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Code : 65059
Date of publication : 21/12/2014 0:1
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2014 बच्चों के लिए दर्दनाक और दुखद साल।

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ़ ने दुनिया में बच्चों के साथ हिंसा में बढ़ोत्तरी पर चिंता व्यक्त करते हुए इस के परिणामों के प्रति चेतावनी दी है।


विलायत पोर्टलः संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ़ ने दुनिया में बच्चों के साथ हिंसा में बढ़ोत्तरी पर चिंता व्यक्त करते हुए इस के परिणामों के प्रति चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र के बच्चों के मामलों की संस्था यूनिसेफ़ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में घोषणा की है कि दो हजार चौदह में बच्चों के विरुद्ध हिंसा में अत्यंत बढ़ोत्तरी हुई है और यह साल उनके लिए मुसीबतों का साल रहा है।
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार दो हजार चौदह में पाकिस्तान, यमन और दुनिया के दूसरे इलाक़ों में बच्चों पर हमले में गंभीर रूप से बढ़ोत्तरी हुई है। यूनिसेफ ने अपनी यह रिपोर्ट ऐसी स्थिति में जारी की है कि सोमवार को पेशावर में तालिबान ने आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला करके बच्चों का नरसंहार किया है। तालिबान के इस बर्बर हमले में एक सौ चालीस से अधिक लोग शहीद हुए जिनमें एक सौ बत्तीस बच्चे शामिल हैं।
यूनिसेफ ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि 2015 हिंसा और आतंकवाद से बच्चों की सुरक्षा का साल होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने भी घोषणा की है कि इस बात के मद्देनजर कि जंग व ख़ून ख़राबे और आतंकवाद के शिकार देशों में दो सौ तीस लाख बच्चे मौजूद हैं, दो हजार चौदह में बच्चे चरमपंथ और आतंकवाद की ज़्यादा भेंट चढ़े हैं। संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की है कि 2015 में, चरमपंथ, आतंकवाद और हिंसा से बच्चों की सुरक्षा के कार्यक्रम पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है।
संयुक्त राष्ट्र ने ऐलान किया है कि दो हजार चौदह में बच्चों के साथ बर्बर हिंसा और उन्हें आतंकवादी हमलों में निशाना बनाने की घटनाओं में ऐसी स्थिति में बढ़ोत्तरी हुई है कि बच्चों की मौत दर कम करने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। यूनिसेफ ने अपनी रिपोर्ट में दो हजार चौदह को बच्चों के लिए आक्रामक और दर्दनाक साल बताया है और कहा है कि डेढ़ करोड़ बच्चे दो हजार चौदह की बड़ी जंगों और लड़ाईयों में शिकार बने हैं और सशस्त्र आतंकवादी गुटों ने उनका शोषण किया और उन्हें आतंकवादी लक्ष्य के लिए इस्तेमाल किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार उनमें से बहुत से बच्चे अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं, बहुत से बलात्कार का निशाना बने, बहुत से बच्चों को बर्बर यातनाएं दी गईं और आतंकवादी गुटों ने बहुत से बच्चों का अपहरण करके उन्हें आतंकवादी अपराधों में अपने सैनिकों के रूप में इस्तेमाल किया या फिर उन्हें गुलाम और कनीज़ बना के बेच दिया है।
यूनिसेफ के महानिदेशक एंथोनी लेक (LAK) ने ख़बरदार किया है कि अगर इस सिलसिले को न रोका गया तो दुनिया बच्चों के संबंध में अत्यंत दुखद हातात से रूबरू होगी। इस रिपोर्ट में बच्चों के साथ हिंसा के संबंध में जिन देशों का नाम लिया गया है उनमें, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ग़ज़्ज़ा, इराक़, सीरिया, दक्षिण सूडान और केंद्रीय अफ्रीका के नाम उल्लेखनीय हैं।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दो हजार चौदह की गर्मियों में ग़ज़्ज़ा पर इस्राईली हुकूमत की पचास दिवसीय जंग के दौरान जायोनी सेना के हमलों के परिणाम स्वरूप पांच सौ अड़तीस बच्चे शहीद और तीन हजार सात सौ सत्तर घायल जबकि 54 हजार से अधिक बच्चे बेघर हुए हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी देशों में, बच्चे सबसे ज़्यादा अमेरिका में मारे गये हैं या हिंसा का निशाना बने हैं।


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