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Date of publication : 1/12/2014 21:3
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हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई

परमाणु वार्ता नाकाम हुई तो अमेरिका को होगा नुक़सान।

इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने इमाम खुमैनी र.ह की अंतरदृष्टि और होशियारी का उल्लेख किया जो विभिन्न चरणों और परिस्थितियों में तत्काल समस्याओं की व्याख्या और अपना पक्ष निर्धारित कर लेते थे।


विलायत पोर्टलः इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने स्वयंसेवक बल “बसीज” की जनरल असेम्बली के सदस्यों तथा बसीज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से मुलाकात में इलाही और इंसानी ज़िम्मेदारियों की पहचान और अंतर्दृष्टि को बसीजी ढ़ांचे के दो मुख्य स्तंभ बताया और ईरान की वार्ताकार टीम की दृढ़ता, स्थिरता और मेहनत व लगन की सराहना करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ईरानी राष्ट्र को अमेरिका का विश्वास जीतने की कोई ज़रूरत नहीं है।
आपने फरमायाः “जिन कारणों से हमने खुद परमाणु वार्ता का विरोध नहीं किया था उन्हीं कारणों के आधार पर बातचीत की अवधि में विस्तार का भी हमने विरोध नहीं किया। सुप्रीम लीडर ने कहा कि हम हर तार्किक और उचित समझौते को स्वीकार करेंगे, लेकिन हमें यह विश्वास है कि समझौते की जरूरत अमेरिकी सरकार को है और समझौता न होने की स्थिति में उसे नुकसान उठाना पड़ेगा, जबकि वार्ता के किसी नतीजे पर न पहुंचने की स्थिति में ईरान को कोई नुकसान नहीं होने वाला है।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने गहन विचार, इल्म और तर्क के साथ प्रेम और भावनाओं के मिश्रण को विभिन्न क्षेत्रों और मैदानों में स्वयंसेवक बल “बसीज” की कामयाब गतिविधियों और व्यापक सेवाओं का रहस्य बताया। आपने कहा: “बसेजी सोच जो मज़बूत दीनी सिद्धांतों से ली गई है, उसका पहला और सबसे बुनियादी स्तंभ, अपने, अपने परिवार, अपने समाज और पूरी इंसानियत के हवाले से ख़ुदाई और इंसानी ज़िम्मेदारियों की पहचान है। सुप्रीम लीडर ने कहा कि “बसीजी नज़रिये का दूसरा स्तंभ जो पहले स्तंभ की पूर्ति और ज़रूरी शर्त है, अंतर्दृष्टि और उदार विचार यानी समय की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं की पहचान, दोस्त और दुश्मन की पहचान और दुश्मन से मुक़ाबले के संसाधनों की जानकारी का होना।“
सुप्रीम लीडर ने अंतर्दृष्टि के अभाव को संदेह, नादानी और टेढ़ी सोच के जाल में उलझ जाने की असली वजह बताते हुए कहा कि “जिनके पास अंतरदृष्टि नहीं है, वर्ष 2009 (में राष्ट्रपति चुनाव के बाद उत्पन्न होने वाले) वाले दंगों और षड़यंत्रों के शिकार लोगों की तरह, दूमिल माहौल में आगे बढ़ते और कदम उठाते है, तो अतिसंभव है कि वह दुश्मन की मदद करने लगें और दोस्त पर हमलावर हो जाएं।“ इस्लामी क्रांति उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने जोर देकर कहा कि अंतर्दृष्टि न होने की स्थिति में फ़्रीज़े का एहसास बहुत खतरनाक हो जाता है। आपने कहा कि क्रांति से पहले संघर्ष के दौरान और पिछले तीन दशकों के इस समय में कुछ लोगों ने अंतर्दृष्टि न होने की वजह से भावना जिम्मेदारी के तहत ऐसे कदम उठाए कि जिनका प्रदर्शन इमाम खुमैनी आंदोलन इस्लामी क्रांति और प्यारे वतन के लिए पहुंचाया एजेंसी साबित हुआ।
