क़ुर्आन की निगाह में इंसान की अहमियत

अल्लाह ने इंसान को केवल इस लिए पैदा किया है कि वह दुनिया में केवल अपने अल्लाह की इबादत करे और उसके अहकाम की पाबंदी करे, उसकी ज़िम्मेदारी अल्लाह के अम्र की इताअत करना है। इरशाद होता है कि, और हमने इंसान को नहीं पैदा किया मगर केवल इसलिए कि वह मेरी इबादत करें

12/8/2018 6:57:18 PM

बच्चे की तरबियत में मां का किरदार

इमाम अली अ.स. अपने बेटे इमाम हसन अ.स. को वसीयत करते हुए फ़रमाते हैं कि, बेशक बच्चे का दिल ख़ाली ज़मीन की तरह होता है कि जिस में जो बीज डाला जाए वह ज़मीन उसे अपने सीने में रख लेती है, इसलिए इससे पहले कि तुम्हारा दिल सख़्त हो जाए मैंने तुम्हें अदब और तहज़ीब सिखाने में जल्दी की।

12/5/2018 6:34:39 PM

इमाम ज़माना अ.स. की ग़ैबत में उम्मत की ज़िम्मेदारियां

मैं, मुफ़ज़्ज़ल इब्ने उमर, अबू बसीर और अबान इब्ने तग़लिब इमाम सादिक़ अ.स. की ख़िदमत में हाज़िर हुए तो देखा आप ज़मीन में बैठे हुए बहुत ज़्यादा रो रहे हैं और फ़रमाते हैं कि मेरे सरदार तेरी ग़ैबत ने मेरी मुसीबत को अज़ीम कर दिया है, मेरी नींद को उड़ा दिया है और मेरी आंखों से आंसुओं का सैलाब जारी कर दिया है, मैंने हैरत से पूछा ऐ रसूल स.अ. के बेटे, अल्लाह आपको हर आफ़त से महफ़ूज़ रखे यह रोने का कौन सा अंदाज़ है और क्या अल्लाह न करे आप पर कोई ताज़ा मुसीबत नाज़िल हो गई... .......

12/4/2018 7:16:00 AM

क़ुर्आन की निगाह में मिसाली औरतें

अगर हम इस्लाम से पहले और इस्लाम आने के बाद के अरब के इतिहास पर ध्यान दें तो हमें दोनों के बीच का फ़र्क़ साफ़ नज़र आएगा कि इस्लाम के आने से पहले औरत को किस निगाह से देखा जाता था जबकि इस्लाम आने के बाद औरत को क्या मक़ाम और दर्जा दिया गया

12/3/2018 7:17:00 AM

सऊदी अरब को यमन के लोगों में इस्लामी बेदारी का डर

सऊदी अरब यमन के लोगों में इस्लामी बेदारी से डरा हुआ है और उसके हमलों और उसके ज़ुल्म का मक़सद यमन के तेल की मैदानों पर क़ब्ज़ा करना है।अमेरिका हमेशा अपने आपको मानवाधिकारों का हितैषी और आतंकवाद का विरोधी कहता है लेकिन सऊदी अरब द्वारा यमन पर ज़ुल्म और अत्याचार करने में उसका खुला समर्थन रहा है और उससे क़रीबी संबंध भी बनाए हुए हैअमेरिका, यमन में दाइश और अलक़ायदा का खुलेआम समर्थन कर रहा है।

12/2/2018 6:24:26 PM

हज़रत फ़ातिमा मासूमा स.अ. के क़ुम आने की वजह

पूरा अलवी ख़ानदान दूसरी और तीसरी शताब्दी में बनी उमय्या और बनी अब्बास के ज़ुल्म और अत्याचार का शिकार था, कुछ बादशाहों जैसे मंसूर दवानेक़ी और मुतवक्किल जैसों ने इमाम अली अ.स. के ख़ानदान से दुश्मनी की सारी हदें पार कर रखी थीं, इसीलिए जब भी आले अली अ.स. को मौक़ा मिलता था वह हिजरत कर जाते थे ताकि जान भी महफ़ूज़ रह सके और साथ ही अहलेबबैत अ.स. की वह तालीमात जिन्हें बनी उमय्या लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही है उनको लोगों तक पहुंचाया जा सके।

