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Date of publication : 28/1/2018 5:33
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दुनिया और आख़ेरत में वालेदैन के सम्मान का असर

पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि मैंने ख़्वाब में अपनी उम्मत में से एक शख़्स को देखा जिसकी रूह को निकालने के लिए मौत का फ़रिश्ता आया हुआ था लेकिन उसने वालेदैन के सम्मान और उनके साथ नेक बर्ताव के चलते उसे बिना रूह निकाले वापस कर दिया।

विलायत पोर्टल :  इंसान की अहम और महत्वपूर्ण अख़लाक़ी (नैतिक) ज़िम्मेदारी में से एक मां बाप का सम्मान और उनका एहतेराम है, दीनी तालीमात में भी इस बात पर बहुत ज़ोर दिया गया है, क़ुर्आन ने भी कई जगह अल्लाह की तौहीद के बाद वालेदैन के सम्मान पर ज़ोर दिया है, जिससे मां बाप के सम्मान की अहमियत बिल्कुल साफ़ हो जाती है। मां बाप के साथ नेकी करना और उनका सम्मान करना इंसान को ज़िंदगी की हर ऊंचाई तक पहुंचा सकता है और वह अपनी आख़ेरत संवार सकता है इसके विपरीत उनका अपमान और उनको तकलीफ़ पहुंचाने से इंसान ज़िंदगी में तो ठोकरें खाएगा ही और आख़ेरत में भी अज़ाब झेलेगा।
दुनिया में पड़ने वाले प्रभाव
1. गुनाह और संगदिल होने से दूरी
क़ुर्आन ने जिन चीज़ों पर काफ़ी ज़ोर दिया है उनमें से एक यह है कि वालेदैन के साथ नेकी करने से इंसान गुनाहों से दूर होता है और उसका दिल नर्म रहता है जिसे क़ुर्आन इस तरह बयान करता है, हम ने यह्या से आसमानी किताब को मज़बूती से लेने को कहा और हमने बचपन में उनको नबुव्वत दी, और हमने उन पर रहमत नाज़िल की उनको पाक रखा, वह परहेज़गार थे और हमने उनसे मां बाप के साथ नेकी करने को कहा और वह कठोर दिल नहीं थे। (सूरए मरयम, आयत 12-13-14) या इसी तरह हज़रत ईसा के बारे में क़ुर्आन में मिलता है कि (हज़रत ईसा कहते हैं) मुझसे जब तक ज़िंदा हूं नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने के लिए कहा गया है और (अल्लाह ने) मुझे मां के हक़ में नर्म दिल कहा है कठोर दिल नहीं कहा है। (सूरए मरयम, आयत 31-32)
2. उम्र का बढ़ना
जिस तरह हदीसों में रिश्तेदारों का ख़्याल रखने और उनसे अच्छे से पेश आने को उम्र के बढ़ने कारण बताया है उसी तरह वालेदैन के सम्मान और उन के साथ नेक बर्ताव करने को भी उम्र के बढ़ने की वजह बताया गया है। जैसाकि पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि जो भी लंबी उम्र और रोज़ी में बरकत चाहता है उसको मां बाप के साथ नेक बर्ताव और उनका सम्मान करना चाहिए। (पेदर, मादर शुमा रा दूस्त दारम, अब्दुल करीम पाक नया, पेज 213)
इसी तरह पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि मैंने ख़्वाब में अपनी उम्मत में से एक शख़्स को देखा जिसकी रूह को निकालने के लिए मौत का फ़रिश्ता आया हुआ था लेकिन उसने वालेदैन के सम्मान और उनके साथ नेक बर्ताव के चलते उसे बिना रूह निकाले वापस कर दिया।
3. रोज़ी में बरकत
इमाम सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि जो भी वालेदैन के साथ नेक बर्ताव करेगा वह ज़िंदगी में कभी फ़क़ीर नहीं हो सकता।
4. वालेदैन की दुआ का औलाद के हक़ में क़ुबूल होना
कुछ हदीसों में इस बात की तरफ़ इशारा किया गया है कि अगर औलाद वालेदैन के साथ नेक बर्ताव करती है और उनका सम्मान करती है तो अल्लाह वालेदैन की दुआ औलाद के हक़ में क़ुबूल करता है, जैसाकि इमाम सादिक़ अ.स. ने फ़रमाया अल्लाह तीन लोगों की दुआ को रद्द नहीं करता,
1- उस बाप की दुआ जो अपनी औलाद को उसके नेकी करते समय दुआ देता है.
