पैदल हज

मैंने ख़्वाब देखा कि किसी शख़्स ने मुझसे सवाल किया कि आख़िर क्या राज़ है कि इमाम हसन अ.स. हज के लिए पैदल चलते थे और सवारियां उनके साथ चला करती थीं तो मैंने उनको यह जवाब दिए...

7/10/2018 2:05:59 PM

शायद आप भी यही चाहते हों!

इस तरह शरीयत ने हमारा काम आसान कर दिया, अब यहां एक चीज़ पर ध्यान देना ज़रूरी है वह यह कि अगर आप गोश्त ख़रीद रहे हैं और आप को यह नहीं मालूम कि यह इस्लामी तरीक़े से ज़िबह हुआ है या नहीं (यानी अल्लाह का नाम लेकर और क़िबले के रुख़ पर ज़िबह हुआ है या नहीं) तो आप उसे नहीं खा सकते क्योंकि उसके हलाल होने में शरई तरीक़े से ज़िबह करना शर्त है, इसे ध्यान में रखिए।

7/8/2018 10:03:24 AM

आले सऊद, तकफ़ीरियत और साम्राज्यवाद के गठजोड़ की कहानी (3)

आश्चर्य की बात है कि यह हक़ीक़त अब्दुल अज़ीज़ को नहीं पता और वह यह कहे जो लोगों (ब्रिटिश साम्राज्य) का शुक्रिया नहीं अदा करता वह ख़ुदा का शुक्रिया नहीं अदा कर सकता जबकि इन वहाबियों का अक़ीदा यह है कि पैग़म्बर स.अ. और दूसरे किसी भी अल्लाह के वली की क़ब्र के सामने नमाज़ पढ़ना हराम है और उनके अक़ीदे के हिसाब से अल्लाह की इबादत में अल्लाह का वली शामिल हो जाएगा और यह शिर्क है तो अब्दुल अज़ीज़ कैसे ब्रिटेन के शुक्रिये को अल्लाह का शुक्रिया बता रहा है... कि अगर इन साम्राज्यवादी ताक़तों का शुक्रिया अदा नहीं किया तो समझो अल्लाह का शुक्रिया अदा नहीं किया।

7/5/2018 4:05:02 PM

आले सऊद, तकफ़ीरियत और साम्राज्य के गठजोड़ की कहानी (2)

तारीख़े नज्द नामी किताब में अब्दुल्लाह फ़ील्बी लिखता है कि इब्ने अब्दुल वहाब ने अपने शागिर्दों के दिमाग़ में जेहाद के वाजिब फ़लसफ़े को पूरी तरह बिठा दिया था उनमें से अधिकतर जेहाद को अपने लिए मुक़द्दस फ़र्ज़ समझते थे, इब्ने अब्दुल वहाब ने लूटे हुए माल का पांचवां हिस्सा केंद्रीय ख़ज़ाने से विशेष कर रखा था जिसे इब्ने सऊद और इब्ने अब्दुल वहाब अपनी ज़रूरत और अपनी मर्ज़ी के हिसाब से ख़र्च करते थे, इन्हीं सब के चलते इब्ने अब्दुल वहाब को एक या दो साल में ही हुकूमती मामलात में काफ़ी पकड़ हासिल हो गई थी।

7/2/2018 5:16:13 PM

आले सऊद, तकफ़ीरियत और साम्राज्य के गठजोड़ की कहानी (1)

आले सऊद ने जहां तकफ़ीरियत और आतंकवाद का जन्म दे कर बढ़ावा दिया वहीं उस दौर के साम्राज्य की ग़ुलामी का हक़ अदा करते हुए मुक़द्दस दीन इस्लाम की पीठ में मुनाफ़ेक़त और फ़िर्क़ा परस्ती का वार भी किया है, और इन सबके पीछे आले सऊद के दो समझौते हैं जिसमें एक वहाबियत की बुनियाद रखने वाले मोहम्मद इब्ने अब्दुल वहाब के साथ और दूसरा ब्रिटेन के बूढ़े साम्राज्य के साथ जिसको विस्तार से इस लेख में बयान किया जाएगा।

