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Code : 183045
Date of publication : 31/7/2016 18:5
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अबक़ातुल अनवार

“अबक़ातुल अनवार” मौलवी अब्दुल अज़ीज़ देहलवी की किताब “तोहफ़ा-ए-इसना अशरिया” के सातवें अध्याय के जवाब में लिखी गई है जिसमें मौलवी अब्दुल अज़ीज़ देहलवी ने अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अ. की इमामत पर शिया द्वारा दिए जाने वाले तर्कों और दलीलों को नकारा था। अल्लामा मीर हामिद हुसैन अपनी इस किताब में इमामत के दर्शन को रौशन करके यह समझाने की कोशिश करते हैं कि वास्तविक इस्लाम वह नहीं है जो ख़लीफ़ाओं के दरबारों में प्रचलित था। आपने अपनी इस किताब में देहलवी की एक एक बात का करारा और तर्कसंगत जवाब दिया है।

विलायत पोर्टलः अबक़ातुल अनवार फ़ी इमामतिल अइम्मतिल अतहार (عَبَقاتُ الأنوار فی إمامَة الأئمةِ الأطهار) एक इल्मी किताब है जिसे सैयद मीर हामिद हुसैन हिंदी ने इमामत के अध्याय में मौलवी अब्दुल अज़ीज़ देहलवी की शिया अक़ीदों और विश्वासों के खिलाफ लिखी गई किताब तोहफ़ा-ए-इसना अशरिया (تحفۃ اثنا عشریہ) के जवाब में लिखा है।
“अबक़ातुल अनवार” मौलवी अब्दुल अज़ीज़ देहलवी की किताब “तोहफ़ा-ए-इसना अशरिया” के सातवें अध्याय के जवाब में लिखी गई है जिसमें मौलवी अब्दुल अज़ीज़ देहलवी ने अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अ. की इमामत पर शिया द्वारा दिए जाने वाले तर्कों और दलीलों को नकारा था। अल्लामा मीर हामिद हुसैन अपनी इस किताब में इमामत के दर्शन को रौशन करके यह समझाने की कोशिश करते हैं कि वास्तविक इस्लाम वह नहीं है जो ख़लीफ़ाओं के दरबारों में प्रचलित था। आपने अपनी इस किताब में देहलवी की एक एक बात का करारा और तर्कसंगत जवाब दिया है।


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