2- उस बाप की दुआ जो अपनी औलाद को उसके अपमान के समय देता है.
3- उस मज़लूम की दुआ जो ज़ालिम के ख़िलाफ़ करता है। (बिहारुल अनवार, जिल्द 74)
5. उसके बच्चे उसका सम्मान करेंगे मां बाप के साथ नेक बर्ताव और उनके सम्मान का जो इस दुनिया में नतीजा है वह यह कि जो भी वालेदैन के साथ अच्छा बर्ताव करेगा उसके बच्चे उसके वालेदैन के साथ किए जाने वाले बर्ताव को देख कर उसके साथ भी वैसा ही बर्ताव करेंगे, क्योंकि बच्चों के लिए उसके वालेदैन आइडियल होते हैं वह जैसा अपने मां बाप को कुछ करते देखते हैं बिल्कुल उसी तरह वह भी करते हैं, अगर बच्चे देखें कि उनके मां बाप किस तरह अपने वालेदैन के सम्मान और उनके साथ नर्म रवैये से पेश आते हैं तो वह कभी अपने मां बाप का अपमान नहीं करेंगे और न ही कभी उनके साथ ग़लत रवैया अपनाएंगे, इमाम सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि अपने मां बाप के साथ नेक बर्ताव करो ताकि तुम्हारे बच्चे तुम्हारे साथ नेक बर्ताव करें। (पेदर, मादर शुमा रा दूस्त दारम, पेज 213)
आख़ेरत में पड़ने वाले प्रभाव
1. मौत का आसान होना
इमाम सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि जो भी यह चाहता है कि अल्लाह उसकी मौत के समय पेश आने वाली कठिनाइयों को दूर कर दे उसे अपने वालेदैन और क़रीबी रिश्तेदारों के साथ नेक बर्ताव करना चाहिए। (बिहारुल अनवार, जिल्द 71)
पैग़म्बर स.अ. एक जवान शख़्स की मौत से कुछ पहले उसके पास गए और उससे कलमा पढ़ने को कहा लेकिन वह जवान अपनी ज़बान से कलमा ही नहीं पढ़ सका, पैग़म्बर स.अ. ने वहां पर मौजूद लोगों से कहा कि क्या इस जवान की मां यहां है? उस जवान की मां जो कि वहीं मौजूद थी उसने कहा हां या रसूलल्लाह स.अ.। पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया क्या आप अपने बेटे से नाराज़ हैं? उसने जवाब दियां हां या रसूलल्लाह स.अ. मैं इससे नाराज़ हूं पिछले 6 सालों से इससे बात तक नहीं की है।
पैग़म्बर स.अ. ने उससे अपने बेटे को माफ़ करने को कहा, उसने कहा ठीक है आप कह रहे हैं तो मैं माफ़ किए देती हूं और अल्लाह से दुआ करती हूं कि वह भी माफ़ कर दे, इसके बाद पैग़म्बर स.अ. ने उस जवान से पूछा कि क्या तुझे कुछ दिखाई दे रहा है? उसने कहा एक बुरी शक्ल वाला बदबूदार इंसान है जो मेरा गला दबा रहा है, पैग़म्बर स.अ. ने उसे एक दुआ पढ़ने को कहा जिसका मतलब यह था, ऐ वह ख़ुदा जो थोड़े से अमल को क़ुबूल कर लेता है और बड़े बड़े गुनाहों को माफ़ कर देता है, मेरे थोड़े से अमल को क़ुबूल कर ले और मेरे गुनाह जो बहुत ज़्यादा हैं उन्हें माफ़ कर दे क्योंकि तू बहुत मेहरबान और रहम वाला है। उस ने उस दुआ को पढ़ा पैग़म्बर स.अ. ने पूछा अब किसे देख रहा है? उसने कहा अब एक ख़ूबसूरत फ़रिश्ता है जिसके कपड़ों से बेहतरीन ख़ुशबू आ रही है और वह मुझ से बहुत नर्म तरीक़े से बात कर रहा है। (येक सद मौज़ू पांसद दास्तान, जिल्द 1, पेज 138)