सुप्रीम लीडर ने वर्ष 2009 के दंगों के दौरान बार बार अंतर्दृष्टि पर बल देने का हवाला देते हुए कहा कि इन्हीं दिनों में कुछ लोग लगातार अंतर्दृष्टि अंतर्दृष्टि कहने से नाराज भी हुए लेकिन मैंने फिर भी अंतर्दृष्टि पर बार बार ताकीद जारी रखी क्योंकि इंसान के अंदर अगर अंतर्दृष्टि न हो तो जितना ज़्यादा ज़िम्मेदारी का एहसास होगा वह उतना ही अधिक खतरनाक बन जाएगा और ऐसे लोगों पर किसी भी तरह का भरोसा नहीं किया जा सकता।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने इमाम खुमैनी र.ह की अंतरदृष्टि और होशियारी का उल्लेख किया जो विभिन्न चरणों और परिस्थितियों में तत्काल समस्याओं की व्याख्या और अपना पक्ष निर्धारित कर लेते थे। सुप्रीम लीडर ने कहा कि इमाम खुमैनी र.ह ने स्वयंसेवी बल “बसीज” के गठन का आदेश जारी किया और साथ ही उसकी दिशा और रूख का निर्धारण करते हुए कहा कि जो कुछ आक्रोश और ग़ुस्सा है उस अमेरिका पर निकालें। सुप्रीम लीडर ने इमाम खुमैनी के इस मशहूर कथन को भी दोहराया कि “इस्लामी सिस्टम की रक्षा सबसे ज़्यादा ज़रूरी और वाजिब है।“
सुप्रीम लीडर का कहना था कि जो लोग इमाम खुमैनी र.ह की बात को सही से नहीं समझ सके वह कुछ अवसरों पर बड़ी ग़लतियों का शिकार हुए। आपने कहा कि स्वयंसेवक बल “बसीज” को अपने असली स्तंभ यानी जिम्मेदारी की भावना और उसकी ज़रूरी शर्त यानी अंतर्दृष्टि से कभी भी लापरवाह नहीं बरतनी चाहिए। सुप्रीम लीडर ने जोर देकर कहा कि इसी दृष्टिकोण की मदद से “बसीज” की सही परिभाषा हो सकती है। आपने कहा कि जो इंसान भी जिम्मेदारी की भावना और अंतर्दृष्टि के साथ व्यस्त हैं, वह कहीं भी हों “बसीजी” है। इस आधार पर ईरानी राष्ट्र का स्पष्ट बहुमत बसीजियों पर आधारित है।
सुप्रीम लीडर ने कहा लेकिन इस महान संगठन का असली केंद्र बसीज का प्रतिरोध बल है जिसे अनुशासन, शिक्षा, प्रशिक्षण और सेवा व भागीदारी का स्रोत होना चाहिए। सुप्रीम लीडर ने स्वैच्छिक सेवा के क्षेत्र को बहुत व्यापक और असीमित बताते हुए कहा कि रक्षा, निर्माण, राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऑर्ट, साइंस व टेक्नॉलोजी, धार्मिक संस्थाएं बल्कि सारे ही क्षेत्र स्वयंसेवकों की गतिविधियों और सेवाओं के क्षेत्र हैं। सुप्रीम लीडर ने इस बात पर जोर देते हुए कि इन सभी क्षेत्रों में काफी और मानक आदर्श मौजूद हैं, कहा कि “इन प्रमुख हस्तियों ने साइंस, टेक्नॉलोजी और रिसर्च के मैदान में “बसीजी” तरीक़े से काम किया और ऐसे समय में जब दुश्मन बहुत ज़्यादा क्रूर अंदाज में यह प्रयास किया कि ईरानी राष्ट्र के लिये सभी दरवाजे बंद कर दे और बीमारों की न्युकिलयर मेडिसिन तक पहुँच को भी असंभव बना दे, शहीद शहरयारी और उनके सहयोगियों ने बसेजी (स्वैच्छिक सेवा) शैली पर चलते हुए बीस प्रतिशत ग्रेड तक संवर्धन यूरेनियम और फ्यूल पलेट्स तैयार करने में कामयाबी हासिल की।“
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई एक और महत्वपूर्ण विषय की ओर इशारा करते हुए कहा: “यह बसीजी विचारधारा कि जिसकी नींव इमाम खुमैनी र.ह ने रखी, अब फैलती जा रही है और बसंत के मौसम के फूलों की खुशबू बन गई है जिसे कोई सीमित नहीं कर सकता है।“ आपने फरमाया: “बसीजी विचारधारा को आज इराक़, सीरिया, लेबनान और ग़ज़्ज़ा में देखा जा सकता है और इंशा अल्लाह अब वह दिन दूर नहीं जब बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़सा की आज़ादी के लिये भी हमें यही सीन देखने को मिलेगा। सुप्रीम लीडर ने कहा कि इन्हीं तथ्यों के आधार पर और स्वैच्छिक सेवा की बरकत से ईरान न हारने वाली ताक़त बन चुका है।