बीवी क्या करे कि घर जन्नत की मिसाल हो

माफ़ कीजिए आगे ध्यान रहेगा, या माफ़ कर दीजिए फिर कभी शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगी.... अल्लाह का ख़ौफ़ दिल में रखने वाली समझदार बीवी जब इस जुमले को कहेगी तो यक़ीन जानिए कि शैतान के लिए घर में झगड़ा करवाने का कोई हथियार बाक़ी नहीं बचेगा।

11/14/2018 8:20:00 AM

अज़ादारी और इंतेज़ार का आपसी रिश्ता

अज़ादारी और इंतेज़ार शीयत के दो ऐसे पर हैं जिनसे शीयत कामयाबी और सआदत की ऊंची उड़ान उड़ सकती है, इसलिए कि कामयाबी के यही दो राज़ हैं, क्योंकि अगर ज़ुल्म और अत्याचार करने वालों से इंतेक़ाम लेने वाले के पास हौसला और जज़्बा न हो तो वह कभी इंतेक़ाम नहीं ले सकता और वह मायूस हो जाएगा, इंतेज़ार इसी जज़्बे को बाक़ी रखता है। शीयत के दो परचम हैं, एक ज़ुल्म से इंतेक़ाम और शहादत की तलब का परचम, दूसरा इंतेज़ार का, और यहा दोनों कामयाबी और पूरे विश्व में क्रांति ला सकते हैं,

11/12/2018 7:01:03 PM

क़यामत क्यों ज़रूरी है

क्या यह इंसान यह सोंचता है कि हम उसकी हड्डियों को दोबारा जोड़ नहीं सकेंगे? बेशक हम इस बात में सक्षम हैं कि उसकी उंगलियों के पोर तक बना सकें, लेकिन इंसान यह चाहता है कि अपने सामने बुराई करता चला जाए।

11/11/2018 8:16:00 AM

अकेला सरदार

इमाम हसन अ.स. ने माविया की चालबाज़ी और साज़िशों को देखा तो उसे कई ख़त लिख कर उसे इताअत करने और साज़िशों से दूर रहने को कहा और मुसलमानों के ख़ून बहाने से रोका, लेकिन माविया इमाम अ.स. के हर ख़त के जवाब में केवल यही बात लिखता कि वह हुकूमत के मामलात में इमाम अ.स. से ज़्यादा समझदार और तजुर्बेकार है और उम्र में भी बड़ा है।

11/6/2018 8:08:00 AM

पैग़म्बर स.अ. की ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में क्या हुआ...

मेरे भाई और मेरे सबसे क़रीबी को बुलाओ, उन्होंने अबू बक्र को बुला दिया वह जब आए तो पैग़म्बर स.अ. ने फिर कहा मेरे भाई और मेरे सबसे क़रीबी को बुलाओ, उन्होंने इस बार उमर को बुला दिया उन्हें देख कर फिर पैग़म्बर स.अ. ने अपनी बात दोहराई, तभी वहां मौजूद उम्मे सलमा ने कहा कि अली अ.स. को बुला रहे हैं, आख़िरकार इमाम अली अ.स. को बुलाया गया इमाम अली अ.स. तशरीफ़ लाए उसके बाद पैग़म्बर स.अ. और इमाम अली अ.स. ने कुछ देर एक दूसरे के कान में कुछ बातें कीं, जब इमाम अली अ.स. से इस बारे में पूछा गया तो आपने कहा मुझे इल्म के हज़ार दरवाज़े तालीम दिए हैं और इनमें से हर दरवाज़े से हज़ार दरवाज़े खुल गए, और मुझसे कुछ बातें कहीं हैं जिनपर मैं अमल करूंगा।

11/6/2018 7:48:00 AM

अरबईने हुसैनी में इमाम महदी अ.स. की हुकूमत की झलक

शाम होते ही सड़कों पर बेहतरीन लक्ज़री गाड़ियां लिए कुछ लोग दिखाई देंगे जो ज़ायरीन से मंज़िल या मबीत कहते हुए मिलेंगे जिसका मतलब यह होता है कि हमारा घर आपके आराम के लिए हाज़िर है, और यह लोग विनम्रता पूर्वक निवेदन और बड़ी मिन्नतें करते हुए ज़ायरीन को अपने घर ले जाते हैं और जिसकी जितनी हैसियत होती है उससे बढ़ कर वह इमाम हुसैन अ.स. के ज़ायरीन की मेहमान नवाज़ी करता है और सुबह होते ही जहां रात को गाड़ी से बिठा कर लाए थे वहीं ला कर यह कह कर पहुंचा आते हैं कि हम आपकी ख़िदमत नहीं कर सके हमें माफ़ कर दीजिएगा।

