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शहीद मुतह्हरी आज भी ज़िंदा हैं....

आपने फ़लसफ़ा, समाजियात, अख़लाक़, फ़िक़्ह, तारीख़, सीरते मासूमीन अ.स., अक़ाएद और दूसरे अनेक विषय पर इस्लामी विचारों और तालीमात को अपने विशेष अंदाज़ में बयान किया है। आपकी किताबों की विशेषता यह है कि उस समय के समाज की ज़रूरतों के आधार पर लिखी गई हैं और उन्हें हर वर्ग के लोग पढ़ कर समझ सकते हैं यही वजह है कि इमाम ख़ुमैनी र.ह. ने आपकी सारी किताबों की बहुत तारीफ़ की है और इसी तरह आयतुल्लाह ख़ामेनई ने आपकी किताबों को इस्लामी इंक़ेलाब का वैचारिक स्तंभ बताया है।

5/1/2018 4:03:47 PM

शैख़ कुलैनी र.ह. की ज़िंदगी पर एक निगाह

अल-कामिल फ़ित-तारीख़ जैसी किताब लिखने वाले इब्ने असीर कहते हैं कि उन्होंने तीसरी सदी में शिया मज़हब को नई ज़िंदगी दी और वह शिया मज़हब के बुज़ुर्ग और भरोसेमंद आलिम हैं। आपकी लिखी हुई किताब अल-काफ़ी शियों की वह पहली किताब है जो आज तक शियों की सबसे भरोसेमंद किताब है जिसके बारे में शैख़ मुफ़ीद र.ह. का कहना है कि अल-काफ़ी शियों की सबसे अधिक भरोसेमंद और फ़ायदेमंद किताब है।

4/18/2018 5:50:23 PM

सय्यद हसन नसरुल्लाह की ज़िंदगी पर एक निगाह (3)

आप इमाम मूसा सद्र को केवल अमल संगठन की ही नहीं बल्कि हिज़बुल्लाह की भी बुनियाद रखने वाला समझते थे और आप उनसे इतनी मोहब्बत करते थे कि ख़ुद को उनकी औलाद जैसा समझते थे, लेकिन उनके बाद ही दोनों संगठनों में मतभेद शुरू हुए और दोनों के रास्ते अलग हो गए। लेकिन हिज़बुल्लाह ने दिन प्रतिदिन बहुत तरक़्की की, इस संगठन का मक़सद शियों के बुनियादी अक़ीदों को बचाना और उस दिशा में क़दम आगे बढ़ाना है जिस दिशा में इमाम ज़माना अ.स. चाहते हैं, सय्यद हसन नसरुल्लाह का कहना है कि हमें ऐसा नहीं सोंचना चाहिए कि अगर हमको सम्मान दिया जा रहा है तो हम यह न सोंच बैठें कि दीनी सियासी और मज़हबी जानकारियां केवल हमारे ही पास हैं।

4/14/2018 8:42:00 PM

सय्यद हसन नसरुल्लाह की ज़िंदगी पर एक निगाह (2)

आपकी बहादुरी की मिसाल इससे बढ़ कर और क्या हो सकती है कि जहां बड़े बड़े राजनेता और संगठन के लीडर अपने बेटों को देश विदेश की बड़ी यूनिवर्सिटियों में पढ़ने के लिए भेजते हैं वहीं आपने अपने बेटों को लेबनान के जवानों के साथ ज़ायोनी हमलों का मुक़ाबला करने के लिए उन्हीं के साथ भेज दिया और जब आपके बेटे की शहादत की ख़बर आई तो दुनिया के किसी चैनल और मैगज़ीन ने नहीं लिखा कि आपने अपने बेटे की शहादत पर दुख का इज़हार किया हो, बल्कि आपको अपने बेटे हादी की शहादत पर लोगों से दुख जताने के बजाए बधाई की उम्मीद थी, आपके ईमान की बुलंदी का यह आलम था कि अपने जवान बेटे की शहादत की ख़बर पर वैसी ही प्रतिक्रिया ज़ाहिर की जैसी बाक़ी दूसरी ख़बरों पर ज़ाहिर करते हैं।

4/11/2018 3:29:05 PM

सय्यद हसन नसरुल्लाह की ज़िंदगी पर एक निगाह (1)

सितम्बर 1997 में ज़ायोनी दरिंदों के हाथों दक्षिणी लेबनान के जबलुर-रफ़ीअ इलाक़े में हिज़्बुल्लाह के दो जियाले शहीद कर दिए और उनके ख़ून में लतपथ जिस्मों को इस्राईल ने बिना पहचाने अपने क़ब्ज़े में ले कर नेशनल टी वी पर दिखा दिया, लेकिन बहुत जल्द ही पहचान लिया गया कि उन दो शहीदों में से एक हिज़्बुल्लाब के जनरल सेक्रेटरी सय्यद हसन नसरुल्लाह का बेटा सय्यद हादी है, इस ख़बर ने लेबनान के लोगों को बहुत ज़्यादा प्रभावित कर दिया था क्योंकि लेबनान के इतिहास में अभी तक चाहे गृह युद्ध हो चाहे ज़ायोनियों के हमलों का मुंह तोड़ जवाब देने का समय हो किसी भी मौक़े पर किसी बड़े राजनीतिक या किसी बड़े पद पर पहुंचे हुए लीडर के बेटे को इस तरह देश की सीमा की रक्षा करते हुए शहीद होते हुए नहीं देखा गया था।

