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Date of publication : 6/12/2015 18:15
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आतंकवाद का अंत:

क्या आईएस के नाम का भूत ग़ाएब होने वाला है?

आतंकवाद कि जिसे सऊदी अरब और उसके घटकों के प्रयासों के परिणाम स्वरूप आज इस्लाम के साथ जोड़ दिया गया है उसका इतिहास बहुत पुराना है और जब से इंसान है तब से आतंकवाद का वुजूद भी पाया जाता है।



विलायत पोर्टलः आतंकवाद कि जिसे सऊदी अरब और उसके घटकों के प्रयासों के परिणाम स्वरूप आज इस्लाम के साथ जोड़ दिया गया है उसका इतिहास बहुत पुराना है और जब से इंसान है तब से आतंकवाद का वुजूद भी पाया जाता है। समाज में डर और भय पैदा करके अपने प्रतिद्वंद्वी को रास्ते से हटाना, इटली के माफ़ियाई मुहल्लों में हर दिन का काम था, फ्रांस और रूस की क्रांतियों के दौरान कुछ गुट खुफिया तौर पर और कुछ गुट खुल्लम खुल्ला आतंकवादी गतिविधियों अंजाम देते थे। दुनिया में कोई देश ऐसा नहीं है कि जिसने आतंकवाद और इससे प्रभावित होने का अनुभव न किया हो। इसलिए आतंकवाद नाम के मौजूद तो एक तरीके के रूप में चुना गया है कि जिसे कट्टरपंथी राजनीतिक गुट कानून तोड़ने वाली पार्टियां और हत्या व नरसंहार का बाजार गर्म करने वाली सरकारें इस्तेमाल करती थीं या आज भी कर रही हैं। एक ऐसा दौर आया कि आतंकवाद ने क्षेत्रीय भूगोल की सीमाओं से बाहर निकलकर अंतर-राष्ट्रीय आतंकवाद के भूगोल की सीमाओं में कदम रखा और वैश्विक आतंकवादी गुट वुजूद में आए। अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियों को किसी सरकार या संगठन या सैन्य और जासूसी एजेंसी या सरकार के समर्थन और सपोर्ट की जरूरत होती है। उदाहरण स्वरूप वह देश जिनके हित एक दूसरे से टकराते हैं एक दूसरे के मुक़ाबले में अपने लक्ष्यों को कम खर्च पर हासिल करने की खातिर, आतंकवादी समूहों या आतंकवादी नौकरों से काम लेते हैं। इस तरीक़े को अमल में लाने से हर कार्यवाही की ज़िम्मेदारी आतंकवादी गुटों पर होती है लेकिन कुल मिलाकर इससे, आतंकी गुटों का समर्थन करने वाले देशों का उद्देश्य पूरा होता है। जायोनी हुकूमत दुनिया में एक ऐसी सरकार है जिसने बहुत ज्यादा इस तरीक़े को अपनाया है।


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