कर्बला और इमाम सज्जाद अ.स.

कूफ़े का बाज़ार हो या कूफ़े में इब्ने ज़ेयाद का दरबार, शाम का बाज़ार हो या यज़ीद का दरबार, हर जगह इमाम सज्जाद अ.स. और अहले हरम के ख़ुत्बे और बयान ऐसे थे जिन्होंने पूरी दुनिया तक इमाम हुसैन अ.स. की शहादत के मक़सद को पहुंचाया और इस तरह से इमाम सज्जाद अ.स. ने उस मिशन को पूरा किया जिसे इमाम हुसैन अ.स. अंजाम दे रहे थे।

10/4/2018 6:45:41 PM

यज़ीद का दरबार और इमाम सज्जाद अ.स. का ख़ुत्बा

यज़ीद ऐसी परिस्तिथि को देख कर बौखला गया कि कहीं ऐसा न हो कि किसी दूसरे इंक़ेलाब का सामना करना पड़े इसीलिए उसने मोअज़्ज़िन को हुक्म दिया कि अज़ान शुरू करे ताकि इमाम अ.स. ख़ामोश हो जाएं, मोअज़्ज़िन ने अज़ान कहना शुरू किया जैसे ही अल्लाहो अकबर कहा इमाम अ.स. ने फ़रमाया बेशक अल्लाह से बड़ा किसी का वुजूद नहीं है, फिर जैसे ही अशहदो अल्ला इलाहा इल्लल्लाह कहा इमाम अ.स. ने फ़रमाया मेरे बाल, खाल, बदन को गोश्त और मेरा ख़ून उसकी वहदानियत की गवाही देता है, और जैसे ही मोअज़्ज़िन ने अशहदो अन्ना मोहम्मदर रसूलुल्लाह कहा इमाम अ.स. ने यज़ीद की तरफ़ रुख़ किया और कहा ऐ यज़ीद यह बता यह तेने जद का नाम है या मेरे? अगर तू अपना जद कहे तो तू झूठा है और काफ़िर है और अगर यह मेरे जद का नाम है तो ज़रा यह बता कि तूने उनके ख़ानदान को किस जुर्म में क़त्ल कर डाला?

10/4/2018 5:19:00 AM

यज़ीद का दरबार और हज़रत ज़ैनब स.अ. का ख़ुत्बा

ऐ यज़ीद! तू क्या समझता है कि तूने हमारे लिए ज़मीन और आसमान को सीमित कर दिया है? और क्या आले रसूल अ.स. को ज़ंजीरों और रस्सियों में जकड़ कर इधर उधर फिराने से तू अल्लाह से क़रीब और आले रसूल अ.स. ज़लील हो जाएंगे? तेरे ख़्याल में क्या हम मज़लूम हो कर ज़लील हो गए और तूने हम पर ज़ुल्म कर के इज़्ज़त हासिल कर ली?

10/2/2018 9:13:00 AM

अरबईन की ज़ियारत को कैसे मानवी बनाएं

अरबईन का सफ़र अपनी सारी विशेषताओं के साथ एक शानदार और लाजवाब सफ़र है, और अगर एक ख़ास मक़सद और मानवियत के साथ हो तो उसकी बरकतें और ज़्यादा उस ज़ाएर की ज़िंदगी में नज़र आएंगी इसीलिए एक ज़ाएर की कोशिश यही होने चाहिए कि जितना हो सके अरबईन से रूहानियत और मानवियत को अपने लिए हासिल करे, इस लेख में कुछ उन अहम बातों की तरफ़ इशारा किया जाएगा जिससे एक ज़ाएर ज़्यादा से ज़्यादा मानवियत को हासिल कर सकता है।

10/1/2018 6:35:00 AM

हज़रत मीसम तम्मार

तारीख़ की किसी किताब से यह नहीं पता चलता कि वह कब कूफ़ा आए, बनी असद के क़बीले की औरत कैसे आपकी मालिक बनी, वह कब इस्लाम लाए? हालांकि कुछ ऐसी बातें मौजूद हैं जिनसे कहा जा सकता है कि इमाम अली अ.स. की ग़ुलामी में आने से पहले ही वह मुसलमान हो चुके थे, इमाम अली अ.स. ने जब उनसे कहा कि पैग़म्बर स.अ. मुझे ख़बर दे चुके हैं कि तुम्हारे वतन अजम (अरब के अलावा इलाक़ों को अजम कहा जाता है) में तुम्हारे वालिद ने तुम्हारा नाम मीसम रखा था तो मीसम ने कहा था कि सच कहा अल्लाह और उसके रसूल ने और सच कहा अमीरुल मोमेनीन अ.स. ने, इस जुमले से हज़रत मीसम के बारे में 2 बातें पता चलती हैं, पहली यह कि आप अरब से नहीं थे बल्कि अजम थे दूसरे यह कि इमाम अली अ.स. की ख़िदमत में आने से पहले आप केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि मोमिन और आपके ख़ास चाहने वालों में से थेl

