रकार का कोई शक नहीं है।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा कि जो कुछ संदेह आज इस हदीस शरीफ़ और मौला शब्द के बारे में पेश किए जाते हैं वह वही एक हज़ार साल पुराने संदेह हैं जिनका हमारे बुज़ुर्ग उल्मा ठोस जवाब दे चुके हैं।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने ग़दीर खुम में पैगम्बर इस्लाम (स.अ) की हदीस के प्रचलित अर्थ यानी हज़रत अली (अ) की इमामत के ऐलान और हज़रत अली अलैहिस्सलाम के पैग़म्बर इस्लाम (स) के वसी और उत्तराधिकारी बनने की ओर इशारा करते हुए कहा इस हदीस के दूसरे अर्थ भी हैं जिनकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए और उसके दूसरे अर्थ में इस्लामी राष्ट्र की लीडरशिप और राजनीति के बारे में इस्लाम की विशेष निगाह शामिल है।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने इस्लाम दुश्मन तत्वों की ओर से उद्देश्यपूर्ण प्रचार व प्रोपगंडे द्वारा इस्लाम को राजनीति से अलग थलग करने तथा व्यक्तिगत और विशेष समस्याओं में दीन को सीमित करने की ओर इशारा करते हुए कहा कि ग़दीर की घटना धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को नकारने में इस्लाम का मजबूत और स्थिर दृष्टिकोण है क्योंकि ग़दीर ख़ुम की घटना हुकूमत और राजनीति के संदर्भ में इस्लाम के विशेष नज़र की सूचक है।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने पैग़म्बर इस्लाम (स.अ) की ओर से हजरत अली (अ.) की इमामत के ऐलान को केवल आध्यात्मिक पहलुओं तक सीमित करने वाले दृष्टिकोण को नकारते हुए कहा कि इस मुबारक घटना का वास्तविक मतलब हुकूमत और समाज के प्रबंधन पर इस्लाम का विशेष ध्यान देना है और ग़दीर का मुसलमानों के लिए यह सबसे बड़ा पाठ है।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने ग़दीर की घटना को शियों का मुख्य, मौलिक और एतेक़ादी विचार बताते हुए कहा कि ग़दीर ख़ुम की घटना के बारे में शियों के मजबूत, ठोस और निश्चित तर्क और दलील की जगह इल्मी सभाओं में है और इस मुद्दे द्वारा मुसलमानों के बीच एकता और एकजुटता को बढ़ावा देना चाहिए और इस मुद्दे का आम मुसलमानों के बीच नकारात्मक असर नहीं होना चाहिए।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने इसके बाद इस्लामी धर्मों ख़ास कर शिया और सुन्नी के बीच मतभेद डालने की साम्राज्यवादी ताकतों के षड़यंत्रों और नीतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि साम्राज्यवादी शक्तियों का उद्देश्य मुसलमानों में आपसी मतभेद और आंतरिक विवाद पैदा करके उनकी ताक़त और शक्ति को कमज़ोर करना है ताकि उनका ध्यान अपने वास्तविक दुश्मनों से हट जाए और यह वही उद्देश्य है जिसके लिए साम्राज्यवादी शक्तियों ने परियोजनाएं बना रखी हैं।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने के बारे में साम्राज्यवाद के बहुत ज़्यादा निवेश का असली कारक बताते हुए कहा कि अमेरिका, इस्राईल और फूट डालने के पुराने विशेषज्ञ ब्रिटिश सरकार ने इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से शिया और सुन्नी के बीच मतभेद डालने और असली दुश्मन की ओर से ध्यान हटाने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक दी।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने इराक और सीरिया और कुछ अन्य देशों में सल्फ़ी वहाबी तकफीरी विचार को मुसलमानों में मतभेद पैदा करने के लिए साम्राज्यवादी ताक़तों की योजना बताते हुए कहा कि साम्राज्यवादी शक्तियों ने ईरान का मुकाबला करने के लिए अलक़ायदा और दाइश जैसे संगठनों को बनाया लेकिन अब यह संगठन खुद उनके लिये मुसीबत खड़ी कर रहे हैं।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने क्षेत्र के मौजूदा हालात की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्तमान घटनाओं का गहरे और गहन अध्ययन और विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने दाइश के खिलाफ़ जो तथाकथित और झूठी कार्रवाई शुरू की है उसका उद्देश्य मुसलमानों के बीच फूट, दुश्मनी और बैर को बढ़ावा देना है।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने बल देते हुए कहा कि जो इंसान इस्लाम का पाबंद है और क़ुरआन की संप्रभुता पर विश्वास रखता है उसे चाहिए कि वह शिया हो या सुन्नी इस सच्चाई को समझे कि अमेरिका और इस्राईल की नीतियां इस्लाम और मुसलमानों की वास्तविक और असली दुश्मन हैं।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने दूसरे मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से पूरी तरह परहेज करने पर बल देते हुए कहा कि शिया और सुन्नी दोनों को समझ लेना चाहिए कि एक दूसरे की भावनाओं को भड़काने और फूट डालने से निश्चित तौर पर मुसलमानों के संयुक्त दुश्मन को फ़ायदा पहुंचेगा।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने अपने भाषण के अंत में 35 वर्षों में विश्व मुंहजोर शक्तियों के सभी षड्यंत्रों की विफलता की ओर इशारा करते हुए कहा कि अल्लाह की कृपा से इस बार भी ईरानी राष्ट्र के दुश्मनों को हार व नाकामी का सामना करना पड़ेगा और ईरान में ज़िंदगी बिताने वाले सभी मुसलमान जागरूकता और अंतर्दृष्टि के साथ अपने दायित्वों पर अमल करते रहेंगे।


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