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Date of publication : 26/11/2017 18:23
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क्या अमल के बग़ैर ईमान का महत्व है?

थोड़े ही समय में और भी लोग प्यासे हो गए, हर एक पानी माँगने लगा लेकिन वह यही कहता कि झूठ बोल रहा है, तभी एक आदमी पानी लेने के लिए उठ खड़ा हुआ, उस ग़ुलाम ने कहा केवल यही आदमी सच कह रहा है क्योंकि यह शोर शराबा ना कर के अपनी जगह से पानी लेने के लिए उठ खड़ा हुआ।

विलायत पोर्टल :  जवाब: क़ुर्आन में हमेशा ईमान के साथ नेक अमल का भी ज़िक्र है, ईमान और नेक अमल का आपसी संबध सूई और धागे जैसा है, उसका प्रयोग तभी हो सकता है जब दोनों एक दूसरे के साथ हों, अगर सूई और धागा दोनों एक दूसरे से अलग हों तब उनसे कपड़े को नहीं सिला जा सकता, क़ुर्आन का कहना है कि अगर अल्लाह से मुहब्बत है तो पैग़म्बर के आज्ञाकारी बन के रहो। (सूरए आले इमरान, आयत 31) बहुत से लोग हैं जिनका कहना है कि हम मोमिन हैं लेकिन वह अमल नहीं करते, वह कहते हैं अल्लाह से मुहब्बत है लेकिन वह लोग अल्लाह से क़रीब नहीं होते, नमाज़ नहीं पढ़ते, इमामे अली अ. की इमामत और विलायत दिल में रखते हैं लेकिन अमल में इमाम की जीवनी की झलक नहीं दिखाई देती, इमामे ज़माना अ. पर ईमान रखते हैं लेकिन अपने माल में इमाम का हिस्सा जिसका देना वाजिब है नहीं अदा करते, इन सभी दावा करने वालों के पास अगर अमल न हो तो उनके सच्चे होने में शक करना चाहिए। पुराने दौर में जंग में लोगों को क़ैद कर के बाज़ार में ग़ुलाम बना कर बेचा जाता था, एक आदमी ग़ुलाम ख़रीदने के लिए उस बाज़ार में गया, हर ग़ुलाम की क़ीमत उसके हुनर और उसकी कला के हिसाब से थी, जब उसने एक बहुत महंगा ग़ुलाम देख कर उसके महंगे होने का कारण पूछा, तब किसी ने बताया कि वह प्यासे इंसान को पहचान लेता। उसे उस ग़ुलाम को ख़रीदने में रूचि हुई, वह उसे ख़रीद कर अपने घर ले आया। एक दिन उसने अपने कुछ मित्रों को अपने घर खाने पर बुलाया, खाने के दस्तरख़ान पर खाना लगा दिया लेकिन पानी नहीं रखा, अभी खाना शुरू ही हुआ था अचानक एक मेहमान ने पानी मांगा, उस ग़ुलाम ने उसे देखा और कहा यह झूठ बोल रहा है, यह प्यासा नहीं है, थोड़े ही समय में और भी लोग प्यासे हो गए, हर एक पानी माँगने लगा लेकिन वह यही कहता कि झूठ बोल रहा है, तभी एक आदमी पानी लेने के लिए उठ खड़ा हुआ, उस ग़ुलाम ने कहा केवल यही आदमी सच कह रहा है क्योंकि यह शोर शराबा ना कर के अपनी जगह से पानी लेने के लिए उठ खड़ा हुआ। यही तो विचार करने की बात है कि जो भी अपने दावे में सच्चा है उसे शोर शराबे की जगह ख़ुद अमल पर ध्यान देना चाहिए, इसलिए जो भी अमल से दूर है वह मोमिन नहीं हो सकता।
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