हिंदुस्तान
Thursday - 2018 Oct 18
Languages

नमाज़ की अज़मत

अल्लाह ने नमाज़ के तीन समय तय कर के हर ईमानी हरारत का इम्तेहान कर लिया, सुबह की नमाज़ आराम और ईमान का मुक़ाबला है और उस समय यह अंदाज़ा हो जाता है कि इंसान के लिए आराम ज़्यादा अहमियत रखता है या ईमान और अक़ीदाl

8/26/2018 5:27:28 PM

यौमे अरफ़ा

यौमे अरफ़ा इमाम सज्जाद अ.स. ने एक शख़्स को किसी के सामने हाथ फैलाते देखा, आपने उससे कहा वाय हो तुझ पर! तू आज के दिन भी अल्लाह को छोड़ कर बंदों के सामने हाथ फैला रहा है! जबकि आज के दिन पूरी उम्मीद है कि अल्लाह की रहमत और उसका करम मां के पेट में पलने वाले बच्चों के लिए भी आम है।

8/20/2018 7:17:32 AM

इमाम मोहम्मद बाक़िर अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

आप अपने जद पैग़म्बर स.अ. का यह इरशाद हमेशा नक़्ल करते थे कि दुनिया में तीन काम सबसे मुश्किल हैं: "ईमानी भाई की माली मदद करना, अपने मुक़ाबले में लोगों से इंसाफ़ करना और हर हाल में अल्लाह को याद करना ।

8/19/2018 11:37:06 AM

दुआए कुमैल और गुनाहों की क़िस्में

पैग़म्बर स.अ. का इरशाद है कि तीन गुनाहों का अज़ाब आख़ेरत से पहले दुनिया ही में नाज़िल हो जाता है, मां बाप का कहना न मानना, लोगों पर ज़ुल्म करना, किसी के एहसान और नेकी को भुला कर उसकी ना शुक्री करना।

8/16/2018 5:13:54 PM

इस्लाम में आमाल का अज्र और उसकी सज़ा का समय तय है

हिसाब किताब मौत से पहले मुमकिन नहीं है जब तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाए और फिर किसी नेक काम की गुंजाइश बाक़ी न रह जाए, बल्कि मरने के बाद भी यह फ़ाइल बंद नहीं हो सकती है क्योंकि यह भी हो सकता है कि इंसान ने किसी सदक़-ए-जारिया का बंदोबस्त किया हो जिससे उसका सवाब जारी रहे या कोई शख़्स उसके हक़ में नेक अमल करता रहे और उसका सवाब मरने वाले को मिलता रहे, ऐसी सूरत में पूरा हिसाब किताब तभी होगा जब सारे नेक काम करने वाले मर जाएं और उसकी तरफ़ से किसी भी नेक अमल अंजाम दिए जाने की कोई भी गुंजाइश न हो।

8/13/2018 8:18:00 AM

इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

इमाम मोहम्मद तक़ी अ.स. की विलादत के समय अमीन की हुकूमत थी, सन् 198 हिजरी में मामून हाकिम बना और 218 हिजरी मोतसिम सत्ता में आया और 220 हिजरी में उसी ने ज़हर दे कर शहीद कर दियाl आपकी शहादत 29 ज़ीक़ादा 220 हिजरी को 25 साल की उम्र में हुई और आपकी क़ब्र आपके जद इमाम काज़िम अ.स. के पहलू में काज़मैन में हैl

8/11/2018 6:44:00 AM

इल्म और माल

जिस्म और रूह के बाक़ी रहने का ज़रिया इल्म और माल है और दोनों को बाक़ी रहना है इसलिए न माल को बुरा कहा जा सकता है न इल्म को, क़ुर्आन ने माले दुनिया को कहीं ख़ैर कहीं अल्लाह का फ़ज़्ल बताया है जो इस बात को दर्शाता है कि इस्लाम माल और दौलत का दुश्मन नहीं है, इंसान का दुश्मन माल का हराम होना है और हराम माल में माल की ग़लती नहीं बल्कि इंसान की ग़लती है।

8/6/2018 4:47:02 PM

जवानी की अहमियत

जवानी मारेफ़त के कमाल का वह दौर है जिसमें बचपन की कमज़ोरियों और नाकामियों का तजुर्बा भी होता है और बुढ़ापे की कमज़ोरियों का अंदाज़ा भी, ऐसे में अगर इंसान थोड़ा सा भी ग़ाफ़िल हो जाए तो कभी काम करने के क़ाबिल नहीं बचेगा और ऐसे समय में अगर बेदार और जागरूक न हुआ तो क़यामत तक बेदार और जागरूक नहीं हो सकता।

8/4/2018 4:23:18 PM

मोमिन और दुनिया की मुसीबतें

पैग़म्बर स.अ. का इरशाद है कि जिस माल की ज़कात न निकाली जाए उस माल पर भी लानत और जिस बदन की ज़कात न निकाली जाए उस बदन पर लानत, आपसे सवाल किया गया कि माल की ज़कात का मतलब तो साफ़ है लेकिन यह बदन की ज़कात का क्या मतलब है? आपने फ़रमाया बदन की ज़कात का मतलब परेशानियों और मुसीबतों में गिरफ़्तार होना है।

8/2/2018 1:25:34 PM

पर्दा

पर्दे के बारे में एक ग़लत विचार यह भी फैलाया जाता है कि पर्दे में रहने वाली औरत दुनिया का कारोबार, नौकरी और दूसरे बहुत से दुनियावी काम नहीं कर सकती वह एक क़ैदी बन कर रह जाती है.... पहली बात तो यह कि यह बात इस्लामी पर्दे से हट कर है, दूसरी बात यह कि इस्लामी इतिहास की शुरुआत ही एक पर्देदार औरत के व्यापार और कारोबार से हुई, इसलिए इस्लाम कैसे इस बात को स्वीकार कर सकता है कि पर्दे में रह कर औरत कारोबार नहीं कर सकती है.....

8/1/2018 2:31:37 PM

  • रिकार्ड संख्या : 297