क़ुर्आन की तिलावत की फ़ज़ीलत और उसका सवाब

पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि जिसने क़ुर्आन के केवल एक हर्फ़ की तिलावत की उसके आमालनामे में एक नेकी लिखी जाती है और हर नेकी का दस गुना सवाब मिलता है, फिर आपने फ़रमाया, मैं यह नहीं कहता कि अलिफ़ लाम मीम यह हर्फ़ है बल्कि अलिफ़ एक हर्फ़ है लाम दूसरा हर्फ़ है और मीम तीसरा हर्फ़ है

12/9/2018 6:07:12 PM

क़ुर्आन की निगाह में इंसान की अहमियत

अल्लाह ने इंसान को केवल इस लिए पैदा किया है कि वह दुनिया में केवल अपने अल्लाह की इबादत करे और उसके अहकाम की पाबंदी करे, उसकी ज़िम्मेदारी अल्लाह के अम्र की इताअत करना है। इरशाद होता है कि, और हमने इंसान को नहीं पैदा किया मगर केवल इसलिए कि वह मेरी इबादत करें

12/8/2018 6:57:18 PM

इमाम ज़माना अ.स. की ग़ैबत में उम्मत की ज़िम्मेदारियां

मैं, मुफ़ज़्ज़ल इब्ने उमर, अबू बसीर और अबान इब्ने तग़लिब इमाम सादिक़ अ.स. की ख़िदमत में हाज़िर हुए तो देखा आप ज़मीन में बैठे हुए बहुत ज़्यादा रो रहे हैं और फ़रमाते हैं कि मेरे सरदार तेरी ग़ैबत ने मेरी मुसीबत को अज़ीम कर दिया है, मेरी नींद को उड़ा दिया है और मेरी आंखों से आंसुओं का सैलाब जारी कर दिया है, मैंने हैरत से पूछा ऐ रसूल स.अ. के बेटे, अल्लाह आपको हर आफ़त से महफ़ूज़ रखे यह रोने का कौन सा अंदाज़ है और क्या अल्लाह न करे आप पर कोई ताज़ा मुसीबत नाज़िल हो गई... .......

12/4/2018 7:16:00 AM

हज़रत फ़ातिमा मासूमा स.अ. के क़ुम आने की वजह

पूरा अलवी ख़ानदान दूसरी और तीसरी शताब्दी में बनी उमय्या और बनी अब्बास के ज़ुल्म और अत्याचार का शिकार था, कुछ बादशाहों जैसे मंसूर दवानेक़ी और मुतवक्किल जैसों ने इमाम अली अ.स. के ख़ानदान से दुश्मनी की सारी हदें पार कर रखी थीं, इसीलिए जब भी आले अली अ.स. को मौक़ा मिलता था वह हिजरत कर जाते थे ताकि जान भी महफ़ूज़ रह सके और साथ ही अहलेबबैत अ.स. की वह तालीमात जिन्हें बनी उमय्या लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही है उनको लोगों तक पहुंचाया जा सके।

12/1/2018 6:54:00 AM

इमाम सज्जाद अ.स. और आपके अख़लाक़ी पहलू

इमाम सज्जाद अ.स. सुबह होते ही रिज़्क़ और रोज़ी की तलाश में घर से बाहर जाया करते थे, जब आपसे कोई पूछता कि मौला आप कहां जा रहे हैं, आप फ़रमाते कि जा रहा हूं ताकि अपने परिवार की तरफ़ से सदक़ा दूं, फिर किसी ने सवाल किया कि सदक़ा देने के लिए बाहर जा रहे हैं, तो आपने फ़रमया कि जो शख़्स भी हलाल रोज़ी की तलाश में घर से बाहर निकलता है तो उसकी इस कोशिश को अल्लाह सदक़ा देना शुमार करता है।

11/28/2018 7:17:00 PM

ग़ैर मुस्लिमों के बारे में शियों से इमाम सादिक़ अ.स. की वसीयतें

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि साम्राज्यवाद पूरी ताक़त झोंके हुए है कि किसी तरह इस्लामी फ़िर्क़ों के बीच फूट डाली जाए और वह इन्हीं तकफ़ीरी वहाबियों की करतूतों को शिया समाज के हाथों भी होते देखना चाहता है इसलिए शिया जवानों को अहलेबैत अ.स. की तालीमात पर निगाहें जमाए रखने की सख़्त ज़रूरत है क्योंकि दुश्मन कभी जज़्बात को भड़काता है कभी संवेदनशील मुद्दों को उठा कर हमारे एहसास के साथ खिलवाड़ करता है

11/23/2018 7:23:00 PM

दीन के बाक़ी रहने का राज़ अहलेबैत अ.स. की मोहब्बत में है

इमाम हसन अ.स. खड़े हुए और फ़रमाया, वाय हो.... लानत हो तुझ पर ऐ माविया, ऐ ज़िंदा इंसान का कलेजा चबाने वाले की औलाद, तू मेरे वालिद पर लानत करता है? क्या तूने पैग़म्बर स.अ. की हदीस नहीं सुनी कि जिसने अली (अ.स.) पर लानत की उसने मुझ पर लानत की, और जिसने मुझ पर लानत की उसने अल्लाह पर लानत की, और अल्लाह पर लानत करने वाले के लिए क्या जहन्नम के अलावा कोई और ठिकाना है?

11/17/2018 6:23:01 PM

इमाम हसन असकरी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

इमाम हसन असकरी अ.स. के दौर में अनेक इलाक़ों और कई शहरों में शिया फैल चुके थे और कई इलाक़ों में अच्छी ख़ासी तादाद में थे जैसे कूफ़ा, बग़दाद, नेशापुर, क़ुम, मदाएन, ख़ुरासान, यमन और सामर्रा शियों के बुनियादी मरकज़ में से थे, शिया इलाक़ों के इस तरह तेज़ी से फैलने और कई इलाक़ों में शियों के अच्छी ख़ासी तादाद में होने को देखते हुए ज़रूरी था कि उनके बीच आपस में एक दूसरे से संपर्क बना रहे ताकि उनकी दीनी और सियासी रहनुमाई हो सके और उन सभी को एक साथ मंज़िल तक पहुंचाया जा सके

11/15/2018 7:01:00 AM

क़यामत क्यों ज़रूरी है

क्या यह इंसान यह सोंचता है कि हम उसकी हड्डियों को दोबारा जोड़ नहीं सकेंगे? बेशक हम इस बात में सक्षम हैं कि उसकी उंगलियों के पोर तक बना सकें, लेकिन इंसान यह चाहता है कि अपने सामने बुराई करता चला जाए।

11/11/2018 8:16:00 AM

अकेला सरदार

इमाम हसन अ.स. ने माविया की चालबाज़ी और साज़िशों को देखा तो उसे कई ख़त लिख कर उसे इताअत करने और साज़िशों से दूर रहने को कहा और मुसलमानों के ख़ून बहाने से रोका, लेकिन माविया इमाम अ.स. के हर ख़त के जवाब में केवल यही बात लिखता कि वह हुकूमत के मामलात में इमाम अ.स. से ज़्यादा समझदार और तजुर्बेकार है और उम्र में भी बड़ा है।

11/6/2018 8:08:00 AM

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