मासूमीन अ.स. के हरम का अहले सुन्नत द्वारा सम्मान

आज के दौर में जब चारों ओर इस्लाम की तालीमात और इस्लामी कल्चर तेज़ी से अपना असर दिखा रहा है, ठीक उसी समय कुछ जाहिल लोग ऐसे भी हैं जिनमें से कुछ कभी इत्तेहाद का ग़लत मलतब बता कर, कभी इत्तेहाद को ढ़ोंग बता कर, कभी किसी फ़िर्क़े को काफ़िर बता कर, कभी बिदअत और शिर्क का फ़तवा जारी कर, कभी मुसलमानों के ख़ून बहाने को तो कभी ख़ुदकुश बम धमाके और पब्लिक प्लेस पर गोलीबारी करने जैसे जुर्म को जाएज़ बता कर अपने साम्राज्यवाद का दलाल होने का सबूत पेश कर रहे हैं।

11/24/2018 2:04:11 PM

ग़ैर मुस्लिमों के बारे में शियों से इमाम सादिक़ अ.स. की वसीयतें

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि साम्राज्यवाद पूरी ताक़त झोंके हुए है कि किसी तरह इस्लामी फ़िर्क़ों के बीच फूट डाली जाए और वह इन्हीं तकफ़ीरी वहाबियों की करतूतों को शिया समाज के हाथों भी होते देखना चाहता है इसलिए शिया जवानों को अहलेबैत अ.स. की तालीमात पर निगाहें जमाए रखने की सख़्त ज़रूरत है क्योंकि दुश्मन कभी जज़्बात को भड़काता है कभी संवेदनशील मुद्दों को उठा कर हमारे एहसास के साथ खिलवाड़ करता है

11/23/2018 7:23:00 PM

मुत्तहिद उम्मत के बिखरने के पीछे की साज़िश

सबका यह कहना है कि यूरोप ने इस्लाम पर कामयाबी हासिल कर ली है और अब काम पूरा हो चुका है, लेकिन मैं जो कि एक कल्चर और संस्कृति का एक्सपर्ट हूं, मैं आपसे कहता हूं कि अब यूरोप के पतन का दौर शुरू होगा, हम पतन के क़रीब हैं और दिन प्रतिदिन यह पतन तेज़ी पकड़ता जाएगा और इस्लामी जगत इस पतन से फ़ायदा उठाते हुए ऊपर ही उठता जाएगा, और ऐसे हालात ख़ास कर एशिया में ज़्यादा देखने को मिलेंगे। वेल डोरेंट

11/21/2018 3:59:38 PM

शौहर क्या करे कि घर जन्नत की मिसाल हो

हमें भी पैग़म्बर स.अ. की सीरत पर अमल करते हुए सार्वजनिक बात कहनी चाहिए, जैसे यह कि देखो बहुत सी औरतों में यह बुरी आदत होती है कि वह इधर की बात उधर लगाती हैं और यह बेहद ग़लत बात है, मुझे ऐसा करने वालों से बहुत चिढ़ होती है ज़रा तुम ध्यान रखना...... एक और अहम बात कि कभी दूसरों के सामने बीवी, मां या बहनों को मत समझाएं (अपमान तो बहुत दूर की बात है), बल्कि अकेले में समझाते हुए मोहब्बत और अपनाईयत का एहसास भी कराएं।

11/19/2018 6:26:22 PM

आयतुल्लाह फ़ाज़िल लंकरानी र.ह. की ज़िंदगी पर एक निगाह

आप अपनी मेहनत और क़ाबिलियत की वजह से केवल 25 साल की उम्र में इज्तेहाद के दर्जे तक पहुंच गए, और आपको यह मक़ाम आपके उस्ताद आयतुल्लाह बुरूजर्दी की पुष्टि से हासिल हुआ।

11/18/2018 6:34:51 PM

दीन के बाक़ी रहने का राज़ अहलेबैत अ.स. की मोहब्बत में है

इमाम हसन अ.स. खड़े हुए और फ़रमाया, वाय हो.... लानत हो तुझ पर ऐ माविया, ऐ ज़िंदा इंसान का कलेजा चबाने वाले की औलाद, तू मेरे वालिद पर लानत करता है? क्या तूने पैग़म्बर स.अ. की हदीस नहीं सुनी कि जिसने अली (अ.स.) पर लानत की उसने मुझ पर लानत की, और जिसने मुझ पर लानत की उसने अल्लाह पर लानत की, और अल्लाह पर लानत करने वाले के लिए क्या जहन्नम के अलावा कोई और ठिकाना है?

