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सामाजिक स्तर पर काम करने की अहमियत

सामाजिक स्तर पर किया जाने वाला काम भी 500 छात्रों वाली क्लास लेने से कम अहमियत नहीं रखता।

12/24/2017 5:24:10 PM

सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई की निगाह में ज़ायोनिज़्म

ज़ायोनी सरकार वर्तमान फिलिस्तीन पर भी संतुष्ट नहीं है पहले 1 बालिश्त ज़मीन चाहते थे बाद में आधे फिलिस्तीन पर कब्ज़ा कर लिया और फिर पूरे फिलिस्तीन पर क़ब्ज़ा कर लिया , उसके बाद फिलिस्तीन के पडोसी देशों जैसे सीरिया , जॉर्डन और मिस्र पर भी अतिक्रमण किया और उनकी जमीनों पर भी कब्ज़ा जमा लिया अब भी अवैध राष्ट्र का उद्देश्य ग्रेटर इस्राईल की स्थापना है ।

12/23/2017 5:24:00 PM

प्रतिरोध ही है सफलता का एकमात्र रास्ता : आयतुल्लाह ख़ामेनई

अगर यह आंदोलन अल्लाह पर ईमान और भरोसे के साथ होगा तो अवश्य आगे बढ़ेगा , मैं इसी लिए कह रहा हूँ और बार बार कहता हूँ कि अगर आंदोलन और प्रतिरोध के साथ साथ अल्लाह पर ईमान और भरोसा होगा तो सफलता ज़रूर मिलेगी । इस भरोसे और आस्था का मतलब आधा अधूरा ईमान नहीं है बल्कि वह पूरा ईमान है जो इस्लाम चाहता है, अगर ऐसा हुआ तो तभी अल्लाह का वह वादा पूरा होगा कि प्रकृति और इतिहास के सारे क़ानून तुम्हारे पीछे पीछे चलेंगे

12/21/2017 7:02:00 AM

अवैध राष्ट्र को सुख और शांति नही मिलने वाली ।

1948 के बाद से फिलिस्तीनी बहुत जागरूक और मज़बूत हो गए हैं और उनकी आबादी में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है, इस युग मे उनके बीच महान हस्तियों ने भी जन्म लिया है, अगर उस समय यह लोग इतने कमज़ोर थे कि उन्हें उन्ही के घरों और और देश से बाहर निकाल दिया गया तो आज यह इतने निडर और मज़बूत हो गए हैं कि इन्होने लाखों हथियारबंद ज़ायोनियों से उनका चैन और सुकून छीन लिया है, ज़ायोनी अपने महलों , घरों , शहरों तथा अन्य स्थानों पर भी शांति और सुरक्षा के साथ नही रह सकते ।

12/18/2017 6:34:59 PM

इस्लाम दुश्मनी पर बना अमेरिका और ज़ायोनिज़्म का मनहूस संगठन : आयतुल्लाह ख़ामेनई

इस्लाम अपनी बरकत और अपनी शिक्षाओं के बल पर इस्लामी देशों में ऐसी शक्ति और क्रांति ला सकता है जिस के बाद दुनिया का कोई भी देश या समाज उनको अपने प्रभाव में नहीं ले सकता, लेकिन हैरत होती है कि यह लोग इस महान नेमत से कोई लाभ नहीं उठा रहे हैं ।

12/17/2017 6:12:32 PM

ईरान का इस्लामी इन्क़ेलाबः हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई की निगाह में (2)

इस इन्क़ेलाब का पहला मैसेज यह था कि दुनिया में इंसानी और अख़लाक़ी अक़दार (नैतिक मूल्यों) का दौर आ पहुँचा है, इस समय इस मैसेज को समझने और उस पर विश्वास करने वाले लोग बहुत कम थे

2/10/2017 8:00:00 PM

ईरान का इस्लामी इन्क़ेलाबः हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई की निगाह में (1)

ईरानी पब्लिक ने इस्लामी इन्क़ेलाब की कामयाबी तक हज़रत इमाम ख़ुमैनी रह. के नेतृत्व में जितने प्रयास किये या इन्क़ेलाब की कामयाबी के बाद इस देश नें जितनी मुश्किलों का सामना किया है, सबका सिर्फ़ एक ही मक़सद यानि इस्लामी पाक व पवित्र ज़िन्दगी की तलाश थी।

2/9/2017 10:03:00 AM

पैग़म्बरे इस्लाम स. की ज़िंदगी के कुछ पहलू

आपका बिस्तर चटाई का था, तकिया चमड़े का था जिसमें खजूर के पत्ते भरे हुए थे. आपका खाना अधिकांश जौ की रोटी और खजूर होता था। लिखा है कि हज़रत (स.) कभी भी तीन दिन तक लगातार गेहूं की रोटी या रंगारंग खाने नहीं खाते थे।

12/17/2016 12:51:00 PM

कर्बला के शहीदों की श्रेष्ठ्ता का राज़।

कभी अल्लाह के नाम पर दिया जाने वाला एक रूपया वह काम कर जाता है जो काम दूसरे वक़्त में हज़ारों रूपये भी नहीं कर सकते। कर्बला के शहीदों की शहादत इस वजह से दूसरी शहादतों से ज़्यादा श्रेष्ठ नहीं है कि वह प्यासे शहीद किये गए क्योंकि दुनिया में, हिस्ट्री में और भी बहुत से शहीद मिलते हैं जो प्यास से शहीद हुए बल्कि उनकी शहादत की श्रेष्ठता का अस्ली और मौलिक कारण वह वक़्त और ज़माना है जब वह शहीद हुए।

10/11/2016 9:19:00 AM

इमाम हुसैन अ. ने यज़ीद के ख़िलाफ़ आंदोलन क्यों किया?

जब से करबला में आशूरा की घटना घटी है उस वक़्त से आज तक उस घटना के दर्शकों, मासूम इमामों, शायरों, ख़तीबों, लेखकों और दूसरे लोगों नें उसके बारे में बहुत कुछ कहा और बहुत कुछ लिखा है लेकिन वास्तविकता यह है कि आज तक उसे पूरी तरह कोई बयान नहीं कर सका है।

10/10/2016 2:14:00 AM

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