2. बे हिसाब सवाब
इमाम सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि आख़िर कौन सी चीज़ इंसान को अपने ज़िंदा या मुर्दा वालेदैन के साथ नेकी करने से रोकती है..... यानी औलाद को वालेदैन की तरफ़ से नमाज़, सदक़ा, हज वग़ैरह अंजाम देना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उसके वालेदैन और उसको दोनों को सवाब मिलेगा, कुछ हदीसों में मिलने वाले सवाब को भी बताया गया है जैसे पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया जो भी शख़्स मोहब्बत के साथ वालेदैन को केवल देख ले अल्लाह उसे हर बार देखने के बदले 1 ऐसे हज का सवाब देगा जो उसकी बारगाह में क़ुबूल किए जाने के क़ाबिल होगा, किसी ने पूछा अगर कोई एक दिन में 100 बार देखे? आपने फ़रमाया कि अल्लाह इससे भी कहीं ज़्यादा देने वाला है। (गुनाहाने कबीरा, जिल्द 1, पेज 131)
3. मग़फ़ेरत
इमाम सज्जाद अ.स. बयान करते हैं कि एक शख़्स पैग़म्बर स.अ. के आया और कहने लगा या रसूलल्लाह स.अ. मैंने हर गुनाह किया है लेकिन अब मैं शर्मिंदा हूं तौबा करना चाहता हूं क्या मेरी तौबा क़ुबूल हो सकती है? पैग़म्बर स.अ. ने फ़रमाया तुम्हारे मां बाप में से कोई ज़िंदा है? उसने कहा केवल मेरे वालिद ज़िंदा हैं, पैग़म्बर स.अ. ने कहा जाओ उनके साथ अच्छा बर्ताव करो उनकी ख़िदमत करो माफ़ कर दिए जाओगे, वह जाने लगा पैग़म्बर स.अ. ने कहा काश तुम्हारी मां ज़िंदा होती, यानी अगर मां ज़िंदा होती तो उनकी ख़िदमत कर के जल्दी मगफ़ेरत हासिल कर सकते थे। (गुनाहाने कबीरा, जिल्द 1, पेज 131)
4. जन्नत में जाना
पैग़म्बर स.अ. इस बारे में फ़रमाते हैं कि 4 चीज़ें जिस किसी में पाई गईं उस पर अल्लाह का ख़ास एहसान होगा और वह जन्नत में जाएगा।
- अच्छा अख़लाक़
- रवादारी
- वालेदैन के साथ नेक बर्ताव
- मातहत लोगों के साथ नर्मी से पेश आना
इसी तरह इब्राहीम इब्ने शोऐब का बयान है कि मैंने इमाम सादिक़ अ.स. से कहा मेरे वालिद इतने बीमार रहते हैं कि उनके सारे काम मैं ख़ुद अपने हाथों से अंजाम देता हूं, कहीं जाना होता है तो उन्हें अपने कंधे पर ले जाता हूं, इमाम अ.स. ने फ़रमाया जब तक कर सकते हो ऐसे ही करते रहो उनको अपने हाथों से खाना खिलाओ क्योंकि यही अमल तुम को जहन्नम से बचा कर जन्नत ले जाएगा। (बिहारुल अनवार, जिल्द 71)
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