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने कहा कि ईरानी जनता के बहुमत का बसीजी बन जाना इस्लामी इंक़ेलाब की अपराजित ताक़त बन जाने का रहस्य है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि परीक्षाओं और आगे बढ़ने के लिए सही दिशा के निर्धारण के मामले में लापरवाही बरती जाए। सुप्रीम लीडर ने कहा कि इस्लामी सिस्टम की तरक़्क़ी की वास्तविक दिशा, साम्राज्यवाद और अमेरिका की साम्राजी हुकूमत से मुक़ाबले पर आधारित है और इस रुख और अंदाज़ में कोई लापरवाही या ग़ल्ती नहीं होनी चाहिए, हालांकि हमको अमेरिका की जनता और इस देश से कोई मुश्किल नहीं है, हमारी सारी मुश्किल अमेरिकी सरकार के साम्राज्यवादी और जोर जबरदस्ती वाली नीतियां हैं। सुप्रीम लीडर ने सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों और जर्मनी पर आधारित ग्रुप 5+1 के साथ ईरान की परमाणु वार्ता की अवधि में अंजाम पाने वाले विस्तार के बारे में कहा कि जिस वजह से हमने खुद बातचीत का विरोध नहीं किया, उसी वजह से वार्ता की अवधि में विस्तार का भी हम विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन कुछ प्वाइंट्स पर ध्यान रखना चाहिए।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने ईरान की परमाणु वार्ता टीम को मेहनती, दृढ़तापूर्ण, दरदमंदी के साथ, लगन से काम करने वाली टीम बताया और कहा: “ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वास्तव में साम्राज्यवादी मांगों का भरपूर प्रतिरोध और प्रतिद्वंद्वी पक्ष के विपरीत हर दिन अपना पक्ष नहीं बदला।“ सुप्रीम लीडर ने अमेरिका के दोहरे रवय्ये का हवाला देते हुए कहा कि वह बंद दरवाजों के पीछे बातचीत और अपनी चिट्ठियों में किसी और तरीके से बात करते हैं और सार्वजनिक रूप से किसी और लहजे में बयान देते हैं। इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने ईरान के प्रतिद्वंदियों के कई राजनीतिक, कूटनीतिक और संचार मोर्चों का हवाला देते हुए कहा कि “हम से बातचीत करने वाले हर इंसान के पीछे पूरा एक लश्कर होता है और उनमें अमेरिकी सबसे अधिक अनैतिकता से दूर और ब्रिटिश सबसे ज़्यादा हानिकारक होते हैं।“
सुप्रीम लीडर ने कहा कि “ईरान की जनता भी जान लें और बातचीत में शामिल प्रतिद्वंद्वी पक्ष भी सुन लें कि अगर बातचीत किसी नतीजे पर न पहुंचे तो सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाने वाले हम नहीं, अमेरिकी होंगे।“ सुप्रीम लीडर ने कहा कि “हम पूरे विश्वास के साथ और मज़बूत तर्क के आधार पर यह नज़रिया रखते हैं कि साम्राज्यवाद का असली मक़सद ईरानी राष्ट्र को सुधार विकास, प्रतिष्ठा और मज़बूत हुकूमत से दूर करना है।“ सुप्रीम लीडर का कहना था कि परमाणु समस्या तो मात्र एक बहाना है। आपने कहा “हालांकि उनके पास दूसरे भी बहाने हैं और सबसे महत्वपूर्ण उपाय के रूप में प्रतिबंध लगाने और आर्थिक दबाव डालने से उनका वास्तविक उद्देश्य ईरान की प्रगति और विकास को रोकना है।“
सुप्रीम लीडर ने पश्चिमी स्रोतों की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति की लोकप्रियता में भारी कमी, अमेरिका के हालिया चुनावों में जनता की बहुत सीमित भागीदारी को स्वीकार करना और फरगोस्न की हालिया घटनाओं को अमेरिकी सरकार और जनता के बीच पाई जाने वाली गहरी खाई के बहुत से लक्षणों में से कुछ लक्षण बताया और ईरान से परमाणु वार्ता की अमेरिकी सरकार की मजबूरी का हवाला देते हुए कहा कि “उन्हें दिन प्रतिदिन की कठिनाइयों के मद्देनजर अमेरिकी अधिकारियों को एक बड़ी सफलता और जीत की सख़्त ज़रूरत है। लेकिन अगर वार्ता किसी सहमति पर नहीं पहुंचते तो अमेरिका के विपरीत हमारे लिए कोई बहुत बड़ी आपदा नहीं आ जाएगी, क्योंकि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के नाम से हमारे पास एक समाधान मौजूद है। "
