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Code : 191002
Date of publication : 19/12/2017 19:11
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क़ारी मुस्तफ़ा इस्माईल की शानदार आवाज़

सच में बहुत ख़ूबसूरत आवाज़ और दिलचस्प तिलावत है, मुझे नहीं मालूम कि आप लोग कितना उनकी आवाज़ और उनकी तिलावत के अंदाज़ से परिचित हैं, विशेष कर उन्होने सूरए हूद, सूरए बक़रह और हज़रत दाऊद और जालूत के बारे मौजूद आयात की शानदार तिलावत की है।

विलायत पोर्टल : 
अल्लाह ने हमारी जनता को इतने कड़े इम्तेहानों के बाद हज़ारों नेमतें दीं, उन नेमतों में से एक यह कि आज हमारे यहां अल्-हम्दो लिल्लाह क़ुर्आनी माहौल है, मुझे याद है कि पहले रेडियो पर हम को क़ुर्आनी चैनल बहुत मुश्किलों ले ढ़ूंढ़े मिलता था, मिस्र रेडियो पर क़ुर्आन के चैनल को बड़ी मुश्किलों से लगा कर सुनते थे, हमारा एक दोस्त था (ख़ुदा उस पर रहमत नाज़िल करे) वह मिस्र जा चुका था, और वहां कुछ महीने रुका भी था, वह वहां से अबुल-फ़त्ताह, मुस्तफ़ा इस्माईल और मोहम्मद रफ़अत जैसे क़ारियों की कैसेट लाया था, मुझे अबुल-फ़त्ताह की तिलावत बहुत पसंद आती थी, मैं उसे सुनता था, फिर शैख़ मुस्तफ़ा इस्माईल की तिलावत सुनी, मुझे उनकी आवाज़ और तिलावत बहुत शानदार लगी, इसके बाद का मुझे याद नहीं रह गया। मुस्तफ़ा इस्माईल की आवाज़ बहुत शानदार और लाजवाब थी, और यह भी कहता चलूं कि आज ईरान में अधिकतर क़ारियों का झुकाव मुस्तफ़ा इस्माईल की ओर है, यानी हमारे क़ारी दूसरे क़ारियों से अधिक मुस्तफ़ा इस्माईल की तिलावत को सीखे हुए होते हैं, मेरा मानना है कि यह मुहिम मशहद से क्लासेज़ से शुरू हुई, क्योंकि उस समय तेहरान में कोई भी अब्दुल बासित के अलावा किसी दूसरे क़ारी के जानता तक नहीं था, मैं उस समय जब तेहरान आता था तो क़ारियों में अब्दुल बासित के अलावा किसी दूसरे क़ारी का नाम ही नहीं सुनता था, तेहरान के अलावा भी जहां जहां भी जाता था सभी केवल अब्दुल बासित को ही जानते थे, हमारे पास मशहद में मुस्तफ़ा इस्माईल की तिलावत मौजूद थी, मेरा एक दोस्त उस समय मिस्र के सफ़र पर जा रहा था, मैंने उस से कहा तुम जितनी भी कैसेट मुस्तफ़ा इस्माईल की वहां से ला सकते हो ले आना, वह गया और मुस्तफ़ा इस्माईल की बेहतरीन तिलावत की कुछ कैसेट मेरे लिए लाया, मैं ने उन कैसेट्स को मुर्तज़ा फ़ातमी जो उस समय हमारी कैसेट्स की कॉपी बनाते थे उनको उन कैसेट्स की कॉपी बनाने को दी, और फिर उन कैसेट्स को तेहरान से आए हुए कुछ लोगों द्वारा तेहरान भेज दी, जिसके बाद पूरे तेहरान में मुस्तफ़ा इस्माईल की कैसेट्स तेहरान में हर किसी के पास पहुंच गई, सच में बहुत ख़ूबसूरत आवाज़ और दिलचस्प तिलावत है, मुझे नहीं मालूम कि आप लोग कितना उनकी आवाज़ और उनकी तिलावत के अंदाज़ से परिचित हैं, विशेष कर उन्होने सूरए हूद, सूरए बक़रह और हज़रत दाऊद और जालूत के बारे मौजूद आयात की शानदार तिलावत की है।
(20 फ़रवरी 1991 में मिस्र के क़ारियों की ख़ुदा हाफ़िज़ी के समय आपका बयान)
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