हिंदुस्तान
Thursday - 2018 Oct 18
Languages

हज़रत ख़दीजा स.अ. का मर्तबा

पैग़म्बर स.अ. ने आपके बारे में फ़रमाया कि अल्लाह ने उनसे बेहतर किसी को मेरे लिए नहीं चुना, उन्होंने उन दिनों मेरी मदद की जब मुझे मदद की ज़रूरत थी, वह ऐसे समय में मुझ पर ईमान लाईं जब सारी दुनिया मुझ से दूर भाग रही थी, उन्होंने ऐसे समय में मेरी बातों को सच माना जब सारी दुनिया मुझे झुठला रही थी, अल्लाह ने उनसे मुझे औलाद अता की।

5/25/2018 11:50:00 PM

शैतान तो क़ैद है फिर गुनाह क्यों.....

पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं ऐ लोगों इस महीने में जन्नत के दरवाज़े खुल जाते हैं अल्लाह से दुआ करो फिर कभी यह दरवाज़े तुम्हारे लिए बंद न हों, जहन्नम के दरवाज़े बंद हो जाते हैं अल्लाह से दुआ करो फिर कभी यह दरवाज़ें तुम्हारे लिए न खुलें, शैतान क़ैद हो गया है अल्लाह से दुआ करो दोबारा तुम्हारे ऊपर हावी न हो।

5/24/2018 12:17:03 PM

विलायते फ़क़ीह (5)

इमाम अली अ.स. का फ़रमान है कि लोगों के लिए हाकिम का हर हाल में होना ज़रूरी है चाहे हाकिम नेक किरदार हो या फ़ासिक़ और फ़ाजिर (बद किरदार)।जब हुकूमत ज़रूरी है तो हम एक शिया से सवाल करते हैं कि आपकी नज़र में ऐसी हुकूमत बेहतर है कि जिसका हाकिम एक मुसलमान, मोमिन, दीनदार, नेक, इस्लाम की मारेफ़त रखने वाला आदिल फ़क़ीह हो या वह हुकूमत जिसका हाकिम बेदीन, बद किरदार, फ़ासिक़, फ़ाजिर, ज़ालिम और जाबिर इंसान हो? इस जगह पर हर शख़्स अपनी दयानत, दीनदारी और अक़्ल के आधार पर ख़ुद फ़ैसला कर सकता है किसी दलील की कोई ज़रूरत नहीं है।

5/23/2018 1:00:00 AM

रोज़े को रोज़ा ही रहने दीजिए साहब

अगर रोज़ा इस्लाम द्वारा बताए गए आदाब का ख़्याल रखते हुए रखा जाए तो यह एक ऐसी इबादत है जो अल्लाह से क़रीब करने के साथ साथ जिस्मानी बीमारी से भी बचाता है और रोज़ेदार को सेहतमंद रखता है, रोज़ा अगर इस्लामी आदाब के तहत रखा जाए तो रोज़ा इबादत भी है, दवा भी है और इंसान के दिल को मज़बूत और ताक़तवर बनाने का स्रोत भी, बस शर्त यही है कि रोज़ेदार अपने आस पास के माहौल की गंदगी से अपने रोज़े को बचा कर रखे और रोज़े में सुस्ती और टाल मटोल न पाया जाए।

5/21/2018 12:24:00 AM

विलायते फ़क़ीह (4)

इस्लाम में आदिल फ़क़ीह नहीं बल्कि फ़िक़्ह और अदालत की हुकूमत होती है, और हुक्मे अव्वली और हुक्मे सानवी का यही वह फ़र्क़ है जो हर किसी की ज़ुबान पर दिखाई देता है कि फ़तवा मानना केवल उस फ़क़ीह के मुक़ल्लिद की ज़िम्मेदारी है लेकिन हुक्म मानना हर किसी पर वाजिब है।

5/20/2018 12:19:30 PM

इफ़्तार के आदाब

गर्म पानी से इफ़्तार के बारे में इमाम सादिक़ अ.स. से हदीस नक़्ल हुई है कि आपने फ़रमाया कि पानी से इफ़्तार करने से इंसान के दिल के गुनाह धुल जाते हैं। पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया गर्म पानी इंसान के मेदे और लीवर को साफ़ रखता है और मुंह से बदबू को दूर करता है, दांतों और आंखों को मज़बूत बनाता है, आंखों की रौशनी को बढ़ाता और गुनाहों को कम करता और सर के दर्द को ख़त्म कर देता है।

5/18/2018 4:23:00 PM

रमज़ानुल मुबारक,तौबा व इस्तिग़फ़ार का महीना।

रमज़ानुल मुबारक में अल्लाह की एक बड़ी नेमत जिससे हमें ख़ास तौर पर फ़ायदा उठाने का हुक्म दिया गया है “तौबा और इस्तिग़फ़ार” है यानि रमज़ानुल मुबारक अपने गुनाहों को माफ़ करवाने का बेहतरीन अवसर है.......

5/17/2018 2:17:27 PM

विलायते फ़क़ीह (3)

यह एक अफ़सोसनाक हक़ीक़त है कि मुसलमान इस्लानी क़ानूनों से ग़फ़लत के नतीजे में अहकाम की रूह को भूल गया और साम्राज्यवादी ताक़तों की साज़िशों से इतना प्रभावित हुआ कि उसने हुकूमत और सियासत को शजरे ममनूआ समझने लगा (यानी वह पेड़ जिसके पास जाने से हज़रत आदम को मना किया गया था) और मुसलमान ख़ुद कहने लगा कि उलमा का हुकूमत से क्या संबंध? इमामों को हुकूमत की क्या ज़रूरत? उनकी हुकूमत तो दिलों पर है।

5/17/2018 10:36:57 AM

माहे रमज़ान की फ़ज़ीलत और आमाल

पैग़म्बर स.अ. ने एक औरत के बारे में सुना कि उसने रोज़े की हालत में अपनी कनीज़ को गाली दी है तो आपने उस औरत को बुला कर खाना मंगवाया और उस औरत से कहा कि यह लो खाना खा लो, उसने कहा या रसूलल्लाह (स.अ.) मैं रोज़ा हूं, पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया कि यह कैसा रोज़ा है जबकि तुमने अभी कुछ देर पहले अपनी कनीज़ को गाली दी है, रोज़ा केवल भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि अल्लाह ने रोज़े का मतलब हर बुरे काम और हर बुरी बात से बचना बताया है

5/15/2018 9:01:00 PM

विलायते फ़क़ीह (2)

इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. की तफ़सीली हदीस के आख़िर में इस तरह नक़्ल हुआ है कि, जो हमारे हलाल व हराम और अहकाम के बारे में जो साहेबे नज़र हो तुम अपने मामलात उनके हवाले कर देना और उसके फ़ैसले पर राज़ी हो जाना क्योंकि मैंने ऐसे शख़्स को तुम्हारे ऊपर हाकिम क़रार दिया है और अगर उसके हुक्म का इंकार किया तो समझो अल्लाह के हुक्म का अपमान किया और हमारी बात को ठुकराया और हमारी बात का ठुकराना अल्लाह की बात का ठुकराना है और अल्लाह की बात का ठुकराना शिर्क के बराबर है।

5/14/2018 8:02:00 AM

  • रिकार्ड संख्या : 297