11/5/2018 7:43:00 AM

इत्तेहाद क़ायम करने के सिलसिले में पैग़म्बर स.अ. की सीरत

सलाम हो पैग़म्बर स.अ. पर, सलाम हो उस पर जिसका हर हर क़दम बंदों को सेराते मुस्तक़ीम की तरफ़ ले जा रहा था, सलाम हो उस पर जिसके अख़लाक़ ने दुनिया वालों को अपनी रहमत के साए में जगह दी, सलाम हो उस पर जिसके बात करने के अंदाज़ ने कठोर से कठोर दिल वालों को झुकने पर मजबूर कर दिया, सलाम हो उस पर जिसकी इताअत इंसान को आसमानों से भी ऊंचा बना देती हैसलाम हो उस पर जिसकी अदालत ने अरब और अजम, काले और गोरे, फ़क़ीर और मालदार, ग़ुलाम और आज़ाद सभी को एक निगाह से देखा, सलाम हो अल्लाह के उस आख़िरी नबी पर जिसने इंसानों को इंसान बन कर जीने का सलीक़ा सिखाया।

11/5/2018 7:27:00 AM

पैग़म्बर स.अ. की क़ुर्बानी ग़ैर मुस्लिमों की ज़ुबानी

जिस दौर में इंसानियत दम तोड़ रही थी और अख़लाक़ी वैल्यूज़ नाम की कोई चीज़ नहीं थी, आपने न केवल इंसानियत और अख़लाक़ की तालीम दी बल्कि लोगों के दिलों को ऐसा पाक किया उनका ऐसा तज़किया किया कि वह जाहिल बद्दू अरब आपको एक सच्चा और ईमानदार इंसान समझने लगे थे, दिन गुज़रते गए आप ने इंसानियत की ख़िदमत में अपनी हर कोशिश अंजाम दी, वह लोग जो छोटी छोटी बातों के लिए सालों एक दूसरे की जान के दुश्मन रहते थे उनके बीच भी एक दूसरे के लिए मोहब्बत जाग चुकी थी और अब वह भी एक दूसरे का सम्मान करना सीख रहे थे।

11/3/2018 8:34:00 PM

रिश्वत यानी समाज की बर्बादी

क़ुर्आन की आयत और अहलेबैत अ.स. की हदीसों के बाद इस बात को भी क्लियर करना ज़रूरी है कि तोहफ़ा, गिफ़्ट और रिश्वत के बीच फ़र्क़ को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए, और इन दोनों में फ़र्क़ यह है कि जब इंसान किसी को कुछ माल या कोई चीज़ देता है उसका मक़सद मोहब्बत और दोस्ती को ज़ाहिर करना होता है उसकी मोहब्बत और दोस्ती के अलावा उसके दिल और दिमाग़ में कोई दूसरी चीज़ नहीं होती तो ज़ाहिर है इसे तोहफ़ा और गिफ़्ट कहा जाता है और यह केवल जाएज़ ही नहीं बल्कि मुस्तहब है,

11/3/2018 8:13:00 AM

इमाम हुसैन अ.स. का इंक़ेलाब और नेल्सन मंडेला

नेल्सन मंडेला ने अपनी कामयाबी का श्रेय इमाम हुसैन अ.स. और कर्बला को देते हुए लिखा कि जब मुझे जेल में पूरे 20 साल गुज़र गए तो एक रात मैंने फ़ैसला कर लिया था कि कल सुबह हुकूमत की सारी शर्तों को मान कर ख़ुद को उनके हवाले कर दूंगा, लेकिन अचानक उसी रात मुझे कर्बला की दास्तान और इमाम हुसैन अ.स. की याद ने हिम्मत और हौसला दिया कि जब कर्बला में इतने सख़्त हालात और इतनी कठिन परिस्तिथियों में इमाम हुसैन अ.स. ने ज़ुल्म के आगे घुटने नहीं टेके और यज़ीद की बैअत नहीं की तो मैं नेल्सन मंडेला क्यों ज़ुल्म के आगे झुक जाऊं.......

10/31/2018 8:08:00 PM

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