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ईद और मासूमीन अ.स. की सीरत

मासूमीन अ.स. की निगाह में ईद की ख़ास अहमियत थी, पैग़म्बर स.अ. ने एक हदीस में ईदुल फितर और ईदुल अज़हा के बारे में फ़रमाया कि जिस समय मैं मदीने में आया तो मुझे पता चला कि जेहालत के दौर में लोग ईद के दो दिनों को बेहूदा और ग़ैर ज़रूरी कामों के लिए जानते थे, इसीलिए अल्लाह ने उन दिनों के बदले दो ईद के दिन क़रार दिए एक ईदुल फ़ितर और दूसरे ईदे क़ुर्बान, फिर आपने एक बहुत लंबी हदीस में फ़रमाया कि जब शबे ईदुल फ़ितर आती है तो अल्लाह नेक अमल वालों को बिना हिसाब किताब सवाब देगा, और जैसे ही ईद की सुबह होती है अल्लाह फ़रिश्तों को सारे शहरों में भेजता है वह ज़मीन पर आ कर गली कूचे में खड़े हो कर बुलंद आवाज़ से पुकार कर कहते हैं ऐ मोहम्मद (स.अ.) की उम्मत ईद की नमाज़ के लिए बाहर निकलो अल्लाह बे हिसाब सवाब देगा और सारे गुनाहों को माफ़ कर देगा।

6/12/2018 2:39:41 PM

इमाम अली अ.स. और यतीमों की सरपरस्ती

एक दिन इमाम अली अ.स. को यतीमों की तंगी और बदहाली की ख़बर मिली, आपने घर जा कर चावल, खजूर, तेल और कुछ खाने की चीज़ों का बंदोबस्त किया उसे अपने कंधे पर रख कर उनके घर चल दिए, मेरे बार बार कहने पर भी वह खाने का सामान मुझे नहीं दिया बल्कि ख़ुद अपने कंधे पर रखे रहे, जब हम यतीमों के घर पहुंचे तो इमाम अ.स. ने अपने हाथ से लज़ीज़ खाना बनाया और फिर अपने हाथ से उन्हें पेट भर खाना खिलाया। फिर आप उन बच्चों के साथ बहुत देर तक खेलते रहे उनको हंसाते रहे बच्चे भी आपके साथ खेलते और खिलखिला कर हंस रहे थे।

6/4/2018 12:42:20 PM

अली अ.स.और यतीमों और महरूमों की मदद

इमाम अली अ.स. ने अपनी हुकूमत में एक बूढ़ी ख़ातून को भीख मांगते हुए देखा इमाम अ.स. ने देखने के बाद पूछा कि कौन है यह और यह भीख क्यों मांग रही है? लोगों ने जवाब दिया मौला यह ईसाई है, आपने फ़रमाया कि जब तक काम करने के क़ाबिल थी उससे काम लेते रहे और अब जब बूढ़ी हो गई तो उसे अनदेखा कर दिया, आपने हुक्म दिया कि उसके ख़र्चों को बैतुल माल से पूरा किया जाए।

6/4/2018 11:11:00 AM

इमाम अली अ.स. की शहादत के बाद इमाम हसन अ.स. की ज़िंदगी

इमाम हसन अ.स. की सन् 40 हिजरी में 37 साल की उम्र में लोगों ने बैअत की और आपने हर किसी से इस शर्त पर बैअत ली कि मैं जिससे सुलह करूंगा उससे सुलह करना पड़ेगी और जिससे जंग करूंगा उससे जंग करना पड़ेगी, लोगों ने इमाम अ.स. की शर्त क़ुबूल करते हुए आपकी बैअत की

