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Code : 192519
Date of publication : 10/3/2018 5:23
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मैं अपने समय को बर्बाद नहीं करता था।

मैंने ख़ुद कई बड़ी बड़ी किताबें बस में सफ़र करते हुए ख़त्म की हैं, हालांकि मैंने यह सभी किताबें इंक़ेलाब से पहले पढ़ी हैं, क्योंकि उस समय कुछ कामों से मशहद से क़ुम आया करता था यह समय जो किताब पढ़ने में बीतता था बिल्कुल भी नहीं लगता था कि बर्बाद हो रहा है, उस समय कम से कम दूरी के सफ़र में भी 1 घंटा लग जाता था,

विलायत पोर्टल :  जहां जहां पर भी समय की बर्बादी लगे जैसे बस या टैक्सी के सफ़र के दौरान या अपनी गाड़ी में बैठे हैं कोई दूसरा गाड़ी चला रहा हो या डॉक्टर के क्लीनिक पर अपना नंबर आने की प्रतीक्षा कर रहे हों या कोई भी और दूसरी जगह जहां समय ख़ाली जाता हो वहां किताब पढ़िए अपने बैग या अपनी जेब में किताब रखे रहें जैसे ही बस में बैठिये किताब निकाल कर पढ़िए, जब अपनी मंज़िल पर पहुंच जाएं एक निशानी उस पेज पर रख दीजिए फिर जब अगली बार ऐसा मौक़ा आए फिर जहां निशानी रखी थी वहीं से पढ़िए।
मैंने ख़ुद कई बड़ी बड़ी किताबें बस में सफ़र करते हुए ख़त्म की हैं, हालांकि मैंने यह सभी किताबें इंक़ेलाब से पहले पढ़ी हैं, क्योंकि उस समय कुछ कामों से मशहद से क़ुम आया करता था, कुछ वजहों से मैं उस किताब का नाम नहीं ले सकता, उन दिनों बसों का माहौल हम लोगों को बहुत तकलीफ़ देता था, बर्दाश्त भी नहीं होता था, ऐसी परिस्तिथि में बस सर झुका कर केवल किताब का पढ़ना ही सबसे उचित था, यह समय जो किताब पढ़ने में बीतता था बिल्कुल भी नहीं लगता था कि बर्बाद हो रहा है, उस समय कम से कम दूरी के सफ़र में भी 1 घंटा लग जाता था, लेकिन मुझे कभी भी महसूस नहीं हुआ कि मेरा समय बर्बाद हुआ हो।
(11 मई 1996 को अंतर्राष्ट्रीय किताब मेले में प्रेस कांफ़्रेंस में आयतुल्लाह ख़ामेनई का बयान)
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