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Date of publication : 30/12/2015 18:24
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आज इस्लाम की बारी है, मुसलमान नवीन इस्लामी सभ्यता की स्थापना करें।

पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्ल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम और आपके बेटे हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की जयंती 17 रबीउल अव्वल के अवसर पर ईरान के पदाधिकारियों, तेहरान में नियुक्त इस्लामी देशों के राजदूत और इस्लामी एकता कॉन्फ़्रेंस में हिस्सा लेने के लिए तेहरान आने वाले मेहमानों तथा विभिन्न क्षेत्रों से सम्बंध रखने वाले लोगों ने मंगलवार की सुबह इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई से मुलाकात की।
विलायत पोर्टलः पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्ल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम और आपके बेटे हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की जयंती 17 रबीउल अव्वल के अवसर पर ईरान के पदाधिकारियों, तेहरान में नियुक्त इस्लामी देशों के राजदूत और इस्लामी एकता कॉन्फ़्रेंस में हिस्सा लेने के लिए तेहरान आने वाले मेहमानों तथा विभिन्न क्षेत्रों से सम्बंध रखने वाले लोगों ने मंगलवार की सुबह इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई से मुलाकात की।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने दुश्मन की इस्लामी देशों को तबाह करने की कोशिश का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुश्मन मुसलमानों के बीच लड़ाई भड़काना चाहता है। 
आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने तेहरान में इस्लामी एकता सम्मेलन में भाग लेने वालों, वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों और मुसलमान देशों के राजदूतों को, पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम के शुभ जन्म दिवस पर मंगलवार को संबोधित करते हुए कहा, “आज दुश्मन का लक्ष्य मुसलमानों के बीच आपस में लड़ाई भड़काना है। दुर्भाग्यवश वह इस लक्ष्य को किसी हद तक साध सका है। वे एक के बाद एक इस्लामी देश को तबाह कर रहे हैं। वे सीरिया, यमन और लीबिया को तबाह कर रहे हैं।”
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने प्रश्न भरे अंदाज़ में कहा कि हम क्यों इन षड्यंत्रों के सामने झुक जाएं और उनका लक्ष्य न समझ पाएं? हमें समझदारी और प्रतिरोध से काम लेना चाहिए।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा कि हमें इस्लामी जगत के धर्मगुरुओं और उन सच्चे बुद्धिजीवियों से उम्मीद है जो पश्चिम को अपना आदर्श नहीं समझते।
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने, दुश्मन के षड्यंत्र पर मुसलमान देशों की ख़ामोशी की आलोचना की। उन्होंने नाइजीरिया में शीयों के जनसंहार और इस देश के इस्लामी आंदोलन के महासचिव शैख़ ज़कज़की की गिरफ़्तारी की घटना के संदर्भ में प्रश्न भरे अंदाज़ में कहा, “नाइजीरिया में इतनी बड़ी त्रासदी इतनी ख़ामोशी से कैसे घटी?”
शैख़ ज़क़ज़की के पास मौजूद लगभग एक हज़ार लोगों का जनसंहार किया। उनके 6 बेटों को 2 साल के अंदर शहीद कर दिया गया। इन घटनाओं के संबंध में इस्लामी जगत क्यों ख़ामोश है? क्यों इस्लासमी जगत लगभग एक साल से यमन पर दिन-रात हो रही बमबारी को सहन कर रहा है?
इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर ने कहा कि जबसे अमरीकी साहित्य में शीया-सुन्नी शब्द आया उस वक़्त से सभी बुद्धिजीवी चिंतित हैं। उन्होंने शीया-सुन्नी के बीच फूट डालने में ब्रिटेन के इतिहास की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज अमरीकी ज़्यादा ख़तरनाक हैं। वे अस्ल इस्लाम के विरुद्ध हैं। वे इस्लाम की ओर बढ़ते रुझान के दुश्मन हैं।



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