हिंदुस्तान
Thursday - 2018 Oct 18
Languages

बच्चों को डांटे नहीं!!

जब वालेदैन पूरे ग़ुस्से में बच्चों पर चिल्लाते हैं तो वह अपना आपा खो चुके होते हैं जिसकी वजह से वह ऐसी बातें भी बोल जाते हैं जिसे बोलना नहीं चाहते जिसकी वजह से बच्चे का बातिन और उसकी ज़मीर अपना अपमान महसूस करता है, हालांकि बहुत सख़्त है कि आप बीस बार एक ही बात के लिए अपने बच्चे से कहें जैसे यह कि तुम्हारी किताबें यहां क्यों पड़ी हैं, या यह कि कबसे यह किताबें यहां पड़ी हैं वग़ैरह... लेकिन आपसे सवाल है कि.....

6/19/2018 6:09:01 PM

ईदुल फ़ितर ईद का दिन या अहलेबैत अ.स. के ग़म का?

ईद के दिन अहलेबैत अ.स. की मुसीबत को याद कर के आंसू बहाने से किसी से नहीं रोका लेकिन ईद के दिन को ग़म का दिन बताना अहलेबैत अ.स. की सीरत के ख़िलाफ़ है, बल्कि हर मोमिन की ज़िम्मेदारी है वह ईदुल फ़ितर और ईदुल अज़हा के दिनों में इस्लाम द्वारा बताए गए तरीक़ों से ईद मनाने की कोशिश करे।

6/14/2018 2:08:55 PM

ईदुल फ़ितर के आमाल

शबे ईद और ईदुल फ़ितर अपने आमाल के हिसाब किताब का बेहतरीन मौक़ा है कि माहे रमज़ान में हमारे आमाल क्या अल्लाह की बारगाह में पेश करने के क़ाबिल हैं या नहीं? ताकि अगर कोई कमी रह गई हो तो इस शबे ईद में या कल आने वाले ईद के दिन में उस कमी को पूरा कर के हम अपने आमाल को अल्लाह की बारगाह में पेश कर सकें।

6/14/2018 12:02:05 PM

ग़ुस्से और धमकी से बातचीत की मेज़ तक

जैसाकि बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग की मुलाक़ात पर लगभग 2 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया है, अब इस 2 करोड़ डॉलर के ख़र्च से कुछ तो नतीजा निकलना ही चाहिए, फ़िलहाल मीडिया द्वारा जो ख़बरें आ रही हैं उससे तो ऐसा ही लगता है कि 2 करोड़ डॉलर के ख़र्च में मीडिया बहुत दिलचस्पी दिखा रही है क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार ज़्यादा ख़र्च दोनों राजनेताओं की सुरक्षा और प्रेस रिपोर्टर की ख़ातिरदारी पर हुए हैं, इस बातचीत के नतीजे आने वाले समय में कुछ भी हों लेकिन ज़ाहिर में कुछ ऐसे इशारे नहीं मिल सके हैं जिन से कुछ अंदाज़ा हो सके कि अब तक की बातचीत को किनारे फ़ेकते हुए यह महंगी मुलाक़ात जो हुई है क्या यह दुनिया को शांति की ख़ुशख़बरी देगी...., अमेरिका ने अभी तक किस समझौते और किस बातचीत का सम्मान किया है यह तो सभी जानते हैं जिसकी ताज़ा मिसाल ईरान के साथ होने वाला परमाणु समझौता है जिससे बाहर हो कर अमेरिका ने साफ़ कर दिया कि उस पर किस हद तक भरोसा और यक़ीन किया जा सकता है,

6/14/2018 11:44:51 AM

ईद और मासूमीन अ.स. की सीरत

मासूमीन अ.स. की निगाह में ईद की ख़ास अहमियत थी, पैग़म्बर स.अ. ने एक हदीस में ईदुल फितर और ईदुल अज़हा के बारे में फ़रमाया कि जिस समय मैं मदीने में आया तो मुझे पता चला कि जेहालत के दौर में लोग ईद के दो दिनों को बेहूदा और ग़ैर ज़रूरी कामों के लिए जानते थे, इसीलिए अल्लाह ने उन दिनों के बदले दो ईद के दिन क़रार दिए एक ईदुल फ़ितर और दूसरे ईदे क़ुर्बान, फिर आपने एक बहुत लंबी हदीस में फ़रमाया कि जब शबे ईदुल फ़ितर आती है तो अल्लाह नेक अमल वालों को बिना हिसाब किताब सवाब देगा, और जैसे ही ईद की सुबह होती है अल्लाह फ़रिश्तों को सारे शहरों में भेजता है वह ज़मीन पर आ कर गली कूचे में खड़े हो कर बुलंद आवाज़ से पुकार कर कहते हैं ऐ मोहम्मद (स.अ.) की उम्मत ईद की नमाज़ के लिए बाहर निकलो अल्लाह बे हिसाब सवाब देगा और सारे गुनाहों को माफ़ कर देगा।