सुप्रीम लीडर का कहना था कि अल्पाअवधि में आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था दुश्मन के हमलों के प्रभाव को कम करेगी और जैसा कि विशेषज्ञों का मानना है, मध्यावधि और लंबी अवधि में यह अर्थव्यवस्था ईरानी राष्ट्र की महान उन्नति को शीर्ष पर पहुंचा देगी। वार्ता की अवधि में विस्तार के बाद कुछ अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दिए जाने वाले बयानों की कड़ी आलोचना करते हुए सुप्रीम लीडर ने कहा कि “वह कहते हैं कि ईरान को चाहिए कि विश्व समुदाय का विश्वास हासिल करे, इस वाक्य में दो प्वाइंट सरासर गलत हैं। एक प्वाइंट यह है कि इन मुट्ठी भर देशों ने खुद को विश्व समुदाय का नाम दे दिया है और अपनी इस बात को सही साबित करने के लिए गुट निरपेक्ष आंदोलन के लगभग डेढ़ सौ सदस्य देशों और दुनिया भर के अरबों लोगों की व्यावहारिक रूप से अनदेखी कर रहे हैं।“ सुप्रीम लीडर के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों के इस वाक्य में दूसरा प्वाइंट यह है कि हमें अमेरिका का विश्वास हासिल करने की कोई जरूरत नहीं है। हम चाहते ही नहीं कि उसका विश्वास हासिल करें क्योंकि हमारे लिए उसका कोई महत्व ही नहीं है।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने जोर देकर कहा कि “यह साम्राज्यवादी आदत रखने वाले लोग हैं और ऐसे लोगों से हमारी कभी नहीं बन सकती।“ सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी अधिकारियों के बयानों में दिखने वाले इस विषय का भी हवाला दिया कि वह परमाणु वार्ता के तहत इस्राईल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम लीडर ने कहा कि “यह जान लीजिए कि परमाणु समझौता हो या न हो, इस्राईल दिन प्रतिदिन और अधिक असुरक्षित होता जाएगा।“ सुप्रीम लीडर ने कहा कि अमेरिकियों के ख़ुद इस बयान में सच्चाई नहीं है क्योंकि अमेरिकी अधिकारी वास्तव में व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता में हैं, इस्राईल की सुरक्षा की चिंता में नहीं। इस महत्वपूर्ण विषय की व्याख्या करते हुए सुप्रीम लीडर ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों का असली मक़सद यहूदी पूंजीपतियों के वैश्विक नेटवर्क को खुश रखना है, क्योंकि यह नेटवर्क उन्हें रिश्वत, पैसा और पद भी देता है और विरोध करने की स्थिति में उन्हें धमकी देता है, अपमानित करता है या फिर रास्ते से हटा देता है उनकी हत्या कर देता है।
सुप्रीम लीडर ने ईरान में जनता के सामने अधिकारियों की सच्चाई और जोर जबरदस्ती की मांग के सामने ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध का हवाला देते हुए कहा कि अगर बातचीत में तार्किक बात की गई और उचित अनुबंध हुआ तब तो हम स्वीकार करेंगे लेकिन ईरान, उच्च अधिकारियों से लेकर जनता और सभी अधिकारी हर स्तर पर साम्राज्यवाद का मुकाबला करेगें। सुप्रीम लीडर ने अपने भाषण के अंतिम भाग में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कुछ प्वाइंट्स बयान किए। आपने संयम, विवेक, ईमानदारी और अच्छे कैरेक्टर एंव बहादुरी, बलिदान, अहंकार और घमंड से दूरी, विभिन्न बहकावों के मुक़ाबलें में ईमान और अमल में किसी तरह की कमज़ोरी पैदा न होने की सिफारिश की और बसीज के अंदर सभी वर्गों में प्रबंधन और इन वर्गों के आपसी संपर्क पर जोर दिया। सुप्रीम लीडर ने बसीज के और अधिक विकास में सरकार की भरपूर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का आधार, आंतरिक उत्पादन में विकास और सरकारी अधिकारियों को चाहिए कि इस संबंध में बसीज की सेवाएं हासिल करें।


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