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इमाम हुसैन अ.स. के इंक़ेलाब में औरतों का किरदार

आशूर के इंक़ेलाब को मर्दों और औरतों ने मिल कर कामयाब बनाया और दर्दनाक मौत और शहादत और अपमानित ज़िंदगी के बीच शहादत को चुन कर आज़ादी के सही मतलब को दुनिया तक पहुंचा दियाl आशूर के इंक़ेलाब में ज़्यादातर वह वफ़ादार साथी जो आपके साथ शहीद हुए उनकी तरफ़ ध्यान दिया जाता है और औरतों के किरदार और उनके रोल पर चर्चा कम हो पाती है, हम इस लेख में संक्षेप में कर्बला के इंक़ेलाब में औरतों के किरदार की तरफ़ इशारा कर रहे हैंl

9/15/2018 4:24:47 PM

ग़दीरे ख़ुम की दास्तान

कहा जाता है कि 90 हज़ार या एक लाख चौदह हज़ार या एक लाख 20 हज़ार या एक लाख 24 हज़ार या इससे भी ज़्यादा तादाद में मुसलमान पैग़म्बर स.अ. के साथ रवाना हुए, लेकिन आपके साथ हज करने वालों की तादाद इससे कहीं ज़्यादा थी, क्योंकि मक्का मुसलमान और जो लोग यमन से इमाम अली अ.स. और अबू मूसा के साथ आए थे वह भी अल्लाह के नबी के क़ाफ़िले में शामिल हो गएl

8/29/2018 5:47:50 PM

ईदे ग़दीर की फज़ीलत और उसके आमाल

इमाम अली रज़ा अ.स. ने फ़रमाया जहां कहीं भी रहो कोशिश करो कि ग़दीर के दिन इमाम अली अ.स. की क़ब्र पर हाज़िर हो, अल्लाह ने उस दिन हर मोमिन और मोमिना के साठ साल के गुनाहों को माफ़ कर देता है और उस दिन जहन्नुम की आग से माहे रमज़ान, शबे क़द्र शबे ईदुल् फ़ितर से दो गुना ज़्यादा लोगों आज़ाद कर देता है और उस दिन मोमिन भाई को एक दिरहम देना हज़ार दिरहम देने के बराबर है, उस दिन अपने मोमिन भाई के साथ एहसान करो और मोमेनीन और मोमेनात को ख़ुश करो, ख़ुदा की क़सम अगर लोगों को इस दिन की फज़ीलत मालूम हो जाए तो वह दस बार फ़रिश्तों से मुसाफ़ेहा करेंगेl

8/28/2018 5:34:43 PM

इमाम मोहम्मद बाक़िर अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

आप अपने जद पैग़म्बर स.अ. का यह इरशाद हमेशा नक़्ल करते थे कि दुनिया में तीन काम सबसे मुश्किल हैं: "ईमानी भाई की माली मदद करना, अपने मुक़ाबले में लोगों से इंसाफ़ करना और हर हाल में अल्लाह को याद करना ।

8/19/2018 11:37:06 AM

मासूमीन (अ.स.) का इस्तेग़फ़ार

इस्तेग़फ़ार एक तरह की सिफ़ारिश भी है जैसाकि इरशाद होता है कि अगर यह लोग इस्तेग़फ़ार करते और रसूल (स. अ.) भी उनके लिए इस्तेग़फ़ार करते तो यह अल्लाह को तौबा क़ुबूल करने वाला और मेहरबान पाते, इस आयत में पैग़म्बर स.अ. का इस्तेग़फ़ार किसी गुनाह का नतीजा नहीं बल्कि एक तरह की शफ़ाअत है।

7/30/2018 4:52:07 PM

इमाम रज़ा अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

ला इलाहा इल्लल्लाह मेरा क़िला है जो इसमें आ गया वह मेरे अज़ाब से बच गया, इसी हदीस के सिलसिले को देख कर इमाम अहमद इब्ने हमबल ने कहा था कि यह सिलसिला अगर किसी पागल और दीवाने पर पढ़ कर दम कर दिया जाए तो उसका पागलपन दूर हो जाएगा।