6/12/2018 2:39:41 PM

माहे रमज़ान से ख़ुदा हाफ़िज़ी के आदाब

जिस ख़ुदा हाफ़िज़ी के लिए हमसे रिवायतों में कहा गया है उसे दुखी मन के साथ होना चाहिए, और ख़ुदा हाफ़िज़ी दुखी मन के साथ तभी होगी जब माहे रमज़ान का पूरी तरह से सम्मान किया हो, हदीस में ज़िक्र किए गए सारे आदाब का ख़्याल रखा हो, अल्लाह की मर्ज़ी हासिल करने की पूरी कोशिश की हो और इस महीने की हुरमत का पूरा ख़्याल रखा हो, अगर इन सारी चीज़ों का ध्यान रखा और माहे रमज़ान से भरपूर रूहानी फ़ायदा हासिल किया तो ऐसे मेहमान का विशेष सम्मान किया जाता है उसकी जगह आला-इल्लीयीन है वह नबियों और फ़रिश्तों से क़रीब जगह पर रहेगा, वह रमज़ान के आने से बेहद ख़ुश और जाने से बेहद दुखी होगा।

6/10/2018 2:12:48 PM

फ़िलिस्तीन और विश्व समुदाय का विश्वासघात

फ़िलिस्तीन सारे इस्लामी जगत का मुद्दा है और इस्राईल अवैध राष्ट्र है वह मिडिल ईस्ट में ज़ायोनी विचारधारा के चलते कैंसर का फोड़ा है जिसे खुरच कर फेंक देना चाहिए और अगर सारे मुसलमान आपस में इत्तेहाद कर के एक एक बाल्टी पानी इस्राईल की तरफ़ फेंक दें तो वह उसके सैलाब में बह जाएगा,

6/7/2018 3:01:41 PM

क़ुद्स रैली में क्यों जाएं....

इंसानी जान की क़ीमत इतनी ज़्यादा है कि शायद ही दुनिया में उसकी अहमियत के बराबर कुछ हो, और निहत्थे आम शहरियों की जान की हिफ़ाज़त को किसी भी जंग में वरीयता दी जाती है, न ही उन पर कोई हमला करता है न ही उनपर बम बरसाता है, लेकिन आप निगाह उठा कर देख लीजिए फ़िलिस्तीन के शहरों पर चाहे ग़ज़्जा हो या रफ़ाह, चाहे ख़ान यूनुस हो चाहे क़ुद्स, हर जगह के बच्चे और औरतें ज़ायोनी दरिंदों के शिकार हैं, कोई भी उनके हक़ के लिए आवाज़ उठाने वाला नहीं है, डेमोक्रासी और मानवाधिकार का झूठा दावा करने वालों से उनके भेदभाव के बारे में कोई आवाज़ उठाने वाला तक नहीं है।

6/7/2018 2:07:00 AM

दुआए जौशन कबीर की फ़ज़ीलत

जो शख़्स माहे रमज़ान में इस दुआ को तीन बार पढ़े अल्लाह उस पर जहन्नम की आग हराम कर देगा और जन्नत उस पर वाजिब कर देगा और दो फरिश्तें उसके साथ कर देगा जो उसे गुनाह से रोकने में मदद करेंगे और वह पूरी ज़िंदगी अल्लाह की हिफ़ाज़त में रहेगा और इस रिवायत के आख़िर में इमाम हुसैन अ.स. ने फ़रमाया मेरे वालिद इमाम अली अ.स. ने मुझे यह दुआ याद करने की वसीयत फ़रमाई और मुझसे अपने कफ़न पर लिखने को भी कहा और साथ यह भी कहा कि अपने अहले बैत अ.स. को इस दुआ की तालीम दूं और उनसे भी पढ़ने के लिए कहूं, इस दुआ में अल्लाह के हज़ार नाम हैं जिन्हें इस्मे आज़म कहा जाता है।

6/7/2018 1:04:00 AM

माहे रमज़ान में बेहतरीन दुआ मग़फ़ेरत की दुआ है: आयतुल्लाह ख़ामेनई

इस्लाम में गुनाहों का माफ़ करने वाला केवल अल्लाह है यहां तक कि पैग़म्बर स.अ. भी गुनाहों को नहीं माफ़ कर सकते हैं जैसाकि क़ुर्आन की आयत में इसका ज़िक्र कुछ इस तरह बयान हुआ है कि ऐ पैग़म्बर अगर इन लोगों ने गुनाह किया और आपके पास आ कर मग़फ़ेरत और इस्तेग़फ़ार का सवाल करें तो आप भी उन लोगों के हक़ में तौबा कीजिए अल्लाह उनकी तौबा को क़ुबूल करने वाला है, इस आयत से ज़ाहिर कि पैग़म्बर स.अ. उन लोगों के लिए इस्तेग़फ़ार करते हैं उनकी मग़फ़ेरत के लिए वसीला बनते हैं न कि उनकी तौबा को क़ुबूल करते हैं यानी गुनाह केवल अल्लाह ही माफ़ कर सकता है किसी और को इसका अधिकार नहीं है।

6/6/2018 4:16:05 PM

  • रिकार्ड संख्या : 297