12/1/2018 6:54:00 AM

इमाम सज्जाद अ.स. और आपके अख़लाक़ी पहलू

इमाम सज्जाद अ.स. सुबह होते ही रिज़्क़ और रोज़ी की तलाश में घर से बाहर जाया करते थे, जब आपसे कोई पूछता कि मौला आप कहां जा रहे हैं, आप फ़रमाते कि जा रहा हूं ताकि अपने परिवार की तरफ़ से सदक़ा दूं, फिर किसी ने सवाल किया कि सदक़ा देने के लिए बाहर जा रहे हैं, तो आपने फ़रमया कि जो शख़्स भी हलाल रोज़ी की तलाश में घर से बाहर निकलता है तो उसकी इस कोशिश को अल्लाह सदक़ा देना शुमार करता है।

11/28/2018 7:17:00 PM

आयतुल्लाह बहजत र.ह. की अख़लाक़ी नसीहतें

कोई भी ज़िक्र हमेशा गुनाह से दूर रहने का इरादा करने से अहम और बेहतर नहीं है, अगर अल्लाह तुमको सौ साल की ज़िंदगी दे और तुम उस ज़िंदगी में एक गुनाह भी न करो तो यह बिल्कुल ऐसा ही जैसे कोई इंसान ज़हर खाना तो दूर की बात ज़हर खाने का इरादा भी नहीं रखता और गुनाह की मिसाल भी ज़हर जैसी ही है।

11/28/2018 6:36:57 PM

इस्लामिक यूनिटी कांफ्रेंस मे आए हुए मेहमानों के बीच आयतुल्लाह ख़ामेनई का बयान

अफ़सोस आज भी इंसानियत अपने बुरे दौर से गुज़र रही है और यह केवल इस्लामी जगत से सीमित नहीं कि जो इस्लाम से दूरी बनाए हुए हैं बल्कि सारी इंसानियत का बुरा हाल है, वह देश जो कल्चर, सभ्यता और दुनियावी चकाचौंध में बहुत आगे हैं उनकी भी यही हालत है, और इस दुर्दशा की वजह जेहालत, धोखाधड़ी, अदालत और इंसाफ़ का न होना है, इस्लाम के पास इन सारी चीज़ों का हल है, इस्लाम के पास वह नुस्ख़ा है जिससे सारी क़ौमें निजात हासिल कर सकती हैं, हम मुसलमानों को इससे सीख लेनी चाहिए।

11/27/2018 7:15:00 AM

इस्राईल की दरिंदगी की वजह इस्लामी जगत की ख़ामोशी तो नहीं?

आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह मुसलमानों को अपमानित करने की साज़िशें हो रही हैं और जिस तरह मुसलमानों के बीच फूट डाल कर उन्हें आपस में लड़वा कर साम्राज्यवाद अपनी आर्थिक स्थति को मज़बूत करने के साथ साथ अपनी सेनाओं को मुसलमानों के देश में पाल रहा है और जो ख़तरनाक हथियार बनाए हैं उसकी निकासी के लिए करोड़ों डॉलर मुसलमानों के नरसंहार के लिए ख़र्च कर रहा है और इस साज़िश को जानते हुए भी मुसलमान हुकूमतें इसलिए चुप हैं क्योंकि वह चुप रहने में ही अपनी सत्ता सुरक्षित महसूस करते हैं।

11/26/2018 6:21:47 PM

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बहादुर ख़ानदान की बहादुर ख़ातून यह 20 अरब डॉलर नहीं शीयत को नाबूद करने की साज़िश की कड़ी है पैग़म्बर स.अ. की सीरत और इमाम ख़ुमैनी र.अ. की विचारधारा शिम्र मर गया तो क्या हुआ, नस्लें तो आज भी बाक़ी है!! इमाम ख़ुमैनी र.ह. और इस्लामी इंक़ेलाब की लोकतांत्रिक जड़ें हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के घर में आग लगाने वाले कौन थे? अहले सुन्नत की किताबों से एक बेटी ऐसी भी.... फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी स्थापित कर भारतीय छात्रों को गुमराह कर रही है अमेरिकी सरकार । वह एक मां थी... क़ुर्आन को ज़हर बता मस्जिदें बंद कराने का दम भरने वाले डच नेता ने अपनाया इस्लाम । तुर्की के सहयोग से इदलिब पहुँच रहे हैं हज़ारो आतंकी । आयतुल्लाह सीस्तानी की दो टूक , इराक की धरती को किसी भी देश के खिलाफ प्रयोग नहीं होने देंगे । ईरान विरोधी किसी भी सिस्टम का हिस्सा नहीं बनेंगे : इराक सीरिया की शांति और स्थायित्व ईरान का अहम् उद्देश्य, दमिश्क़ और तेहरान के संबंधों में और मज़बूती के इच्छुक : रूहानी आयतुल्लाह सीस्तानी से मुलाक़ात के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नजफ़ पहुंची