हिंदुस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का दफ़तर
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کد خبر : 77508
تاریخ انتشار : 24/6/2015 6:29
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अमरीका ईरान के परमाणु उद्योग को तबाह करना चाहता हैः सुप्रीम लीडर

सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि अमरीकी, ईरान के परमाणु उद्योग को तबाह करने की कोशिश कर रहे हैं।


विलायत पोर्टलः इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने देश के बड़े अधिकारियों से मुलाक़ात में परमाणु इलाक़े में ईरान की रेड लाइनों को स्पष्ट करते हुए ज़ोर दिया है कि आर्थिक और बैंकिंग के मैदान में ईरान पर लगी पाबन्दियों को समझौते पर हस्ताक्षर के फ़ौरन बाद ख़त्म किया जाना चाहिए। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि अमरीकी, ईरान के परमाणु उद्योग को तबाह करने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम लीडर ने अमरीकियों से बात-चीत की तारीख़ बताते हुए कहा कि अमरीकियों के साथ बात-चीत का दौर पिछली सरकार से संबंधित है और उस वक़्त बात-चीत के लिए अमरीकियों ने एक नुमाइंदा तेहरान भेजा था और हमने खुल कर उससे कहा था कि हमें अमरीकियों पर भरोसा नहीं है लेकिन उस सम्मानीय हस्ती के रिक्वेस्ट पर हमने एक बार फिर आज़माने का फैसला किया और परमाणु बात-चीत शुरू हुई। सुप्रीम लीडर ने कहा कि अमरीकियों ने अपने वादे के ख़िलाफ़ बात-चीत शुरू होने के बाद पाबन्दियों हटाने के समय को छे महीने से बढ़ाकर एक साल कर दिया और फिर बात-चीत को लंबा खींचने लगे यहां तक कि पाबन्दियां बढ़ाने की भी धमकी देने लगे और ईरान के ख़िलाफ़ फ़ौजी अधिकारों तक की बातें करने लगे और अगर अमरीकियों के रवय्ये पर ग़ौर किया जाए तो यह बात साफ़ हो जाती है कि वह ईरान के परमाणु उद्योग को ख़त्म करने की कोशिश में हैं। सुप्रीम लीडर ने कहा कि हम ने शुरू से ही कहा है कि अन्याय पूर्ण पाबन्दियों को ख़त्म होना चाहिए और निश्चित रूप से उसके बदले हम भी कुछ देंगे लेकिन उसके लिए शर्त है कि हमारे परमाणु उद्योग को नुकसान न पहुंचे। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने परमाणु बात-चीत में ईरान की रेड लाइनें बताते हुए हुए कहा कि अमरीकियों की ख़वाहिश के ख़िलाफ़ हम दस- बारह सालों तक परमाणु तकनीक पर पाबन्दियों को क़बूल नहीं करेंगे, आर्थिक बैंकिंग के मैदान में ईरान पर सुरक्षा परिषद या अमरीका की तरफ़ से लगी सारी पाबन्दियां समझौते पर हस्ताक्षर के फ़ौरन बाद ख़त्म होनी चाहिएं और पाबन्दियों को ख़त्म करने के लिए ईरान की तरफ़ से अपने वादों के निभाने और आईएईए की तरफ़ से उसकी पुष्टि की शर्त किसी भी दशा में ईरान को क़बूल नहीं है क्योंकि परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी ने बारम्बार यह साबित किया है कि वह स्वाधीन नहीं है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सुप्रीम लीडर ने कहा कि सही है हम पाबन्दियों के हटाए जाने को पसंद करते हैं लेकिन इसके साथ ही हम पाबन्दियों को एक मौक़ा भी समझते हैं क्योंकि इन्ही पाबन्दियों की वजह से हमारे देश की क्षमताएं और क़ाबलिय्यत पर ज़्यादा ध्यान देने का मौक़ा मिला है। सुप्रीम लीडर के भाषण से पहले राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने भी परमाणु मामले के हल और समाज व देश की आवश्यकताओं की पूर्ति को सरकार की दो ख़ास ज़िम्मेदारियां बताया और कहा कि जो बात बड़ी शक्तियों को बात-चीत की मेज़ पर लेकर आई वह दबावों के मुक़ाबले में ईरानी देश का डटा रहना और पाबन्दियों की नाकामयाबी थी। राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि पाबन्दियां कभी भी सफल नहीं होंगी और ईरानी राष्ट्र पाबन्दियों के दौरान भी अपनी सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक व सांस्कृतिक मुश्किलों के हल तलाश करने में कामयाब है, कहा कि पाबन्दियों के दौरान ही हमने जनता की मदद से मुद्रा स्फ़ीति को कंट्रोल किया और मंदी की हालत से बाहर निकल आए।
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तेहरान रेडियो


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