9/25/2018 8:08:16 PM

इमाम हुसैन अ.स. एक इंक़लाबी शख़्सियत

इंक़लाबी शख़्सियतें (जिनका अधिकतर ज़िक्र शायरी में मिलता है) उनके अंदर ज़्यादातर क़ौम और देशभक्ति का पहलू पाया जाता है, फिर चाहे वह अफ़सानों में बयान की जाने वाली रुस्तम और इसफ़ंदियार शख़्सियतें हों या हक़ीक़त में जलालुद्दीन ख़्वारज़्मशाह की शख़्सियत हो, अधिकतर किसी क़ौम के बहादुर और ताक़तवर हस्तियां चाहे अफ़सानों में हों या हक़ीक़त में वह अपनी क़ौम और देश की भावनाओं को झिंझोड़ते हैंl

9/22/2018 10:13:00 AM

इमाम हुसैन अ.स. के इंक़ेलाब में औरतों का किरदार

आशूर के इंक़ेलाब को मर्दों और औरतों ने मिल कर कामयाब बनाया और दर्दनाक मौत और शहादत और अपमानित ज़िंदगी के बीच शहादत को चुन कर आज़ादी के सही मतलब को दुनिया तक पहुंचा दियाl आशूर के इंक़ेलाब में ज़्यादातर वह वफ़ादार साथी जो आपके साथ शहीद हुए उनकी तरफ़ ध्यान दिया जाता है और औरतों के किरदार और उनके रोल पर चर्चा कम हो पाती है, हम इस लेख में संक्षेप में कर्बला के इंक़ेलाब में औरतों के किरदार की तरफ़ इशारा कर रहे हैंl

9/15/2018 5:54:00 AM

मोहर्रम और सफ़र से इस्लाम ज़िंदा है

हमारी ज़िम्मेदारी है कि इस मोहर्रम और सफ़र के महीने में जो इस्लाम के ज़िंदा होने का महीना है कर्बला के शहीदों की मुसीबतों को याद करते हुए बातिल परस्तों के ज़ुल्म को बे नक़ाब कर के दीन को और मज़बूत करें क्योंकि अहलेबैत अ.स. के मसाएब के ज़िक्र से ही मज़हब बाक़ी हैl

9/12/2018 2:21:53 PM

ग़दीरे ख़ुम की दास्तान

कहा जाता है कि 90 हज़ार या एक लाख चौदह हज़ार या एक लाख 20 हज़ार या एक लाख 24 हज़ार या इससे भी ज़्यादा तादाद में मुसलमान पैग़म्बर स.अ. के साथ रवाना हुए, लेकिन आपके साथ हज करने वालों की तादाद इससे कहीं ज़्यादा थी, क्योंकि मक्का मुसलमान और जो लोग यमन से इमाम अली अ.स. और अबू मूसा के साथ आए थे वह भी अल्लाह के नबी के क़ाफ़िले में शामिल हो गएl

8/29/2018 7:17:00 AM

ईदे ग़दीर की फज़ीलत और उसके आमाल

इमाम अली रज़ा अ.स. ने फ़रमाया जहां कहीं भी रहो कोशिश करो कि ग़दीर के दिन इमाम अली अ.स. की क़ब्र पर हाज़िर हो, अल्लाह ने उस दिन हर मोमिन और मोमिना के साठ साल के गुनाहों को माफ़ कर देता है और उस दिन जहन्नुम की आग से माहे रमज़ान, शबे क़द्र शबे ईदुल् फ़ितर से दो गुना ज़्यादा लोगों आज़ाद कर देता है और उस दिन मोमिन भाई को एक दिरहम देना हज़ार दिरहम देने के बराबर है, उस दिन अपने मोमिन भाई के साथ एहसान करो और मोमेनीन और मोमेनात को ख़ुश करो, ख़ुदा की क़सम अगर लोगों को इस दिन की फज़ीलत मालूम हो जाए तो वह दस बार फ़रिश्तों से मुसाफ़ेहा करेंगेl

8/28/2018 7:04:00 AM

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