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Code : 77213
Date of publication : 19/6/2015 19:51
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एंडीपेंडेंट:

सऊदी सरकार और आईएस आतंकवादियों में कोई अंतर नहीं।

"फ्रेंच वैन" ने बुधवार के दिन अंग्रेजी पत्रिका एंडीपेंडेंट में एक लेख में लिखा: राईफ बदवी को सऊदी अरब में इंटरनेट पर एक साईट बनाने और उसके माध्यम से आज़ादी की मांग के प्रचार करने के जुर्म में तीन साल से कैद में रखा गया है। लेकिन सऊदी अरब चाहे कुछ भी करे ब्रिटेन इस देश का मुकाबला करने से डरता है।


विलायत पोर्टलः रिपोर्ट के अनुसार "फ्रेंच वैन" ने बुधवार के दिन अंग्रेजी पत्रिका एंडीपेंडेंट में एक लेख में लिखा: राईफ बदवी को सऊदी अरब में इंटरनेट पर एक साईट बनाने और उसके माध्यम से आज़ादी की मांग के प्रचार करने के जुर्म में तीन साल से कैद में रखा गया है। लेकिन सऊदी अरब चाहे कुछ भी करे ब्रिटेन इस देश का मुकाबला करने से डरता है। बदवी को दस साल कैद दस लाख सऊदी रियाल बतौर फिरौती और एक हजार कोड़े मारे जाने की सजा दी गई है। एंडीपेंडेंट ने याद दिलाया: ब्रिटेन के विदेशमंत्री ने दावा किया: हमें यह याद रखना चाहिए कि ऐसे अवसरों पर सऊदी अरब की ऐसी कार्यवाहियों को देश की पूरी जनता का समर्थन प्राप्त होता है। (हालांकि यह सफेद झूठ है सऊदी अरब में जनता की राय का कोई मूल्य ही नहीं है)। इस लेख के लेखक ने ब्रिटेन के विदेशमंत्री के बयान की निंदा की और कहा: मैंने विदेश मंत्रालय से यह सवाल पूछा कि उसने यह जवाब कहाँ से दिया है लेकिन अभी तक मुझे कोई जवाब नहीं मिला है। क्या यह बात सच है? क्या सऊदी अरब के लोग अतिवादी और चरमपंथी सरकार के मानने वाले हैं और एक वेबलॉग लिखने वाले को कोड़े लगने से उन्हें खुशी होगी? वेन ने कहा: सऊदी अरब का कोई भी नागरिक चाहे वह राईफ को कोड़े मारे जाने का कड़ा विरोधी भी क्यों न हो वह इसके खिलाफ विरोध की घोषणा की जुर्रत नहीं कर सकता। वेन ने ताकीद की: राईफ बदवी के वकील को पिछले साल जून के महीने में सऊदी अरब की न्यायपालिका की आलोचना करने के जुर्म में 15 साल कैद की सजा सुनाई गई है। इस ब्रिटिश पत्रकार ने कहाः इस वकील पर एक आरोप आम विचारों को भड़काना है अब हमें यह पूछना चाहिए कि अदालत इस नतीजे पर कैसे पहुंची है। शायद विदेशमंत्री ने अपने अनुभव की रौशनी में इस संबंध में उनकी मदद की है। इस आदेश की एक और वजह सरकारी संस्थानों के खिलाफ दुश्मनी पैदा करना है। यह ऐसी स्थिति में है कि जब सऊदी अरब खुद भी पूरी दुनिया को अपना दुश्मन बना सकता है और उसे इस काम के लिए किसी की जरूरत नहीं है। एंडीपेंडेंट ने फ्रांस समाचार एजेंसी के हवाले से ताकीद की है कि वर्ष 2015 की शुरुआत से अब तक सऊदी अरब में एक सौ लोगों को फांसी दी जा चुकी है कि यह संख्या पिछले साल की तुलना में बहुत अधिक है। वेन ने ताकीद की: ऐसा दिखाई देता है कि सऊदी अरब आईएस के मुक़ाबले में खुद को सामने लाने की कोशिश कर रहा है और बताना चाहता है कि इस आतंकवादी गिरोह की तरह वह हर अपराध कर सकता है। वेन ने कहा: क्यों ब्रिटेन के विदेश मंत्री यह नहीं कहते कि आईएस आतंकवादी जो मौत की सजा दे रहे हैं वह इस गिरोह के अक्सर आतंकवादियों की सहमति से दे रहे हैं। हालांकि संभव है एक दिन वह यह भी कहें। ब्रिटेन के इस पत्रकार ने कहा: बहुत बुरा होगा कि ब्रिटेन एक दिन आईएस को आधिकारिक तौर पर स्वीकार करेगा और हम उन्हें हथियार बेचकर पाउंड हासिल करना चाहेंगे, लेकिन उसके बाद इस गिरोह की ओर से गरदनें काटे जाने की निंदा करेंगे। उन्होंने अंत में लिखा है कि यह काम सऊदी अरब के साथ सरकारी तालमेल से अधिक बुरा नहीं है सऊदी अरब केवल एक वहशी शासनप्रणाली है।


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