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Date of publication : 22/10/2014 17:37
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आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी

मजलिसों में दूसरे मज़हबों के अपमान से बचें।

ईरान के मशहूर और बुजुर्ग मरजा-ए-तक़लीद आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने कहा है कि अशरा-ए-मुहर्रम की मजलिसों में कभी भी दूसरे मज़हबों के बुज़ुर्गों का अपमान न किया जाए और दूसरों की मज़हबी भावनाओं को ठेंस न पहुंचाई जाये।


विलायत पोर्टलः ईरान के मशहूर और बुजुर्ग मरजा-ए-तक़लीद आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने कहा है कि अशरा-ए-मुहर्रम की मजलिसों में कभी भी दूसरे मज़हबों के बुज़ुर्गों का अपमान न किया जाए और दूसरों की मज़हबी भावनाओं को ठेंस न पहुंचाई जाये।

रिपोर्ट के अनुसार ईरान के बुज़ुर्ग मरजा-ए-तक़लीद हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने इस्लामी इंक़ेलाब की सशस्त्र सेना सिपाहे पासदारान के ख़तीबों, ज़ाकेरीन और नौहाख़ानों से मुलाक़ात में मुबाहेला की बधाई देते हुए कहा कि अशरा-ए-मुहर्रम की मजलिसों में कभी दूसरों के बुज़ुर्गों का अपमान न किया जाये।

उन्होंने कहा कि मुबाहेला में अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम को रसूलुल्लाह (स.अ) के नफ़्स व जान के रूप में पेश किया गया है, इस सिलसिले में मौजूद आयतों पर सभी सहमत हैं, मुबाहेला के बारे में हदीस व रिवायतों का मुद्दा नहीं है कि जिसके सही या ग़लत होने के बारे में शक किया जाये, तमाम शिया व सुन्नी मुफ़स्सिर इस बात को क़बूल करते हैं कि आयते मुबाहेला पैग़म्बर इस्लाम (स.अ), हज़रत अली (अ.), हज़रत ज़हरा (स) व हसनैन (अ.ह) के बारे में नाज़िल हुई है।

हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने अमीरुल मोमेनीन अली अलैहिस्सलाम की ओर से नमाज़ की हालत में अगूंठी दिये जाने के महत्व के बारे में कहा कि अल्लाह तआला ने फ़रमाया है कि विलायत का पद अल्लाह और पैग़म्बर और नमाज़ की हालत में अंगूठी देने वाले के लिए है। “शिया व सुन्नी उल्मा व मुफ़स्सेरीन ने इस आयत के बारे में कहा है कि बिना शक व संदेह के यह आयत अली इब्ने अबी तालिब अ.ह के लिए नाज़िल हुई है।

हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी ने रसूले इस्लाम की हदीस की ओर इशारा करते हुए कि पैग़म्बरे इस्लाम स.अ ने कहा “हुसैन इब्ने अली अलैहिस्सलाम की शहादत की गर्मी मोमिनों के दिलों में है जो हरगिज़ ठंडी नहीं हो सकती है” कहा कि आज हम इसे अपनी आंखों से देख रहे हैं और दिन प्रतिदिन आपकी शहादत की प्रभाव और बरकतों में बढ़ोत्तरी होती जा रही है, जैसा कि रसूले इस्लाम स.अ ने कहा कि इमाम हुसैन अ.ह की आग हरगिज़ ख़ामोश नहीं होगी और क़यामत तक के लिये अमर हो जाएगी।

उन्होंने अशरा-ए-मुहर्रम की मजलिसों में कभी भी दूसरे मज़हबों के अपमान न किए जाने पर बल देते हुए कहा कि इस अपमान के नतीजे में निर्दोष शियों का खून बहाया जाता है। उन्होंने कहा कि एक आदमी ने मुझसे बयान किया कि आत्मघाती हमलों की ट्रेनिंग देने में दूसरों के अपमान की सीडी को दिखा कर उन्हें इस काम के लिये भड़काया जाता है।

हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी ने कहा कि आज की दुनिया कल की दुनिया से अलग है, आज अगर कोई किसी बात को कहे तो पूरी दुनिया में प्रसारित होती है, इन परिस्थितियों में वहाबी, शिया और सुन्नी को एक दूसरे के ख़ून का प्यासा बनाना चाहते हैं तो हम इन परिस्थितियों में संयम से काम लें ताकि दुनिया के शियों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि शिया व सुन्नी एकजुट हों ताकि वहाबी तकफ़ीरी आतंकवाद के खतरों से सुरक्षित रह सकें।


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