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Code : 192228
Date of publication : 24/2/2018 16:2
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कई दिनों तक गेहूं की रोटी नहीं मिलती थी..

जंग ईरान में नहीं हो रही थी फिर भी जंग के प्रभाव ईरान के अंदर दिख रहे थे, कई कई दिनों तक.......
विलायत पोर्टल :  आज से कई साल पहले मैंने एक T.V. इंटरव्यू में कहा था कि, दूसरे विश्व युध्द के समय जबकि मैं बहुत छोटा था लेकिन मुझे याद है कि जंग ईरान में नहीं हो रही थी फिर भी जंग के प्रभाव ईरान के अंदर दिख रहे थे, कई कई दिनों तक गेहूं की रोटी देखने को नहीं मिल रही थी, हम सब घरों में जौ की रोटी खा रहे थे, लोगों के खाने के लिए गेहूं की रोटी नहीं थी, लोग बहुत ही सख़्त हालात से गुज़र रहे थे, यहां तक शकर भी ढ़ूंढ़े नहीं मिल रही थी कि लोग चाय पी सकें।
(2 मई 1990 को टीचर डे पर आयतुल्लाह ख़ामेनई का बयान)
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