6/30/2018 6:08:37 PM

इमाम सादिक़ अ.स. का इल्मी इंक़ेलाब लाने का राज़

हुकूमतें अहलेबैत अ.स. के फज़ाएल को मिटाने और उनकी शख़्सियत को धुंधला करने के लिए ग़लत अक़ीदे और बातिल उलूम का समर्थन करते थे, हद तो यह है कि अलहेबैत अ.स. की दुश्मनी में ज़नादेक़ा (नास्तिक) के कुफ़्र और इलहाद का भी समर्थन करते थे, इनमें से कुछ फ़िर्क़े और उलूम यह थे.... मुर्जेआ जिनका अक़ीदा था कि केवल ईमान काफ़ी है अमल की ज़रूरत ही नहीं या इसी तरह ज़नादेक़ा जिनका ज़िक्र अभी ऊपर हुआ या इसी तरह ग़ालियों (इमामों को ख़ुदा मानने वाले) का फ़िर्क़ा।

6/28/2018 10:16:00 PM

दुआ के क़ुबूल होने की शर्तें...

अल्लाह से किए गए अहद और पैमान पर अमल करना, ईमान, नेक अमल और अमानतदारी भी दुआ के क़ुबूल होने की शर्तों में से है, क्योंकि जो शख़्स अल्लाह से किए गए अहद और पैमान को नहीं निभा सकता उसे अल्लाह के दुआ की क़ुबूल करने के वादे से उम्मीद लगाना बेकार है।

6/27/2018 3:30:24 PM

अमल में ख़ुलूस कैसे लाएं?

ख़ुलूस का मतलब अमल का पाक करना, अमल में ख़ुलूस का मतलब अमल को अंजाम देते समय हमारे ध्यान में केवल अल्लाह की मर्ज़ी और और उसकी बंदगी होनी चाहिए, किसी और का थोड़ा भी ध्यान अमल के अंजाम देते समय नहीं होना चाहिए, साथ ही वह सारी चीज़ें जो ख़ुलूस के लिए रुकावट हैं उनसे ख़ुद को दूर रखना चाहिए जैसे दुनियावी दिखावा, दुनिया की चकाचौंध से मोहब्बत और शैतानी ख़्यालात वग़ैरह,

6/25/2018 3:05:57 PM

बक़ी और क़ुद्स पर राजनीति क्यों?

एक यहूदी और मुसलमान के बीच मतभेद हुआ, यहूदी हक़ पर था यहूदी ने कहा पैग़म्बर स.अ. के पास चलते हैं जो फ़ैसला वह करें उसे मान लिया जाएगा लेकिन मुसलमान ने उसकी बात नहीं मानी क्योंकि वह जानता था कि पैग़म्बर स.अ. का फ़ैसला क्या होगा, इसीलिए यहूदी की बात न मान कर यहूदियों के सरदार काब इब्ने अशरफ़ के पास पहुंचा ताकि वह दोनों के बीच फ़ैसला करे क्योंकि उसे रिश्वत दे कर फ़ैसला अपने हक़ में चाहिए था, इधर मुसलमान ने यह चाल चली उधर आयत नाज़िल हुई कि कुछ लोग इस्लाम का दावा तो करते हैं लेकिन ताग़ूत के विरोध की जब बात आती है तो विरोध तो दूर फ़ैसला करने वाला ही उसे बना देते हैं।

6/21/2018 7:38:26 PM

जन्नतुल बक़ी को ढ़हाने में आले सऊद का किरदार

हर अक़्लमंद इंसान को यह सोंचना चाहिए कि इसी सऊदी में आज भी ख़ैबर के क़िले के बचे हुए अंश वैसे ही मौजूद हैं और उसकी देख रेख भी होती है और दुनिया भर के यहूदी आ कर उसे देखते हैं जिससे साफ़ ज़ाहिर है कि आले सऊद का यहूदियों जो मुसलमानों के खुले हुए दुश्मन हैं उनसे कितने मधुर संबंध हैं।

6/20/2018 5:49:53 PM

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