7/24/2018 9:23:53 AM

इमाम सादिक़ अ.स. का इल्मी इंक़ेलाब लाने का राज़

हुकूमतें अहलेबैत अ.स. के फज़ाएल को मिटाने और उनकी शख़्सियत को धुंधला करने के लिए ग़लत अक़ीदे और बातिल उलूम का समर्थन करते थे, हद तो यह है कि अलहेबैत अ.स. की दुश्मनी में ज़नादेक़ा (नास्तिक) के कुफ़्र और इलहाद का भी समर्थन करते थे, इनमें से कुछ फ़िर्क़े और उलूम यह थे.... मुर्जेआ जिनका अक़ीदा था कि केवल ईमान काफ़ी है अमल की ज़रूरत ही नहीं या इसी तरह ज़नादेक़ा जिनका ज़िक्र अभी ऊपर हुआ या इसी तरह ग़ालियों (इमामों को ख़ुदा मानने वाले) का फ़िर्क़ा।

6/29/2018 8:46:04 AM

ईद और मासूमीन अ.स. की सीरत

मासूमीन अ.स. की निगाह में ईद की ख़ास अहमियत थी, पैग़म्बर स.अ. ने एक हदीस में ईदुल फितर और ईदुल अज़हा के बारे में फ़रमाया कि जिस समय मैं मदीने में आया तो मुझे पता चला कि जेहालत के दौर में लोग ईद के दो दिनों को बेहूदा और ग़ैर ज़रूरी कामों के लिए जानते थे, इसीलिए अल्लाह ने उन दिनों के बदले दो ईद के दिन क़रार दिए एक ईदुल फ़ितर और दूसरे ईदे क़ुर्बान, फिर आपने एक बहुत लंबी हदीस में फ़रमाया कि जब शबे ईदुल फ़ितर आती है तो अल्लाह नेक अमल वालों को बिना हिसाब किताब सवाब देगा, और जैसे ही ईद की सुबह होती है अल्लाह फ़रिश्तों को सारे शहरों में भेजता है वह ज़मीन पर आ कर गली कूचे में खड़े हो कर बुलंद आवाज़ से पुकार कर कहते हैं ऐ मोहम्मद (स.अ.) की उम्मत ईद की नमाज़ के लिए बाहर निकलो अल्लाह बे हिसाब सवाब देगा और सारे गुनाहों को माफ़ कर देगा।

6/12/2018 2:39:41 PM

इमाम अली अ.स. और यतीमों की सरपरस्ती

एक दिन इमाम अली अ.स. को यतीमों की तंगी और बदहाली की ख़बर मिली, आपने घर जा कर चावल, खजूर, तेल और कुछ खाने की चीज़ों का बंदोबस्त किया उसे अपने कंधे पर रख कर उनके घर चल दिए, मेरे बार बार कहने पर भी वह खाने का सामान मुझे नहीं दिया बल्कि ख़ुद अपने कंधे पर रखे रहे, जब हम यतीमों के घर पहुंचे तो इमाम अ.स. ने अपने हाथ से लज़ीज़ खाना बनाया और फिर अपने हाथ से उन्हें पेट भर खाना खिलाया। फिर आप उन बच्चों के साथ बहुत देर तक खेलते रहे उनको हंसाते रहे बच्चे भी आपके साथ खेलते और खिलखिला कर हंस रहे थे।

6/4/2018 12:42:20 PM

अली अ.स.और यतीमों और महरूमों की मदद

इमाम अली अ.स. ने अपनी हुकूमत में एक बूढ़ी ख़ातून को भीख मांगते हुए देखा इमाम अ.स. ने देखने के बाद पूछा कि कौन है यह और यह भीख क्यों मांग रही है? लोगों ने जवाब दिया मौला यह ईसाई है, आपने फ़रमाया कि जब तक काम करने के क़ाबिल थी उससे काम लेते रहे और अब जब बूढ़ी हो गई तो उसे अनदेखा कर दिया, आपने हुक्म दिया कि उसके ख़र्चों को बैतुल माल से पूरा किया जाए।

6/4/2018 11:11:00 AM

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