5/30/2018 11:56:52 AM

बाग़े रिसालत का पहला फूल

एक बार एक शख़्स मदीने की मस्जिद में आया लोगों के सामने हाथ फैलाया लेकिन उसके ज़रूरत पूरी नहीं हुई, पास ही में हज़रत उसमान बैठे थे उनसे भी अपनी ज़रूरत बताई लेकिन उसकी मुश्किल हल न हो सकी फिर उस फ़क़ीर ने कहा मुझे किसी ऐसे शख़्स का पता बताईए जो मेरी सारी ज़रूरत पूरी कर सके, उसमान ने इशारा कर के कहा कि वह बुज़ुर्ग हस्ती जो अल्लाह की इबादत कर रही है उनके पास चले जाओ और वह इमाम हसन अ.स. थे।

5/29/2018 2:00:58 PM

मासूमीन अ.स. और क़ुर्आन की तिलावत

क़ुर्आन की तिलावत का सबसे ख़ूबसूरत मंज़र कर्बला के मैदान में शबे आशूर देखने को मिला जब इमाम हुसैन अ.स. ने उस रात यज़ीदी फ़ौज से एक रात का समय केवल इसलिए मांगा ताकि सुबह तक क़ुर्आन की तिलावत और अल्लाह से राज़ की बातें हो सकें, इतिहास में मौजूद है कि इमाम हुसैन अ.स. और उनके असहाब के ख़ैमों से पूरी रात क़ुर्आन, नमाज़ और दुआ व मुनाजात की आवाज़ आ रही थी।

5/27/2018 12:35:53 PM

इमाम महदी अ.स. पैग़म्बर स.अ. की हदीसों की रौशनी में

उसकी सुन्नत मेरी सुन्नत की तरह होगी, वह लोगों को मेरी उम्मत और शरीयत की ओर दावत देगा, वह लोगों को अल्लाह की किताब की ओर दावत देगा, जिसने उसकी पैरवी की उसने मेरी पैरवी की, जिसने उसका कहना नहीं माना उसने मेरा हुक्म मानने से इंकार किया, जिसने उसकी ग़ैबत का इंकार किया उसने मेरा इंकार किया, जिसने उसको झुठलाया उसने मुझे झुठलाया, जिसने उसकी पुष्टी की उसने मेरी पुष्टी की।

5/2/2018 5:39:01 PM

इमाम ज़माना अ.स. की ग़ैबत और हमारी ज़िम्मेदारियां

इमाम ज़माना अ.स. ख़ुद अपनी तौक़ीअ (आपके वह विशेष पत्र जो आपने अपने कुछ ख़ास वकीलों और चाहने वालों के लिए लिख कर अपना पैग़ाम दिया था) में फ़रमाते हैं कि हमें हमारे चाहने वालों के ही आमाल ने ग़ैबत में रहने पर मजबूर किया है, हमेशा मेरे पास उनकी ओर से ऐसी ख़बरे आती हैं जिन्हें हम पसंद नहीं करते।

4/30/2018 6:52:00 AM

नमाज़ और इमाम अली अ.स. के बीच समानताएं

कठिन परिस्तिथियों में नमाज़ और इमाम अली दोनों से मदद मांगने को कहा गया है जैसाकि नमाज़ के बारे में क़ुर्आन में हुक्म मौजूद है कि सब्र और नमाज़ द्वारा मदद मांगो (सूरए बक़रह, आयत 45) और इमाम रज़ा अ.स. की हदीस है कि जब भी तुम्हारे लिए बुरे हालात और कठिन परिस्तिथि आए तो अल्लाह से हमारे वसीले से मदद मांगो।

4/24/2018 6:23:32 PM

हज़रत अब्बास अ.स. और इरादों की मज़बूती

अल्लाह पर यही भरोसा और तवक्कुल और इरादों की मज़बूती थी जिसने हज़रत अब्बास अ.स. की शख़्सियत को इतना अज़ीम बना दिया कि सारे शोहदा उन पर गर्व करते नज़र आते हैं जैसाकि इमाम सज्जाद अ.स. की हदीस में है कि अल्लाह के नज़दीक हमारे चचा अब्बास की इतनी अज़मत है कि क़यामत के दिन सारे शोहदा उन पर गर्व करेंगे।

4/21/2018 7:05:59 PM

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