हिंदुस्तान में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का दफ़तर
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کد خبر : 98886
تاریخ انتشار : 28/4/2016 18:31
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इस्लामी रिवाल्यूशन का मक़सद इस्लामी तहज़ीब को व्यवहारिक बनाना है।

ईरान की इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि इस्लामी रिवाल्यूशन का उद्देश्य इस्लामी सभ्यता को व्यवहारिक बनाना है।


विलायत पोर्टलः ईरान की इस्लामी रिवाल्यूशन के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि इस्लामी रिवाल्यूशन का उद्देश्य इस्लामी सभ्यता को व्यवहारिक बनाना है। सोमवार को इस्लामी-ईरानी आदर्श केन्द्र के सर्वोच्च परिषद के सदस्यों ने सुप्रीम लीडर से मुलाक़ात की। सुप्रीम लीडर ने इस मुलाक़ात में इस्लामी रिवाल्यूशन के उद्देश्यों को पांच चरणों में विभाजित किया और इस्लामी सभ्यता को व्यवहारिक होने को रिवाल्यूशन का पांचवां व आख़िरी उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि इस्लामी सभ्यता का मतलब सीमाओं का विस्तार नहीं बल्कि राष्ट्रों का इस्लाम से वैचारिक रूप से प्रभावित होना है। उन्होंने दुनियां में प्रचलित विकास के ग़लत और अनुपयोगी आधारों की तरफ़ इशारा करते हुए नये इस्लामी व ईरानी आदर्शों को पेश किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जिनमें क्रांतिकारी कार्य हों और इसमें धार्मिक शिक्षा केन्द्रों तथा इस्लाम की मज़बूत व समृद्ध संभावाओं से फ़ायदा उठाया जाए। आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इसी तरह दुनिया में मौजूद आदर्शों के बारे में कहा कि विकास के लिए प्रचलित आदर्श, आधारों की दृष्टि से ग़लत और ग़ैर ईश्वरीय सिद्धांतों पर आधारित हैं। ईरान की इस्लामी व्यवस्था ने दुनिया में विकास का नया आदर्श पेश किया है। स्वर्गीय इमाम खुमैनी ने पूर्व सोवियत संघ के नेता मीख़ाइल गर्बाचोफ़ के नाम अपने ख़त में लिखा था कि हम आपका गम्भीर रूप से इस्लाम को समझने का आह्वान करते हैं यह इस वजह से नहीं कि इस्लाम और मुसलमान को आपकी ज़रूरत है बल्कि दुनिया व्यापी इस्लामी मूल्यों की वजह से जो समस्त राष्ट्रों को आज़ादी प्रदान कर सकता है। ईरान की इस्लामी रिवाल्यूशन को कामयाब हुए लगभग 37 साल का समय बीत जाने के बावजूद इस्लामी-ईरानी विकास मॉडल के संबंध में अभी बहुत कुछ चर्चा की ज़रूरत है और इस्लामी- ईरानी विकास आदर्श केन्द्र के गठन की एक वजह से भी यही ज़रूरी है।
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तेहरान रेडियो


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