Thursday - 2018 May 24
Languages
Delicious facebook RSS दोस्तों को भेजें। प्रिंट सेव करें। XML TEXT PDF
Code : 192584
Date of publication : 13/3/2018 5:24
Hit : 147

नव्वाब सफ़वी और उनके साथियों की शहादत....

यह लोग पाक, मोमिन और जांबाज़ जवान ऐसे थे जिन्होंने दुनिया से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था, यह और बात है कि कुछ लोगों को इनका रवैया समझ में नहीं आया कुछ लोगों ने इन जांबाज़ों का समर्थन किया

विलायत पोर्टल : जिस समय इस पाक, मोमिन और जांबाज़ जवान की शहादत की ख़बर मशहद पहुंची, उस समय जो मंज़र मशहद के मदरसों में था उसे आज भी नहीं भुला पाया हूं, उस की वजह यह थी कि, शहीद नव्वाब सफ़वी अपनी शहादत से 1 या 2 साल पहले मशहद आए थे और उसी मदरसे जो आज उन्हीं के नाम से है उसमें तक़रीर की थी और नमाज़ पढ़ाई थी, जिसके बाद से लोगों में उनके जोश और जज़्बे को लेकर अजीब उत्साह पैदा हो गया था, जिसको उनकी शहादत की ख़बर आने के समय देखा जा सकता था। उस समय समाज इनके विद्रोह को नहीं समझ सका था, बहुत सारे लोग इन जांबाज़ जवानों को केवल एक शूटर जैसा समझ रहे थे कि जिनका काम केवल सामने वाले के सीने में गोली मारना था, जबकि ऐसी सोंच रखने वाले मक्कार और बदमाश लोग हैं जो ज़िक्र के भी क़ाबिल नहीं हैं, जबकि यह लोग पाक, मोमिन और जांबाज़ जवान ऐसे थे जिन्होंने दुनिया से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था, यह और बात है कि कुछ लोगों को इनका रवैया समझ में नहीं आया कुछ लोगों ने इन जांबाज़ों का समर्थन किया और कुछ लोग बिल्कुल इस विषय पर ध्यान ही नहीं देते। इस्लाम के लिए जान फ़िदा कर देने वालों पर उस समय सही तरीके से ध्यान नहीं दिया गया, हालांकि लोग उस समय इस बात के लिए तैयार भी नहीं थे कि जो उनकी ज़बान और दिल में है उसे अंजाम दें और इस काम के लिए एक लंबी योजना की ज़रूरत थी, इसीलिए उन की ज़ुल्म और अत्याचार के विरुध्द फ़रियादें दुश्मन के हंगामें और चीख़ पुकार में खो गई, यह ऐसे लोग थे जो सच में जांबाज़ थे, (फिर आप ने आयत का एक हिस्सा पढ़ा) यह लोग बहादुर जांबाज़ थे जो अल्लाह पर ईमान लाए और ख़ुलूस के साथ इस्लामी अहकाम को बढ़ावा देने और अत्याचार और हिंसा के विरुध्द प्रतिरोध किया। (17 जनवरी 1997 में जुमे के ख़ुतबे में आयतुल्लाह ख़ामेनई बयान)
 .....................


आपका कमेंट



मेरा कमेंट शो न किया जाये
Security Code :