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विलायते फ़क़ीह (1)

अल्लाह की ओर से इंसानों की हिदायत के लिए जो तालीम और तरबियत का मासूम सिलसिला हज़रत आदम अ.स. से शुरू हुआ था वह आज भी जारी है, ग़ैब में मौजूद इस हिदायत की कश्ती का नाख़ुदा अपनी ज़िम्मेदारी को पूरा कर रहा है............. जब इंसानियत एक पल के लिए भी बिना रहनुमा, रहबर और हादी के नहीं रह सकती तो सवाल यह पैदा होता है कि ग़ैबत में जाने से पहले इमाम महदी अ.स. ने अपनी ज़िम्मेदारियों को किसी के हवाले किया या नहीं? अल्लाह के क़ानूनों को लोगों के लिए बयान करने वाला कोई ज़िम्मेदार है या नहीं?

5/13/2018 8:03:00 AM

इमाम महदी अ.स. पैग़म्बर स.अ. की हदीसों की रौशनी में

उसकी सुन्नत मेरी सुन्नत की तरह होगी, वह लोगों को मेरी उम्मत और शरीयत की ओर दावत देगा, वह लोगों को अल्लाह की किताब की ओर दावत देगा, जिसने उसकी पैरवी की उसने मेरी पैरवी की, जिसने उसका कहना नहीं माना उसने मेरा हुक्म मानने से इंकार किया, जिसने उसकी ग़ैबत का इंकार किया उसने मेरा इंकार किया, जिसने उसको झुठलाया उसने मुझे झुठलाया, जिसने उसकी पुष्टी की उसने मेरी पुष्टी की।

5/2/2018 5:39:01 PM

शबे 15 शाबान के आमाल

पैग़म्बर स.अ. और उनकी आल अ.स. पर सलवात पढ़ कर अपनी हाजतें अल्लाह की बारगाह में बयान करे, इमाम अ.स. फ़रमाते हैं ख़ुदा की क़सम अगर किसी की हाजतें बारिश की बूंदों के बराबर भी हों तो अल्लाह अपने बे पनाह फ़ज़्ल और करम से इस अमल की बरकत के नतीजे में उसको पूरा करेगा। इसके अलावा इस रात के आमाल में जिन चीज़ों की ज़िक्र किया गया है वह इस तरह हैं

5/1/2018 2:56:56 PM

इमाम ज़माना अ.स. की ग़ैबत और हमारी ज़िम्मेदारियां

इमाम ज़माना अ.स. ख़ुद अपनी तौक़ीअ (आपके वह विशेष पत्र जो आपने अपने कुछ ख़ास वकीलों और चाहने वालों के लिए लिख कर अपना पैग़ाम दिया था) में फ़रमाते हैं कि हमें हमारे चाहने वालों के ही आमाल ने ग़ैबत में रहने पर मजबूर किया है, हमेशा मेरे पास उनकी ओर से ऐसी ख़बरे आती हैं जिन्हें हम पसंद नहीं करते।

4/30/2018 6:52:00 AM

नमाज़ और क़ुर्आन में समानताएं

यह नमाज़ और क़ुर्आन ही हैं जिनसे दिलों को सुकून और मन को शांति मिलती है और यह बात क़ुर्आन ने कही कि याद रखो अल्लाह के ज़िक्र से दिलों को आराम मिलता है (सूरए राद, आयत 28) और जिसने भी अल्लाह की याद और उसके ज़िक्र से मुंह मोड़ लिया उसकी ज़िंदगी में कठिनाईयां भी बढ़ती चली जाती हैं, जैसाकि अल्लाह फ़रमाता है जिस किसी ने मेरे ज़िक्र से मुंह फेरा बेशक उसकी ज़िंदगी सख़्त हो जाती है।

