अरबईन की ज़ियारत को कैसे मानवी बनाएं

अरबईन का सफ़र अपनी सारी विशेषताओं के साथ एक शानदार और लाजवाब सफ़र है, और अगर एक ख़ास मक़सद और मानवियत के साथ हो तो उसकी बरकतें और ज़्यादा उस ज़ाएर की ज़िंदगी में नज़र आएंगी इसीलिए एक ज़ाएर की कोशिश यही होने चाहिए कि जितना हो सके अरबईन से रूहानियत और मानवियत को अपने लिए हासिल करे, इस लेख में कुछ उन अहम बातों की तरफ़ इशारा किया जाएगा जिससे एक ज़ाएर ज़्यादा से ज़्यादा मानवियत को हासिल कर सकता है।

10/1/2018 6:35:00 AM

हज़रत मीसम तम्मार

तारीख़ की किसी किताब से यह नहीं पता चलता कि वह कब कूफ़ा आए, बनी असद के क़बीले की औरत कैसे आपकी मालिक बनी, वह कब इस्लाम लाए? हालांकि कुछ ऐसी बातें मौजूद हैं जिनसे कहा जा सकता है कि इमाम अली अ.स. की ग़ुलामी में आने से पहले ही वह मुसलमान हो चुके थे, इमाम अली अ.स. ने जब उनसे कहा कि पैग़म्बर स.अ. मुझे ख़बर दे चुके हैं कि तुम्हारे वतन अजम (अरब के अलावा इलाक़ों को अजम कहा जाता है) में तुम्हारे वालिद ने तुम्हारा नाम मीसम रखा था तो मीसम ने कहा था कि सच कहा अल्लाह और उसके रसूल ने और सच कहा अमीरुल मोमेनीन अ.स. ने, इस जुमले से हज़रत मीसम के बारे में 2 बातें पता चलती हैं, पहली यह कि आप अरब से नहीं थे बल्कि अजम थे दूसरे यह कि इमाम अली अ.स. की ख़िदमत में आने से पहले आप केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि मोमिन और आपके ख़ास चाहने वालों में से थेl

9/25/2018 8:08:16 PM

इमाम हुसैन अ.स. एक इंक़लाबी शख़्सियत

इंक़लाबी शख़्सियतें (जिनका अधिकतर ज़िक्र शायरी में मिलता है) उनके अंदर ज़्यादातर क़ौम और देशभक्ति का पहलू पाया जाता है, फिर चाहे वह अफ़सानों में बयान की जाने वाली रुस्तम और इसफ़ंदियार शख़्सियतें हों या हक़ीक़त में जलालुद्दीन ख़्वारज़्मशाह की शख़्सियत हो, अधिकतर किसी क़ौम के बहादुर और ताक़तवर हस्तियां चाहे अफ़सानों में हों या हक़ीक़त में वह अपनी क़ौम और देश की भावनाओं को झिंझोड़ते हैंl

9/22/2018 10:13:00 AM

इमाम हुसैन अ.स. के इंक़ेलाब में औरतों का किरदार

आशूर के इंक़ेलाब को मर्दों और औरतों ने मिल कर कामयाब बनाया और दर्दनाक मौत और शहादत और अपमानित ज़िंदगी के बीच शहादत को चुन कर आज़ादी के सही मतलब को दुनिया तक पहुंचा दियाl आशूर के इंक़ेलाब में ज़्यादातर वह वफ़ादार साथी जो आपके साथ शहीद हुए उनकी तरफ़ ध्यान दिया जाता है और औरतों के किरदार और उनके रोल पर चर्चा कम हो पाती है, हम इस लेख में संक्षेप में कर्बला के इंक़ेलाब में औरतों के किरदार की तरफ़ इशारा कर रहे हैंl

9/15/2018 5:54:00 AM

मोहर्रम और सफ़र से इस्लाम ज़िंदा है

हमारी ज़िम्मेदारी है कि इस मोहर्रम और सफ़र के महीने में जो इस्लाम के ज़िंदा होने का महीना है कर्बला के शहीदों की मुसीबतों को याद करते हुए बातिल परस्तों के ज़ुल्म को बे नक़ाब कर के दीन को और मज़बूत करें क्योंकि अहलेबैत अ.स. के मसाएब के ज़िक्र से ही मज़हब बाक़ी हैl

9/12/2018 2:21:53 PM

ग़दीरे ख़ुम की दास्तान

कहा जाता है कि 90 हज़ार या एक लाख चौदह हज़ार या एक लाख 20 हज़ार या एक लाख 24 हज़ार या इससे भी ज़्यादा तादाद में मुसलमान पैग़म्बर स.अ. के साथ रवाना हुए, लेकिन आपके साथ हज करने वालों की तादाद इससे कहीं ज़्यादा थी, क्योंकि मक्का मुसलमान और जो लोग यमन से इमाम अली अ.स. और अबू मूसा के साथ आए थे वह भी अल्लाह के नबी के क़ाफ़िले में शामिल हो गएl

8/29/2018 7:17:00 AM

ईदे ग़दीर की फज़ीलत और उसके आमाल

इमाम अली रज़ा अ.स. ने फ़रमाया जहां कहीं भी रहो कोशिश करो कि ग़दीर के दिन इमाम अली अ.स. की क़ब्र पर हाज़िर हो, अल्लाह ने उस दिन हर मोमिन और मोमिना के साठ साल के गुनाहों को माफ़ कर देता है और उस दिन जहन्नुम की आग से माहे रमज़ान, शबे क़द्र शबे ईदुल् फ़ितर से दो गुना ज़्यादा लोगों आज़ाद कर देता है और उस दिन मोमिन भाई को एक दिरहम देना हज़ार दिरहम देने के बराबर है, उस दिन अपने मोमिन भाई के साथ एहसान करो और मोमेनीन और मोमेनात को ख़ुश करो, ख़ुदा की क़सम अगर लोगों को इस दिन की फज़ीलत मालूम हो जाए तो वह दस बार फ़रिश्तों से मुसाफ़ेहा करेंगेl

8/28/2018 7:04:00 AM

नमाज़ की अज़मत

अल्लाह ने नमाज़ के तीन समय तय कर के हर ईमानी हरारत का इम्तेहान कर लिया, सुबह की नमाज़ आराम और ईमान का मुक़ाबला है और उस समय यह अंदाज़ा हो जाता है कि इंसान के लिए आराम ज़्यादा अहमियत रखता है या ईमान और अक़ीदाl

8/26/2018 5:27:28 PM

यौमे अरफ़ा

यौमे अरफ़ा इमाम सज्जाद अ.स. ने एक शख़्स को किसी के सामने हाथ फैलाते देखा, आपने उससे कहा वाय हो तुझ पर! तू आज के दिन भी अल्लाह को छोड़ कर बंदों के सामने हाथ फैला रहा है! जबकि आज के दिन पूरी उम्मीद है कि अल्लाह की रहमत और उसका करम मां के पेट में पलने वाले बच्चों के लिए भी आम है।

8/20/2018 7:17:32 AM

इमाम मोहम्मद बाक़िर अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

आप अपने जद पैग़म्बर स.अ. का यह इरशाद हमेशा नक़्ल करते थे कि दुनिया में तीन काम सबसे मुश्किल हैं: "ईमानी भाई की माली मदद करना, अपने मुक़ाबले में लोगों से इंसाफ़ करना और हर हाल में अल्लाह को याद करना ।

8/19/2018 1:07:00 AM

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