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کد خبر : 77369
تاریخ انتشار : 21/6/2015 3:5
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शिया मुसलमानों के बढ़ते प्रभाव से बौखलाई अल अज़हर यूनिवर्सिटी

अल-अज़हर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी दुनिया में सुन्नी मुसलमानों की बड़ी तालीमी इदारों में से है जिसने दबे शब्दों में यह एलान किया है कि रमज़ान के पाक महीने में ऐसे कार्यक्रम रखे जाएंगे जिससे मिस्र में सुन्नी मुसलमानों को शिया मत क़बूल करने से रोका जा सके।


विलायत पोर्टलः अल-अज़हर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी दुनिया में सुन्नी मुसलमानों की बड़ी तालीमी इदारों में से है जिसने दबे शब्दों में यह एलान किया है कि रमज़ान के पाक महीने में ऐसे कार्यक्रम रखे जाएंगे जिससे मिस्र में सुन्नी मुसलमानों को शिया मत क़बूल करने से रोका जा सके। अल-आलम नेटवर्क के अनुसार अल-अज़हर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रमुख शैख़ अहमद अल-तैय्यब ने एक कर्यक्रम में दबे शब्दों में यह इशारा किया कि रमज़ान के पवित्र महीने में होने वाले उनके कर्यक्रमों में दिये जाने वाली तक़रीरें इस तरह की होगें जिससे वो लोग जो शिया मत के क़रीब हो रहे हैं, दूर हो जाएं। शैख़ अहमद अल-तैय्यब ने बताया है कि इस साल रमज़ान में वो पैग़म्बरे इस्लाम (स) के साथियों के सिलसिले पर भाषण देंगे और जो मिस्र के सटेलाईट चैनेलों द्वारा प्रसारित भी किया जाएगा। अल-अज़हर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रमुख ने कहा कि इधर कई सालों से हमारे सुन्नी युवा शिया मत की तरफ़ खिचें चले जा रहे हैं, जिसको रोकने के लिए हमारे मज़हबी रहनुमाओं को चाहिए कि इस साल रमज़ान में अपने भाषणों में पैग़ामबरे इस्लाम (स) के साथियों के जीवन पर बोलें। समाचार पत्र रायुल यौम के अनुसार अल-अज़हर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जो लोग पैग़ामबरे इस्लाम (स) के साथियों के कैरेक्टर पर तनक़ीद करते हैं वे लोग अस्ल में सुन्नी नौजवानों के ख़िलाफ़ काम करते हैं। शैख़ अहमद अल-तैय्यब ने कहा है कि मिस्र में कुछ संगठित और बहुपक्षीय संगठन दूसरे मतों की तरफ़ दावत देकर देश के नौजवानों की एकता और अखंडता को तोड़ने के कोशिश में हैं, वो लोग सुन्नी नौजवानों को अपना मत छोड़ कर किसी दूसरे मत स्वीकार करने की तरफ़ दावत देते हैं। अल-अज़हर के प्रमुख ने ये भी कहा कि हमारा अपने नौजवानों के प्रति मज़हबी फ़र्ज़ है कि उन पर होने वाले दूसरे मज़हबों के हमलों को रोकें और उनकी सही राहनुमाई करें। शैख़ अहमद तैय्यब ने कहा कि दूसरे मज़हब के प्रचारक पहले तो पैग़म्बरे इस्लाम के अहलेबैत (घर वालों) से मुहब्बत का सहारा लेकर हमारे जवानो को अपनी तरफ. खैंचते हैं और बाद में उनको हज़रत उमर के ख़िलाफ़ यह कह कर बहका देते हैं कि उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम (स) की बेटी हज़रते फ़ातेमा ज़हरा (स) का घर जलाया था और फिर हमारे युवाओं से यह कह कर के यह लोग हज़रत फ़ातेमा (स) और हज़रत अली (अ.स.) के मुख़ालिफ़ थे उन को ज़लील कराया जाता है।
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तेहरान रेडियो


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