वालेदैन के हक़ में दुआ

ऐ अल्लाह, अगर तूने उन्हें मुझसे पहले बख़्श दिया तो उन्हें मेरी शफ़ाअत करने वाला क़रार दे, और मुझे पहले बख़्श दिया तो मुझे उनका शफ़ीअ क़रार दे ताकि हम सब तेरे करम के सदक़े में और तेरी बुज़ुर्गी, रहमत और बख़्शिश वाले घर में एक साथ जमा हो सकें, यक़ीनन तू बड़े फ़ज़्ल वाला, क़दीम एहसान वाला और सब रहम करने वालों में सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है।

12/10/2018 6:05:52 PM

क़ुर्आन की तिलावत की फ़ज़ीलत और उसका सवाब

पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि जिसने क़ुर्आन के केवल एक हर्फ़ की तिलावत की उसके आमालनामे में एक नेकी लिखी जाती है और हर नेकी का दस गुना सवाब मिलता है, फिर आपने फ़रमाया, मैं यह नहीं कहता कि अलिफ़ लाम मीम यह हर्फ़ है बल्कि अलिफ़ एक हर्फ़ है लाम दूसरा हर्फ़ है और मीम तीसरा हर्फ़ है

12/9/2018 6:07:12 PM

क़ुर्आन की निगाह में इंसान की अहमियत

अल्लाह ने इंसान को केवल इस लिए पैदा किया है कि वह दुनिया में केवल अपने अल्लाह की इबादत करे और उसके अहकाम की पाबंदी करे, उसकी ज़िम्मेदारी अल्लाह के अम्र की इताअत करना है। इरशाद होता है कि, और हमने इंसान को नहीं पैदा किया मगर केवल इसलिए कि वह मेरी इबादत करें

12/8/2018 6:57:18 PM

बच्चे की तरबियत में मां का किरदार

इमाम अली अ.स. अपने बेटे इमाम हसन अ.स. को वसीयत करते हुए फ़रमाते हैं कि, बेशक बच्चे का दिल ख़ाली ज़मीन की तरह होता है कि जिस में जो बीज डाला जाए वह ज़मीन उसे अपने सीने में रख लेती है, इसलिए इससे पहले कि तुम्हारा दिल सख़्त हो जाए मैंने तुम्हें अदब और तहज़ीब सिखाने में जल्दी की।

12/5/2018 6:34:39 PM

इमाम ज़माना अ.स. की ग़ैबत में उम्मत की ज़िम्मेदारियां

मैं, मुफ़ज़्ज़ल इब्ने उमर, अबू बसीर और अबान इब्ने तग़लिब इमाम सादिक़ अ.स. की ख़िदमत में हाज़िर हुए तो देखा आप ज़मीन में बैठे हुए बहुत ज़्यादा रो रहे हैं और फ़रमाते हैं कि मेरे सरदार तेरी ग़ैबत ने मेरी मुसीबत को अज़ीम कर दिया है, मेरी नींद को उड़ा दिया है और मेरी आंखों से आंसुओं का सैलाब जारी कर दिया है, मैंने हैरत से पूछा ऐ रसूल स.अ. के बेटे, अल्लाह आपको हर आफ़त से महफ़ूज़ रखे यह रोने का कौन सा अंदाज़ है और क्या अल्लाह न करे आप पर कोई ताज़ा मुसीबत नाज़िल हो गई... .......

12/4/2018 7:16:00 AM

क़ुर्आन की निगाह में मिसाली औरतें

अगर हम इस्लाम से पहले और इस्लाम आने के बाद के अरब के इतिहास पर ध्यान दें तो हमें दोनों के बीच का फ़र्क़ साफ़ नज़र आएगा कि इस्लाम के आने से पहले औरत को किस निगाह से देखा जाता था जबकि इस्लाम आने के बाद औरत को क्या मक़ाम और दर्जा दिया गया

12/3/2018 7:17:00 AM

सऊदी अरब को यमन के लोगों में इस्लामी बेदारी का डर

सऊदी अरब यमन के लोगों में इस्लामी बेदारी से डरा हुआ है और उसके हमलों और उसके ज़ुल्म का मक़सद यमन के तेल की मैदानों पर क़ब्ज़ा करना है।अमेरिका हमेशा अपने आपको मानवाधिकारों का हितैषी और आतंकवाद का विरोधी कहता है लेकिन सऊदी अरब द्वारा यमन पर ज़ुल्म और अत्याचार करने में उसका खुला समर्थन रहा है और उससे क़रीबी संबंध भी बनाए हुए हैअमेरिका, यमन में दाइश और अलक़ायदा का खुलेआम समर्थन कर रहा है।

12/2/2018 6:24:26 PM

हज़रत फ़ातिमा मासूमा स.अ. के क़ुम आने की वजह

पूरा अलवी ख़ानदान दूसरी और तीसरी शताब्दी में बनी उमय्या और बनी अब्बास के ज़ुल्म और अत्याचार का शिकार था, कुछ बादशाहों जैसे मंसूर दवानेक़ी और मुतवक्किल जैसों ने इमाम अली अ.स. के ख़ानदान से दुश्मनी की सारी हदें पार कर रखी थीं, इसीलिए जब भी आले अली अ.स. को मौक़ा मिलता था वह हिजरत कर जाते थे ताकि जान भी महफ़ूज़ रह सके और साथ ही अहलेबबैत अ.स. की वह तालीमात जिन्हें बनी उमय्या लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही है उनको लोगों तक पहुंचाया जा सके।

12/1/2018 6:54:00 AM

इमाम सज्जाद अ.स. और आपके अख़लाक़ी पहलू

इमाम सज्जाद अ.स. सुबह होते ही रिज़्क़ और रोज़ी की तलाश में घर से बाहर जाया करते थे, जब आपसे कोई पूछता कि मौला आप कहां जा रहे हैं, आप फ़रमाते कि जा रहा हूं ताकि अपने परिवार की तरफ़ से सदक़ा दूं, फिर किसी ने सवाल किया कि सदक़ा देने के लिए बाहर जा रहे हैं, तो आपने फ़रमया कि जो शख़्स भी हलाल रोज़ी की तलाश में घर से बाहर निकलता है तो उसकी इस कोशिश को अल्लाह सदक़ा देना शुमार करता है।

11/28/2018 7:17:00 PM

आयतुल्लाह बहजत र.ह. की अख़लाक़ी नसीहतें

कोई भी ज़िक्र हमेशा गुनाह से दूर रहने का इरादा करने से अहम और बेहतर नहीं है, अगर अल्लाह तुमको सौ साल की ज़िंदगी दे और तुम उस ज़िंदगी में एक गुनाह भी न करो तो यह बिल्कुल ऐसा ही जैसे कोई इंसान ज़हर खाना तो दूर की बात ज़हर खाने का इरादा भी नहीं रखता और गुनाह की मिसाल भी ज़हर जैसी ही है।

11/28/2018 6:36:57 PM

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