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Date of publication : 9/12/2015 17:8
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संयुक्त राष्ट्र में रूसी प्रतिनिधि द्वारा तुर्की की कड़ी आलोचना।

विटाली चोरकीन ने कहा कि रूस का मानना है कि इराकी सरकार की अनुमति के बिना इराक़ के अंदर तुर्की सैनिकों की तैनाती अवैध है। उन्होंने तुर्की के इस दावे को खारिज कर दिया कि उसने आईएस के मुक़ाबले के लिए अपने सैनिक इराक़ भेजे हैं



विलायत पोर्टलः संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि विटाली चोरकीन ने इराक़ में तुर्की सैनिकों की उपस्थिति को गैरकानूनी और अवैध बताते हुए कहा कि इस कार्यवाही पर तुर्की कोई बहाना नहीं बना सकता है। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार रूस के राजदूत ने बंद दरवाजों के पीछे होने वाली सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने तुर्की सेना के इराक़ में प्रवेश के मामले को बैठक में उठाया है। विटाली चोरकीन ने कहा कि रूस का मानना है कि इराकी सरकार की अनुमति के बिना इराक़ के अंदर तुर्की सैनिकों की तैनाती अवैध है। उन्होंने तुर्की के इस दावे को खारिज कर दिया कि उसने आईएस के मुक़ाबले के लिए अपने सैनिक इराक़ भेजे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में रूसी प्रतिनिधि ने कहा कि यदि ऐसा है तो तुर्की ने इराकी सरकार से उसकी पूर्व अनुमति क्यों नहीं ली। तुर्की ने चार दिसंबर को अपने एक सौ पचास के करीब सैनिकों को बीस से पच्चीस टैंकों और अन्य भारी हथियारों के साथ उत्तरी इराक के नैनवा प्रांत के मूसेल शहर रवाना किया था। तुर्क सैनिक मूसेल के उपनगरीय बशीका में तैनात हैं। अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि तुर्क राष्ट्रपति रजब तय्यब ओर्दोगान की हरकतों से ऐसा लगता है कि वह क्षेत्र के संकट में नॉटो को खींचने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया के अनुसार तुर्क राष्ट्रपति नॉटो को भ्रमित कर क्षेत्र के मुस्लिम देशों के लिए कई तरह के संकट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इराक और सीरिया के संकट में भी तुर्की की भूमिका किसी से छिपी नहीं है।


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