11/17/2018 6:23:01 PM

इमाम हसन असकरी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

इमाम हसन असकरी अ.स. के दौर में अनेक इलाक़ों और कई शहरों में शिया फैल चुके थे और कई इलाक़ों में अच्छी ख़ासी तादाद में थे जैसे कूफ़ा, बग़दाद, नेशापुर, क़ुम, मदाएन, ख़ुरासान, यमन और सामर्रा शियों के बुनियादी मरकज़ में से थे, शिया इलाक़ों के इस तरह तेज़ी से फैलने और कई इलाक़ों में शियों के अच्छी ख़ासी तादाद में होने को देखते हुए ज़रूरी था कि उनके बीच आपस में एक दूसरे से संपर्क बना रहे ताकि उनकी दीनी और सियासी रहनुमाई हो सके और उन सभी को एक साथ मंज़िल तक पहुंचाया जा सके

11/15/2018 7:01:00 AM

बीवी क्या करे कि घर जन्नत की मिसाल हो

माफ़ कीजिए आगे ध्यान रहेगा, या माफ़ कर दीजिए फिर कभी शिकायत का मौक़ा नहीं दूंगी.... अल्लाह का ख़ौफ़ दिल में रखने वाली समझदार बीवी जब इस जुमले को कहेगी तो यक़ीन जानिए कि शैतान के लिए घर में झगड़ा करवाने का कोई हथियार बाक़ी नहीं बचेगा।

11/14/2018 8:20:00 AM

अज़ादारी और इंतेज़ार का आपसी रिश्ता

अज़ादारी और इंतेज़ार शीयत के दो ऐसे पर हैं जिनसे शीयत कामयाबी और सआदत की ऊंची उड़ान उड़ सकती है, इसलिए कि कामयाबी के यही दो राज़ हैं, क्योंकि अगर ज़ुल्म और अत्याचार करने वालों से इंतेक़ाम लेने वाले के पास हौसला और जज़्बा न हो तो वह कभी इंतेक़ाम नहीं ले सकता और वह मायूस हो जाएगा, इंतेज़ार इसी जज़्बे को बाक़ी रखता है। शीयत के दो परचम हैं, एक ज़ुल्म से इंतेक़ाम और शहादत की तलब का परचम, दूसरा इंतेज़ार का, और यहा दोनों कामयाबी और पूरे विश्व में क्रांति ला सकते हैं,

11/12/2018 7:01:03 PM

क़यामत क्यों ज़रूरी है

क्या यह इंसान यह सोंचता है कि हम उसकी हड्डियों को दोबारा जोड़ नहीं सकेंगे? बेशक हम इस बात में सक्षम हैं कि उसकी उंगलियों के पोर तक बना सकें, लेकिन इंसान यह चाहता है कि अपने सामने बुराई करता चला जाए।

11/11/2018 8:16:00 AM

  • रिकार्ड संख्या : 354

नवीनतम लेख

बहादुर ख़ानदान की बहादुर ख़ातून यह 20 अरब डॉलर नहीं शीयत को नाबूद करने की साज़िश की कड़ी है पैग़म्बर स.अ. की सीरत और इमाम ख़ुमैनी र.अ. की विचारधारा शिम्र मर गया तो क्या हुआ, नस्लें तो आज भी बाक़ी है!! इमाम ख़ुमैनी र.ह. और इस्लामी इंक़ेलाब की लोकतांत्रिक जड़ें हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. के घर में आग लगाने वाले कौन थे? अहले सुन्नत की किताबों से एक बेटी ऐसी भी.... फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी स्थापित कर भारतीय छात्रों को गुमराह कर रही है अमेरिकी सरकार । वह एक मां थी... क़ुर्आन को ज़हर बता मस्जिदें बंद कराने का दम भरने वाले डच नेता ने अपनाया इस्लाम । तुर्की के सहयोग से इदलिब पहुँच रहे हैं हज़ारो आतंकी । आयतुल्लाह सीस्तानी की दो टूक , इराक की धरती को किसी भी देश के खिलाफ प्रयोग नहीं होने देंगे । ईरान विरोधी किसी भी सिस्टम का हिस्सा नहीं बनेंगे : इराक सीरिया की शांति और स्थायित्व ईरान का अहम् उद्देश्य, दमिश्क़ और तेहरान के संबंधों में और मज़बूती के इच्छुक : रूहानी आयतुल्लाह सीस्तानी से मुलाक़ात के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नजफ़ पहुंची