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Date of publication : 12/12/2014 9:40
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हुसैन डे पर गवर्नर ने व्यक्त किए विचार

इंसानियत के लिए क़ुरबानी देना सबके बस की बात नही।

हुसैन डे में गवर्नर उत्तर प्रदेश मिस्टर रामनाईक ने नौ नामी गिरामी हस्तियों को उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए मेडल देकर सम्मानित किया।


विलायत पोर्टलः लखनऊ, अवधनामा के एजूकेश्नल एण्ड चेयरटेबिल ट्रस्ट के तत्वाधान में अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित हुसैन डे में गवर्नर उत्तर प्रदेश मिस्टर रामनाईक ने नौ नामी गिरामी हस्तियों को उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए मेडल देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर गवर्नर के अलावा मेहमानों में आचार्य श्री प्रमोद कृष्नन और पूर्व केन्द्रीय मन्त्री भारत सरकार जनाब आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने भी अपने विचार व्यक्त किए। चीफ़ गेस्ट के तौर पर बोलते हुए गवर्नर श्री रामनाईक ने कहा कि, आयोजकों ने “ह्यूमन राईट्स डे” को इंसानियत के मसीहा इमाम हुसैन (अ) से जोड़कर अनूठा काम किया है, उन्होंने कहा कि यह कोई आसान या छोटा काम नही है कि कोई इंसान अपने परिवार व रिश्तेदारों को अपने उसूलों और इंसानियत के लिए क़ुरबान कर दे।
उन्होंने कहा की पार्लियामेंट के सेन्ट्रल हाल में संस्कृत का एक इश्लोक लिखा हुआ है जिसका मतलब है “तेरा मेरा करने के बजाए पूरी दुनिया के इंसानों को एक परिवार मानना चाहिए” उन्होंने सभी सम्मान पाने वालों से कहा की वह हमेशा इंसानियत के मसीहा इमाम हुसैन से प्रेरणा लेते हुए इंसानियत के लिए काम करें। पूर्व केन्द्रीय मन्त्री जनाब आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि इस्लाम में बादशाहत के लिए कोई जगह नही है और जो लोग बादशाह बन बैठे उनसे कोई पूछे कि तुम किस इस्लामी क़ानून के तहत बादशाह बने हो?
उन्होंने कहा कि मुश्किल यह है कि हम जिनके प्रति अक़ीदत और सम्मान रखते हैं, जिनकी महानता को हम स्वीकार करते हैं, उनके कथनों को उनकी सीरत की रोशनी में नहीं बल्कि अपने दिमाग़ और अपनी राय से समझना चाहते हैं।
उन्होंने करबला के हवाले से कहा कि जब तक हम इतिहास से सीख नही लेंगे इतिहास अपने आपको दोहराता रहेगा। इस अवसर पर इमाम हुसैन(अ) से सच्ची मोहब्बत व अक़ीदत रखने वाले मशहूर धर्म गुरू आचार्य प्रमोद कृष्नन ने कहा कि आज के इस दौर में जहां इंसान इंसान का दुश्मन हो रहा है, एक मुल्क दूसरे मुल्क का दुश्मन हो रहा है। ऐसे में मुझे लगता है कि इमाम हुसैन और उनके उपदेशों की इस दुनिया को बहुत ज़रूरत है।
आचार्य ने कहा कि अगर हम इमाम हुसैन (अ) की ज़िन्दगी पर निगाह डालें तो उनकी ज़िन्दगी का हर पहलू मोहब्बत, सेवा, शहादत,और इबादत का संदेश देता है। उन्होंने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि आज सारी दुनिया में इस्लाम को बदनाम करने की साज़िश हो रही है, और इस काम को ऐसी ताक़तें और आसान कर रही हैं जो इस्लाम को मानती तो हैं लेकिन जानती नही हैं। हज़रत इमाम हुसैन(अ) का जीवन इस बात का खुला सबूत है कि इस्लाम अन्याय, अत्याचार और ज़बरदस्ती का नाम नही है। इस्लाम किसी भी बेगुनाह का ख़ून बहाने की अनुमति नही देता है।
जिसकी बुनियाद में इमाम हुसैन(अ) की शहादत है। आचार्य जी ने कहा कि मुझे लगता है कि कुछ लोग अपना इस्लाम लाना चाहता हैं। इस लिए वह इस्लाम की व्याख्या अपने हिसाब से कर रहे हैं। वास्तव में अगर साफ़ दिल और खुली निगाह से देखा जाए और सही नज़रिये से सोचा जाए तो फ़ाशिज़िम और अत्याचार के लिए इस्लाम में कोई स्थान नही है। अगर फ़ाशिज़िम और ज़ुल्म का नाम इस्लाम होता तो वह दुनिया में नही फैलता।
आचार्य प्रमोद कृश्नन ने कहा कि, क्योंकि जो चीज़ कठोर होती है वह सिकुड़ती है और जो चीज़ कोमल व नाज़ुक होती है वह फैलती है, इसलिए नफ़रत के इस दौर में हज़रत इमाम हुसैन की बातों पर चलना और उन्हें अपने जीवन में उतारना हर एक इंसान पर फ़र्ज़ है, क्योंकि इमाम हुसैन की नसीहतें और उनका संदेश केवल मुसलमानों के लिए ही नही है बल्कि पूरी इंसानियत के लिए है। इस अवसर पर आचार्य प्रमोद कृश्नन ने एक शेर पर दर्शकों की बहुत वाह वाह बटोरी- उन्हों ने पढ़ा कि-
कह कर यूं, तेरा-मेरा इसको न बांटे
हम हैं सभी हुसैन के, हमारा हुसैन है।
अन्त में आचार्य ने राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए कहा कि आज हमारे मुल्क में हर जगह लोग दीवारें खड़ी कर रहे हैं। कहीं ज़ात के नाम पर कहीं भाषा के नाम पर कहीं धर्म के नाम पर और कहीं ऊंच नीच के नाम पर , आज हम इस हुसैन डे के अवसर पर शपथ लें कि इंसान को इंसान से बांटने वाली हर एक दीवार गिरा देंगे और यह हमारी ओर से हज़रत इमाम हुसैन(अ) को सच्ची श्रद्धांजली होगी।


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