Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 78282
Date of publication : 8/7/2015 18:22
Hit : 316

रमज़ानुल मुबारक-7

इंसान को बनाने वाले अल्लाह ने उसको जो भी हुक्म दिये हैं वह निश्चित रूप से इंसान के ही हित में होते हैं चाहे देखने में उसमें हमें अपना कोई नुक़सान नज़र आए। रमज़ान के रोज़े संभव है कि कुछ लोगों के लिए कष्ट और तकलीफ़ का कारण हों लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि रोज़े के आध्यात्मिक फ़ायदों के साथ ही साथ इसके शारीरिक फ़ायदे भी बहुत हैं। पैग़म्बरे इस्लाम फ़रमाते हैं- रोज़ा रखो ताकि स्वस्थ रहो।

विलायत पोर्टलः

इंसान को बनाने वाले अल्लाह ने उसको जो भी हुक्म दिये हैं वह निश्चित रूप से इंसान के ही हित में होते हैं चाहे देखने में उसमें हमें अपना कोई नुक़सान नज़र आए। रमज़ान के रोज़े संभव है कि कुछ लोगों के लिए कष्ट और तकलीफ़ का कारण हों लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि रोज़े के आध्यात्मिक फ़ायदों के साथ ही साथ इसके शारीरिक फ़ायदे भी बहुत हैं। पैग़म्बरे इस्लाम फ़रमाते हैं- रोज़ा रखो ताकि स्वस्थ रहो।

अमरीका के एक डाक्टर एलेक्सिस कार्ल, रोगों के इलाज में रोज़े के महत्व पर बल देते हुए कहते हैं- हर रोगी को कुछ दिनों तक खाने से बचना चाहिए क्योंकि जब तक खाने जिस्म में पहुंचता रहेगा, जर्म विकसित होते रहेंगे लेकिन जब खाना-पीना बंद कर दिया जाता है तो जर्म कमज़ोर पड़ जाते हैं। इसलिए इस्लाम में जो रोज़ा वाजिब किया है वह वास्तव में इंसान के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है। "एक नामालूम वुजूद" नामक अपनी किताब में डाक्टर एलेक्सिस कार्ल, लिखते हैं कि रोज़ा रखने से ख़ून की ग्लोकोज़ लीवर में जाती है और खाल के नीचे इकट्ठा होने वाली चर्बी मांसपेशियों तथा अन्य स्थानों पर इकट्ठा प्रोटीन जिस्म के इस्तेमाल में आ जाती है। वह आगे लिखते हैं कि रोज़ा रखने पर सभी धर्मों में बल दिया गया है। रोज़े में शुरू में भूख और कभी नर्व सिस्टम में उत्तेजना और फिर कमज़ोरी का एहसास होता है लेकिन इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण और छिपी हुई दशा जिस्म के अंदर व्याप्त हो जाती है जिसके दौरान जिस्म के सभी अंग जिस्म के अंदर और दिल के संतुलन को बनाए रखने के लिए अपने उन ख़ास पदार्थों की आहूति पेश करते हैं जिनका उन्होंने स्टोर कर रखा होता है। इस तरह रोज़ा रखने से जिस्म के सभी नसों की धुलाई हो जाती है और उनमें ताज़गी आ जाती है।
इस्लाम में रोज़े के महत्व का इसी बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि एक बार पैग़म्बरे इस्लाम (स) के एक साथी ने आपसे कहा,ऐ अल्लाह के पैग़म्बर मुझको कोई अच्छा काम बताएं। इस पर पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा, रोज़ा रखो क्योंकि रोज़े जैसा कोई काम नहीं है और उसके सवाब का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। उस इंसान ने फिर यही सवाल किया। पैग़म्बरे इस्लाम ने जवाब दिया रोज़ा रखो क्योंकि रोज़े जैसा कोई काम नहीं है। उस इंसान ने तीसरी बार फिर पैग़म्बरे इस्लाम (स) से वहीं सवाल किया। तीसरी बार भी आपने कहा, रोज़ा रखो क्योंकि रोज़े से बड़ा कोई काम नहीं है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) के इस कथन के बाद इमामा नामक इस इंसान और उसकी पत्नी ने अपने पूरे ज़िंदगी रोज़े रखे।


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :

नवीनतम लेख

ईरानी हैकर्स ने अमेरिकी अधिकारियों के ईमेल हैक किए ! ईरान, रूस और चीन से युद्ध के लिए तैयार रहे ब्रिटेन : जनरल कार्टर हमास की ज़ायोनी अतिक्रमणकारियों को चेतावनी, हमारे देश से से निकल जाओ । पाकिस्तान में इतिहास का सबसे बड़ा निवेश करने वाला है सऊदी अरब नेतन्याहू की धमकी, अस्तित्व की जंग लड़ रहा इस्राईल अपनी रक्षा के लिए कुछ भी करेगा । वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का आरोप, उनकी हत्या की योजना बना रहा है अमेरिका । सऊदी अरब सहयोगी , लेकिन मोहम्मद बिन सलमान की लगाम कसना ज़रूरी : अमेरिकन सीनेटर्स झूट की फ़ैक्ट्री, वॉइस ऑफ अमेरिका की उर्दू और पश्तो सर्विस पर पाकिस्तान ने लगाई पाबंदी ईरान के नाम पर सीरिया को हमलों का निशाना बनाने की आज्ञा नहीं देंगे : रूस अमेरिकी हथियार भंडार के साथ बू कमाल में सामूहिक क़ब्र से 900 शव बरामद । विख्यात यहूदी अभिनेत्री नताली पोर्टमैन ने की अमेरिका यमन युद्ध के नाम पर सऊदी अरब से वसूली को तैयार सऊदी अरब का युवराज मोहम्मद बिन सलमान है जमाल ख़ाशुक़जी का हत्यारा : निक्की हैली अमेरिका में पढ़ने वाले ईरानी अधिकारियों के बच्चों को निकालेगा वाशिंगटन दमिश्क़ का ऐलान,अपना उपग्रह लांच करने के लिए तैयार है सीरिया ।