4/10/2018 3:35:41 PM

शैख़ तूसी र.ह. की ज़िंदगी पर एक निगाह

ख़्वाजा नसीरुद्दीन तूसी र.ह. लिखते हैं कि आप रातों को जाग कर किताबें पढ़ते रहते थे, आपके चारें तरफ़ अलग अलग विषयों की अनेक किताबें रखी रहती थीं आप जब किसी एक विषय को पढ़ते पढ़ते थक जाते थे तो किसी दूसरे विषय की किताब उठा कर पढ़ने लगते थे, आप जब रात में किताबें पढ़ते तो आपके पास हमेशा पानी का एक बर्तन रखा रहता ताकि जैसे ही नींद आए पानी द्वारा नींद को दूर किया जा सके और फिर सुबह जब आप किताबों द्वारा अलग अलग इल्मी मुश्किलों को हल कर के उठते तो आवाज़ देते कहां हैं वह बादशाह और उनकी औलादें..... वह क्या जानें इस मज़े और सुकून को।

3/26/2018 3:44:07 PM

आयतुल्लाह शहीद बाक़िर अल-सद्र की ज़िंदगी पर एक निगाह

सद्दाम का सौतेला भाई बरज़ान इब्राहीम जो कि इराक़ की सुरक्षा परिषद का चेयरमैन था उसने जेल में आयतुल्लाह शहीद बाक़िर अल-सद्र से कहा कि आप इमाम ख़ुमैनी र.ह. और इस्लामी इंक़ेलाब के विरुध्द बस कुछ ही शब्द लिख दीजिए वरना आपको मार दिया जाएगा, आपने उसकी इस मांग को रद्द करते हुए कहा कि मैं मरने के लिए तैयार हूं लेकिन तुम्हारी इस नीच और घटिया मांग को पूरा नहीं कर सकता, मैं अपनी रास्ता चुन चुका हूं और अब उसे किसी भी क़ीमत पर नहीं बदल सकता।

3/13/2018 6:33:00 AM

अल्लामा अमीनी की ज़िंदगी पर एक नज़र

आप नजफ़ में किताबों के अध्ययन के अलावा बुज़ुर्ग उलमा और मराजे की विशेष बैठकों में भी हिस्सा लेते और आपके तक़वा और आपकी क़ाबिलियत को देखते हुए वह सभी उलमा और मराजे आपको अपने साथ बैठने की अनुमति भी दे देते थे, और आपका तक़वा और आपकी क़ाबिलियत ही कारण बनी की बहुत कम उम्र में आपको रिवायत बयान करने की बुज़ुर्ग मराजे की ओर से अनुमति हासिल हो गई थी, और आप तफ़सीर, हदीस, तारीख़ और इल्मे रेजाल जिससे रावियों के सच्चे और झूठे होने का पता लगाया जाता है और दूसरे उलूम में महारथ हासिल हो गई थी और आप इन उलूम में ख़ुद अपनी राय और अपना नज़रिया बयान करते थे।

2/22/2018 3:43:31 PM

अल्लामा शहीद मुर्तज़ा मुतह्हरी की ज़िंदगी पर एक निगाह

आप हमेशा इमाम ख़ुमैनी के साथ ही रहते थे जिसके चलते कहा जा सकता है कि 5 जून 1963 को इमाम ख़ुमैनी की देख रेख में तेहरान से शाह के साम्राज्य के विरुध्द आवाज़ उठाने और सड़कों पर निकल कर शाह के विरुध्द नारेबाज़ी करने की हिम्मत आप ही ने पैदा की थी, यही कारण है कि आपको उसी दिन शाह के विरुध्द एक तक़रीर के कारण गिरफ़्तार कर के जेल में डाल दिया गया जिसमें पहले से कुछ उलमा क़ैद थे, लगभग 43 दिन बाद बड़ी तादाद में उलमा और तेहरान के पास और दूर के लोगों ने तेहरान पहुंच कर शाह की हुकूमत पर दबाव बनाया जिसके बाद शाह को मजबूर हो कर शहीद मुतह्हरी समेत सभी उलमा को रिहा करना पड़ा।

2/12/2018 6:53:00 PM

अल्लामा तबातबाई की ज़िंदगी पर एक निगाह

आपने कई विषय पर ऐसी किताबें लिखी हैं जो अपनी मिसाल आप हैं, आपने क़ुर्आन की ऐसी तफ़सीर लिखी जिसके बारे में अल्लामा शहीद मुतह्हरी जैसी शख़्सियत कहती है कि अल्लामा तबातबाई का अल-मीज़ान लिखते समय ज़रूर ग़ैब से संबंध था क्योंकि बिना अल्लाह की ख़ास मेहरबानी के क़ुर्आन की ऐसी तफ़सीर कोई नहीं लिख सकता

2/8/2018 5:21:00 AM

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