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Date of publication : 9/7/2015 15:49
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हज़रत अली की शहादत की सालगिराह पर दुनिया भर में शोक।

ईरान समेत दुनिया भर में शिया मुसलमानों के पहले इमाम और दुनिया में न्याय और वीरता के प्रतीक हज़रत अली (अ) की शहादत का सोग मनाया जा रहा है।


विलायत पोर्टलः ईरान समेत दुनिया भर में शिया मुसलमानों के पहले इमाम और दुनिया में न्याय और वीरता के प्रतीक हज़रत अली (अ) की शहादत का सोग मनाया जा रहा है। हज़रत अली (अ) लगभग 14 सदियो पहले रमज़ान मुबारक की 21वीं तारीख़ को शहीद हो गए थे। 19 रमज़ान को इब्ने मुलजिम ने ज़हर में बुझी हुई तलवार से उस समय हज़रत अली पर हमला किया जब वे कूफ़े की मस्जिद में सुबह की नमाज़ के दौरान सजदे में थे। इस हमले में हज़रत अली (अ) के सिर पर गहरा ज़ख़्म पड़ गया, जिसकी वजह से दो दिन बाद यानी 21 रमज़ान को उनकी शहादत हो गई। पैग़म्बरे इस्लाम (स) के जानशीन हज़रत अली (अ) को उनके हिम्मत, इल्म, मशहूर अदालत और पैग़म्बरे इस्लाम से हद दरजा एहतेराम के लिए जाना जाता है। 21 रमज़ान की रात उन पाकीज़ा रातों में से है जिन्हें शबे क़द्र कहा जाता है और मुसलमान रात भर जागकर इबादत करते हैं। हर साल भारत समेत दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान 21 रमज़ान की रात जाग कर अल्लाह की इबादत के साथ साथ हज़रत अली (अ) की शहादत का ग़म मनाते हैं और अज़ादारी करते हैं। 21 रमज़ान बराबर 8 जुलाई को ईरान में राष्ट्रीय छुटटी है।
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 तेहरान रेडियो


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