4/25/2018 5:51:08 PM

नमाज़ और इमाम अली अ.स. के बीच समानताएं

कठिन परिस्तिथियों में नमाज़ और इमाम अली दोनों से मदद मांगने को कहा गया है जैसाकि नमाज़ के बारे में क़ुर्आन में हुक्म मौजूद है कि सब्र और नमाज़ द्वारा मदद मांगो (सूरए बक़रह, आयत 45) और इमाम रज़ा अ.स. की हदीस है कि जब भी तुम्हारे लिए बुरे हालात और कठिन परिस्तिथि आए तो अल्लाह से हमारे वसीले से मदद मांगो।

4/24/2018 6:23:32 PM

मुनाजाते शाबानिया इमाम ख़ुमैनी र.ह. की निगाह में

इल्मे इरफ़ान की सभी वह बातें जिनको इरफ़ानी उलमा ने लंबी लंबी किताबों में बयान किया है उन सभी उलमा ने इसी मुनाजाते शाबानिया और इस जैसी और दुआओं से सीख लेते हुए लिखा है। यह वह दुआएं हैं जिनके अंदर ज़िक्र किए गए इलाही और इरफ़ानी मतालिब को देखते हुए हमारे कुछ बुज़ुर्ग उस्तादों (इमाम ख़ुमैनी र.ह. के इल्मे इरफ़ान के उस्ताद आयतुल्लाह मोहम्मद अली शाहाबादी) ने क़ुर्आन कहा है, कि जिस तरह से क़ुर्आन आसमान से ज़मीन की तरफ़ नाज़िल हुआ यह दुआएं ज़मीन से आसमान की तरफ़ जाती हैं।

4/23/2018 4:43:31 PM

माहे शाबान में रोज़े की अहमियत

इमाम सज्जाद अ.स. अपने असहाब और साथियों को जमा करते और फ़रमाते थे कि ऐ मेरे असहाब! इस महीने की फज़ीलत को जानते हो? यह माहे शाबान है और पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते थे कि शाबान मेरा महीना है इसलिए अल्लाह से क़रीब होने और पैग़म्बर स.अ. की मोहब्बत की ख़ातिर इस महीने में रोज़ा रखो, क़सम उस अल्लाह की जिसके क़ब्ज़े में मेरी जान है मैंने अपने वालिद इमाम हुसैन अ.स. और उन्होंने अपने वालिद इमाम अली अ.स. से सुना है कि वह फ़रमाते थे कि जो भी अल्लाह से क़रीब होने और पैग़म्बर स.अ. से मोहब्बत की ख़ातिर रोज़ा रखेगा अल्लाह उससे मोहब्बत करेगा और उसको क़यामत के दिन अपने करम से क़रीब कर देगा और जन्नत उस पर वाजिब कर देगा।

4/22/2018 4:41:07 PM

हज़रत अब्बास अ.स. और इरादों की मज़बूती

अल्लाह पर यही भरोसा और तवक्कुल और इरादों की मज़बूती थी जिसने हज़रत अब्बास अ.स. की शख़्सियत को इतना अज़ीम बना दिया कि सारे शोहदा उन पर गर्व करते नज़र आते हैं जैसाकि इमाम सज्जाद अ.स. की हदीस में है कि अल्लाह के नज़दीक हमारे चचा अब्बास की इतनी अज़मत है कि क़यामत के दिन सारे शोहदा उन पर गर्व करेंगे।

4/21/2018 7:05:59 PM

हज़रत अब्बास अ.स. मासूमीन अ.स. की निगाह में

एक दिन इमाम सज्जाद अ.स. की निगाह आपके बेटे उबैदुल्लाह पर पड़ी उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और फ़रमाया कि ख़ुदा मेरे चचा अब्बास अ.स. पर रहमत नाज़िल करे जिन्होंने वफ़ादारी और क़ुर्बानी की मिसाल पेश करते हुए ख़ुद को अपने भाई पर क़ुर्बान कर दिया, और शहादत से पहले दीन और वक़्त के इमाम अ.स. को बचाने के लिए दीन के दुश्मनों द्वारा उनके हाथ भी कट चुके थे

4/20/2018 12:21:09 PM

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