हिंदुस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का दफ़तर
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کد خبر : 96912
تاریخ انتشار : 27/3/2016 18:19
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यमन में सऊदी अरब का मुंह काला हो गया।

यमन पर एक साल से लगातार हमले करने के बाद भी सऊदी अरब अपना एक भी मक़सद पूरा नहीं कर सका है।यमन के ख़िलाफ़ छेड़ी गई सऊदी अरब की लड़ाई की अगर उपलब्धि खोजी जाए तो एक भी उपलब्धि खोज पाना बहुत मुश्किल है।सऊदी अरब का सबसे बड़ा मक़सद अब्दुर्रब्बोह मंसूर हादी को सत्ता में वापस लाना था जबकि वह सत्ता में वापस लाना तो दूर की बात है यमन वापस नहीं जा पा रहे हैं।


विलायत पोर्टलः यमन में सेना और स्वयंसेवी बलों ने सऊदी अरब के किराए के सैनिकों पर मिसाइल हमले कर दिए जिनमें कई सैनिक मारे गए। यह हमले मारिब और तइज़्ज़ प्रांतों में किए गए। मारिब के कूफ़ल और जदआन नाम के इलाक़ो में सऊदी अरब के किराए के सैनिक आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे कि यमनी सेना और स्वयंसेवी बलों ने उन पर हमला कर दिया। इसी तरह तइज़्ज़ प्रांत के ज़बाब इलाक़े में भी मिसाइल हमला किया गया। इसी बीच समाचार पत्र गार्डियन ने एक रिपोर्ट में लिखा है कि यमन पर एक साल से लगातार हमले करने के बाद भी सऊदी अरब अपना एक भी मक़सद पूरा नहीं कर सका है। गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यमन के ख़िलाफ़ छेड़ी गई सऊदी अरब की लड़ाई की अगर उपलब्धि खोजी जाए तो एक भी उपलब्धि खोज पाना बहुत मुश्किल है। समाचार पत्र ने लिखा है कि सऊदी अरब का सबसे बड़ा मक़सद अब्दुर्रब्बोह मंसूर हादी को सत्ता में वापस लाना था जबकि वह सत्ता में वापस लाना तो दूर की बात है यमन वापस नहीं जा पा रहे हैं। मंसूर हादी यमन के अदन इलाक़े में गए थे लेकिन आतंकी हमलों के डर से उन्हें वहां से भागना पड़ा और इस समय वह सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में हैं। सऊदी अरब और उसके गठबंधन का यह भी मक़सद था कि यमन में ईरान के प्रभाव को समाप्त कर दिया जाए लेकिन साफ़ है कि यह मक़सद भी पूरा नहीं हुआ है। तीसरा मक़सद आतंकवाद का सफ़ाया करना बताया गया था मगर सऊदी अरब को इसमें भी कोई कामयाबी नहीं मिली है। समाचारपत्र के अनुसार यमन इस समय सूखे की चपेट में है जबकि सऊदी अरब ने बमबारी करके इस देश के स्कूलों, अस्पतालों, खेल के मैदानों, बाज़ारों सब को तबाह कर दिया है। उधर सऊदी अरब ने यमन के लिए मदद एकत्रित करने की कोशिश की लेकिन संस्था को इसमें कोई ख़ास कामयाबी नहीं मिली है। समाचार पत्र के अनुसार सऊदी अरब ने अब यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन से बातचीत शुरू की लेकिन रियाज़ सरकार ने बातचीत का फ़ैसला तब किया जब उसे यक़ीन हो गया कि यमन जंग से सऊदी अरब की हालत लगातार ख़राब होती जा रही है और उसे इस लड़ाई में कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है।
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तेहरान रेडियो


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