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کد خبر : 80838
تاریخ انتشار : 16/8/2015 18:33
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मदीने की मस्जिदें बिदअत हैं इन्हें गिरा देना चाहिएः सालेह अलफ़ौज़ान

सऊदी अरब के धर्मगुरुओं व चरमपंथी वहाबियों की परिषद की ओर से पवित्र नगर मदीने में स्थित 7 मस्जिदों को ध्वस्त करने की मांग की गई है।


विलायत पोर्टलः सऊदी अरब के धर्मगुरुओं व चरमपंथी वहाबियों की परिषद की ओर से पवित्र नगर मदीने में स्थित 7 मस्जिदों को ध्वस्त करने की मांग की गई है। सालेह अलफ़ौज़ान ने शनिवार को दावा किया है कि मदीने की सात ऐतिहासिक मस्जिदें, बिदअत हैं और इन्हें ध्वस्त होना चाहिए। ज्ञात रहे बिदअत का अर्थ होता है धर्म की मूल शिक्षाओं से बाहर की चीज़ का धर्म में शामिल करना। पवित्र नगर मदीने की इन 7 मस्जिदों का इतिहास, ख़न्दक़ नामक ऐतिहासिक युद्ध से जुड़ा है। यह, मस्जिदुन्नबी के पश्चिम में स्थित सलअ पहाड़ के आंचल में स्थित हैं। दुनिया के अनेक देशों के श्रद्धालु मुसलमान, पवित्र नगर मदीना में दाख़िल होने के बाद इन मस्जिदों का दर्शन करने जाते हैं। ज्ञात रहे सऊदी अरब में वहाबी उपदेशकों के फ़त्वों के कारण अबतक बहुत से इस्लामी व ऐतिहासिक अवशेषों को ध्वस्त किया जा चुका है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) की सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा और उनके नवासे इमाम हसन, परपौत्र इमाम ज़ैनुल आबेदीन, इमाम मोहम्मद बाक़िर और इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के रौज़ों को सऊदी शासन ने 21 अप्रैल सन 1926 में ध्वस्त करवा दिया था। अपने अतिरिक्त अन्य मुसलमानों को काफ़िर कहना तथा मक़बरों, रौज़ों और मस्जिदों को ध्वस्त करने जैसे कार्य, वहाबी सलफ़ी मत की मुख्य पहचान बन चुके हैं।
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तेहरान रेडियो


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