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Date of publication : 11/7/2015 1:57
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जुमे की नमाज़ के लिए इस्राईल ने लगाई थीं शर्तें

इस्राईल ने पवित्र रमज़ान के अन्तिम जुमे की नमाज़ पढ़ने वालों के लिए कुछ शर्तें लगाई थीं।


विलायत पोर्टलः इस्राईल ने पवित्र रमज़ान के अन्तिम जुमे की नमाज़ पढ़ने वालों के लिए कुछ शर्तें लगाई थीं। ज़ायोनी शासन के अधिकारियों ने मुसलमानों के पहले क़िब्ले मस्जिदुल अक़सा में जुमे की नमाज़ पढ़न वालों के लिए कुछ शर्तों का एलान किया है। इसमें पहली शर्त यह है कि 16 साल से लेकर 30साल के लोग मस्जिदुल अक़सा में जुमे की नमाज़, पढ़ ही नहीं सकते। दूसरी शर्त यह है कि 30 साल से 50 साल की उम्र के लोग भी आज्ञापत्र होने की स्थिति में ही मस्जिदुल अक़सा में दाख़िल हो सकते हैं वरना उन्हें मस्जिद में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं होगी। मालूल रहे कि पवित्र रमज़ान के आख़िरी शुक्रवार के दिन ज़ायोनी शासन ने मस्जिदुल अक़सा को एक छावनी में बदल कर दिया है। शुक्रवार के दिन पूरे बैतुल मुक़द्दस नगर ख़ासकर मस्जिदुल अक़सा की कड़ी सुरक्षा कर दी गई है। मस्जिद के चारों और भारी संख्या में इस्राईल सैनिक तैनात हैं। इस्राईली सैनिक गुरूवार की रात से ही नमाज़ियों को मस्जिदुल अक़सा में जाने से रोक रहे हैं। पिछले तीन जुमों में लाखों की संख्या में फ़िलिस्तीनी नमाज़ी मस्जिदुल अक़सा पहुंचे थे। अधिक संख्या के भय से इस्राईली सैनिक फ़िलिस्तीनी नमाज़ियों को मस्जिदुल अक़सा में जाने से रोक रहे थे।
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तेहरान रेडियो


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