हिंदुस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का दफ़तर
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کد خبر : 98106
تاریخ انتشار : 17/4/2016 17:24
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नेतनयाहू ने कहा मस्जिदुल अक़सा तुम्हारी नहीं हमारी है।

नेतनयाहू ने अन्तर्राष्ट्रीय संस्था यूनेस्को के उस प्रस्ताव की कड़ी निंदा की है जिसमें कहा गया है कि मस्जिदुल अक़सा सिर्फ़ मुसलमानों की इबादतगाह है।


विलायत पोर्टलः नेतनयाहू ने अन्तर्राष्ट्रीय संस्था यूनेस्को के उस प्रस्ताव की कड़ी निंदा की है जिसमें कहा गया है कि मस्जिदुल अक़सा सिर्फ़ मुसलमानों की इबादतगाह है। उन्होंने कहा कि यूनेस्कों ने यह बेवक़ूफ़ी का प्रस्ताव पारित किया है जिसमें मस्जिदुल अक़सा को मुसलमानों का उपासना स्थल बताया गया है। इसमें इसी तरह धार्मिक स्थलों तक मुसलमानों की पहुंच को सीमित करने और ग़ज़्ज़ा के परिवेष्टन की कड़ी शब्दों में निंदा की गई है। यूनेस्को के इस प्रस्ताव को इस्राईल को अतिग्रहणकारी शक्ति बताया गया है। यूनेस्को के इस प्रस्ताव में इल्ज़ाम लगाया गया है कि ज़ायोनी शासन, इलाक़ों में मुसलमानों की निशानियों को तोड़ रहा है। प्रस्ताव के अनुसार ज़ायोनी शासन के हाथों ग़ज़्ज़ा के परिवेष्टन की वजह ग़ज़्ज़ा वासियों के लिए मानवता प्रेमी सहायता भेजने में नाना प्रकार की समस्याएं आ रही हैं। उल्लेखनीय है कि फ़िलिस्तीनियों की तरफ़ से ज़ायोनी शासन के कंट्रोल वाले इलाक़े के यहूदीकरण की बात बहुत समय से कही जा रही है।
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तेहरान रेडियो


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