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ज़ाहिर है ऐसे शख़्स जिसकी उंगलियों से लेकर कोहनियों तक मुसलमानों ख़ास कर शियों का ख़ून टपक रहा हो तो ऐसे शख़्स का ऐसा स्वागत कौन पसंद करेगा, ऐसे मौक़े पर बस यही कहने को दिल करता है कि दुनिया के सबसे नीच और घटिया इंसान का दुनिया की सबसे नाकाम हुकूमत स्वागत कर रही है, जबकि सारे मुसलमान जानते हैं यह वही इंसान है जिसने शियों और हर उस इंसान जो उसकी कट्टरपंथी वाली विचारधारा का विरोध करेगा उसको बर्बाद करने की बात बार बार कही है, शर्म की बात है कि पाकिस्तान की हुकूमत इतनी कमज़ोर और मजबूर हो चुकी है कि उसे एक अय्याश और निठल्ले बादशाह के डॉलर और रियाल की ज़रूरत पड़ गई है।
इमाम ख़ुमैनी र.अ. ने अपनी विचारधारा में नबियों की बेसत के मक़सद को ख़ास जगह दी है और अनेक मौक़ों पर फ़रमाया है कि अंबिया ज़ुल्म से टकराने और उसको जड़ से ख़त्म करने और दीन और अदालत को क़ायम करने के लिए तशरीफ़ लाए थे
अभी हाल ही में पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने ही में जो हादसा हुआ उसने हम सभी के दिल को हिला कर रख दिया है, कल जब इसी शहर में इज़्ज़त लूटी जा रही थी, क़त्लेआम हो रहा था, बच्चों को बेरहमी से मारा जा रहा था तब भी उनका जुर्म केवल पैग़म्बर स.अ. और उनके अहलेबैत अ.स. से मोहब्बत करना था जबकि इस मोहब्बत के लिए ख़ुद अल्लाह ने क़ुर्आन में हुक्म दिया है और पैग़म्बर स.अ. ने अपनी ज़िंदगी में इस बात की बेहद ताकीद की है, और आज भी यही सुन्नत जारी है, आप सोचिए जिस नबी स.अ. और उनकी पाकीज़ा आल अ.स. पर सलवात पढ़ने का हुक्म अल्लाह और उसके रसूल स.अ. ने दिया हो उसी सलवात की वजह से एक मां की गोद से उसके कमसिन बच्चे को छीन कर उसके गले को पैग़म्बर स.अ. के शहर मदीने में काट दिया गया....
इमाम ख़ुमैनी र.ह. के नेतृत्व में इस्लामी इंक़ेलाब ने दुनिया को अच्छी हुकूमत और सिद्धांत प्रणाली को पहचनवाया और इसी वजह से इस्लामी इंक़ेलाब से दुश्मनी की शुरूआत हुई, विशेष कर अमेरिका और उसके सहयोगी सऊदी अरब समेत अधिकतर अरब देश ईरान की ताक़त से भयभीत हो गए, यह कहना ग़लत नहीं होगा कि अमेरिका, सऊदी अरब और अवैध राष्ट्र इस्राईल आज के दौर में हर ज़ुल्म, अपराध और फ़ितने की जड़ हैं जो यह नहीं चाहते कि मिडिल ईस्ट में लोकतंत्र क़ायम हो
पैग़म्बर स.अ. की वफ़ात के बाद उनकी बेटी हज़रत ज़हरा स.अ. पर ढ़हाए जाने वाले बेशुमार और बेहिसाब ज़ुल्म और फिर उन्हीं ज़ुल्म की वजह से आपकी शहादत इस्लामी इतिहास की एक ऐसी हक़ीक़त है जिसका इंकार कर पाना ना मुमकिन है, इसलिए कि इतिहास गवाह है कि बहुत कोशिशें हुईं और बहुत मेहनत की गई, क़लम ख़रीदे गए और केवल यही नहीं बल्कि इंसाफ़ पसंद इतिहासकारों पर बहुत सारी हक़ीक़तें छिपाने के लिए दबाव भी बनाया गया, लेकिन ज़ुल्म, वह भी इस्मत के घराने की नूरानी ख़ातून पर छिप भी कैसे सकता था
वह बेटी जिसका नाम पैग़म्बर स.अ. ने अल्लाह के हुक्म से फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) रखा था वह रिसालत के बाग़ का अकेला वह फूल है जिसकी मिसाल मिलना मुमकिन नहीं है, वह इसलिए कि अल्लाह ने मर्दों की हिदायत के लिए एक लाख चौबीस हज़ार नबियों को भेजा, नबुव्वत के बाद इमामत के सिलसिले को शुरू किया जो आज तक जारी है, लेकिन बेटियों और महिलाओं के लिए इसी बेटी यानी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स.अ. को क़यामत तक की औरतों के लिए आइडियल क़रार दिया।
अमेरिका के आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन के अनुसार फर्जी यूनिवर्सिटी ऑफ फर्मिंगटन के 600 में से 130 छात्रों को गत सप्ताह हिरासत में लिया गया। इनमें से 129 भारतीय हैं।
अली! निगाहें उठाओ, मेरी तरफ़ देखो... अली! देखो यह कौन है... अली! यह वही है जिसको पा कर तुमने शुक्र का सजदा किया था... अली! यह वही है जिसको देख कर तुम अपना दर्द अपनी तकलीफ़ भूल जाया करते थे, मगर आज तुम्हें क्या हो गया है... तुम अपने ग़म मुझ से नहीं बताओगे तो फिर किस से बताओगे...
वैन क्लावेरेन पीवीवी सदस्य के रूप में इस्लाम के मुखर आलोचक थे, देश की संसद में बुर्का- और मीनार पर प्रतिबंध का समर्थन करते थे और इस्लाम को आतंक, मृत्यु और विनाश की विचारधारा के रूप में संदर्भित करता थे। 39 वर्षीय वैन क्लावेरेन ने कहा कि वह अपनी रिसर्च के दौरान इस्लाम की बहुत से बातों से परिचित हुए जिन से वह अनजान थे तथा वह इन बातों से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लिया ।
पिछले कुछ दिनों में ही तुर्क सेना की देख रेख में हज़ारों आतंकी तुर्की के रास्ते इदलिब में दाखिल हो चुके हैं जहाँ वह आतंकी संगठनों के साथ मिलकर सीरियन सेना के खिलाफ मोर्चा संभाल सकें । इदलिब के स्थानीय सूत्रों के अनुसार पिछले 2 दिन में इदलिब पहुंचने वाले आतंकी गुटों की संख्या में बहुत तेज़ी आई है ।
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