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Code : 61377
Date of publication : 19/10/2014 22:39
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हिज़बुल्लाह की 3 लाख मिसाइलें इस्राईल का जवाब देने को तय्यार।

अगर इस्लामी प्रतिरोध, ग़ासिब इस्राईल को हरा सकता है तो चरमपंथी समूहों को भी हरा सकती है जैसा कि हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि इस्लामी प्रतिरोध, साम्राज्यवादी और तकफ़ीरी षड़यंत्रों से मुक़ाबला करके नए मध्यपूर्व का गठन कर सकता है


विलायत पोर्टलः लेबनान की उल्मा काउंसिल के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम अली यासीन ने मध्यपूर्व के हालिया परिवर्तनों और विभिन्न देशों के तकफ़ीरियों के समर्थन का मक़सद क्षेत्र में इस्लामी रिपब्लिक ईरान का राजनीतिक और फ़ौजी घेराव जानते हुए कहा इमाम खुमैनी (रह) ने जब ​​फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन और ग़ासिब इस्राईल से मुक़ाबले का दृष्टिकोण पेश किया है, साम्राज्यवादी देश अपने लक्ष्यों और इस्राईल के हितों को पूरा करने की कोशिश में हैं और उन्होंने ईरान को कमजोर करने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है।
उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि लेबनान और फ़िलिस्तीन के इस्लामी रिपब्लिक ईरान द्वारा समर्थन ने नये मध्य पूर्व के गठन को लेकर अमेरिकी षड़यंत्रों का भंडा फोड़ दिया है, कहाः जब ग़ासिब इस्राईल खुद को प्रतिरोध से सीधे मुक़ाबले में असमर्थ पाया तो इस्लाम के नाम पर चरमपंथी व आतंकवादी समूहों को जन्म दिया ताकि इस तरह इस्लाम पर सवालिया निशान लगा सकें और इस्लामी प्रतिरोध की क्षमताओ को निष्क्रिय बना सकें।
इस लेबनानी आलिमे दीन ने कहा: अगर इस्लामी प्रतिरोध, ग़ासिब इस्राईल को हरा सकता है तो चरमपंथी समूहों को भी हरा सकती है जैसा कि हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि इस्लामी प्रतिरोध, साम्राज्यवादी और तकफ़ीरी षड़यंत्रों से मुक़ाबला करके नए मध्यपूर्व का गठन कर सकता है। उन्होंने कहा: लेबनान पर ग़ासिब इस्राईल का संभावित हमला बहुत बड़ी मूर्खता होगी और जब वर्षों नाकेबंदी में घिरे किए हुए शहर ग़ज़्ज़ा के मुक़ाबले में इस्राईल नहीं जीत सका तो लेबनानी प्रतिरोध के मुक़ाबले में कैसे जीतेगा, उन्हें पता है कि हिज़बुल्लाह के 3 लाख से अधिक मिसाईल उनकी किसी भी मूर्खता का इंतेज़ार कर रहे हैं, उनकी छोटी से चूक अधिकृत फ़िलिस्तीन को मिट्टी के ढेर में बदल देगी।


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