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Date of publication : 8/3/2018 16:35
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हज़रत ज़हरा स.अ. और शौहर की इताअत

हज़रत ज़हरा स.अ. पर जो ज़ुल्म इन लोगों ने ढ़हाए उस से आप किस हद तक नाराज़ थीं यह बात हम सभी जानते हैं और आपकी नाराज़गी ही थी जिसके चलते आप इन लोगों के घर आने को बार बार मना कर देती थीं, लेकिन यह शौहर की इताअत थी कि शौहर ने केवल आपकी मर्ज़ी पूछी थी लेकिन आपने ऐसा जवाब दिया जिस से साफ़ ज़ाहिर है कि आप शौहर की इताअत को अपनी नाराज़गी से ज़्यादा अहमियत देती थीं, और यह आज के दौर की सभी औरतों के लिए सबक़ है।

विलायत पोर्टल : सक़ीफ़ा के हंगामे और हज़रत ज़हरा स.अ. को शारीरिक और मानसिक तकलीफ़ देने के बाद उन सभी लोगों ने जो सक़ीफ़ा में मौजूद थे उन्होंने उम्मत की नाराज़गी ख़ास कर आपकी नाराज़गी को दूर करने के लिए रास्ता तलाश करना शुरू कर दिया, एक दिन आपके पास हाज़िर हो कर अपनी ग़लतियों की माफ़ी मांगने की अनुमति मांगी लेकिन आपने अपनी नाराज़गी बाक़ी रखते हुए किसी भी तरह की बातचीत से मना कर दिया।
एक दिन इमाम अली अ.स. घर में आए और इतने ज़ुल्म बर्दाश्त करने वाली अपनी बीवी हज़रत ज़हरा स.अ. से कहा ऐ ज़हरा स.अ. अबू बक्र और उमर दरवाज़े पर खड़े हैं और अंदर आने की अनुमति चाहते हैं क्या आपकी ओर से अनुमति है? हज़रत ज़हरा स.अ. जो इन आने वालों से सख़्त नाराज़ थीं लेकिन इमाम अली अ.स. की ज़बान से यह सुन कर फ़रमाया ऐ अबुल हसन अ.स. यह घर आपका, और मैं भी आपकी, इसलिए जैसा आप बेहतर समझें। (एख़तेसास, शैख़ मुफ़ीद, पेज 181)
हज़रत ज़हरा स.अ. पर जो ज़ुल्म इन लोगों ने ढ़हाए उस से आप किस हद तक नाराज़ थीं यह बात हम सभी जानते हैं और आपकी नाराज़गी ही थी जिसके चलते आप इन लोगों के घर आने को बार बार मना कर देती थीं, लेकिन यह शौहर की इताअत थी कि शौहर ने केवल आपकी मर्ज़ी पूछी थी लेकिन आपने ऐसा जवाब दिया जिस से साफ़ ज़ाहिर है कि आप शौहर की इताअत को अपनी नाराज़गी से ज़्यादा अहमियत देती थीं, और यह आज के दौर की सभी औरतों के लिए सबक़ है।
वर्ना पस्लियों का टूटना, पेट में बच्चे का मर जाना, सीने में कील का गड़ना और बाज़ू और चेहरे पर नीले निशान यह सब आपकी मज़लूमी की दलील हैं, लेकिन हज़रत ज़हरा स.अ. से जैसे ही इमाम अली अ.स. ने कहा कि यह लोग दरवाज़े पर खड़े हैं आपकी अनुमति का इंतेज़ार कर रहे हैं, इमाम अली अ.स. वक़्त के इमाम थे अगर चाहते आ कर यही कह देते आपसे कि यह लोग आएं हैं आप पर्दे का बंदोबस्त कर लीजिए, लेकिन आपका आ कर पूछना दुनिया के सभी शौहर के लिए सबक़ है कि आप शौहर हैं आपकी इताअत बीवी पर वाजिब है लेकिन जिस तरह इमाम अली अ.स. जानते थे कि हज़रत ज़हरा स.अ. पर कैसे कैसे दुखों के पहाड़ तोड़े गए हैं इसलिए आपने अपनी बात का अंदाज़ बदल कर बताया कि तुम्हारी बीवी ही सही, उस पर तुम्हारी इताअत वाजिब ही सही लेकिन हर बात को इस्लामी तहज़ीब और इस्लामी अख़लाक़ के साथ पेश करना ज़रूरी है, और इसी तरह दुनिया की सभी औरतों के लिए सबक़ है कि ठीक है आप बीवी हैं आप जिनसे नाराज़ हैं शौहर का उनको घर बुलाना या उनसे मिलना आपको पसंद नहीं है लेकिन अगर शौहर ने घर बुला लिया तो अब आपकी ज़िम्मेदारी है कि शौहर की इताअत करते हुए उसे क़ुबूल करें।
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