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Date of publication : 19/11/2018 18:26
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शौहर क्या करे कि घर जन्नत की मिसाल हो

हमें भी पैग़म्बर स.अ. की सीरत पर अमल करते हुए सार्वजनिक बात कहनी चाहिए, जैसे यह कि देखो बहुत सी औरतों में यह बुरी आदत होती है कि वह इधर की बात उधर लगाती हैं और यह बेहद ग़लत बात है, मुझे ऐसा करने वालों से बहुत चिढ़ होती है ज़रा तुम ध्यान रखना...... एक और अहम बात कि कभी दूसरों के सामने बीवी, मां या बहनों को मत समझाएं (अपमान तो बहुत दूर की बात है), बल्कि अकेले में समझाते हुए मोहब्बत और अपनाईयत का एहसास भी कराएं।

विलायत पोर्टल :  पिछले एक आर्टिकल में एक घर के माहौल को ख़ूबसूरत बनाने या यूं कहा जाए कि अपने घर का जन्नत जैसा माहौल बनाने के लिए क्या करना चाहिए उसमें बीवी की ज़िम्मेदारियों को बयान किया गया, इस आर्टिकल में बयान किया जाएगा कि शौहर को क्या करना चाहिए जिससे घर का माहौल बेहतर और वातावरण शांत बना रहे ।
बीवी, मां और बहनों की एक दूसरे के ख़िलाफ़ कही जाने वाली बातों पर कान मत धरें
शौहर अपनी बीवी की शिकायत पर मां, बहन और छोटे भाईयों को कुछ ना कहे और इसी तरह मां और बहनों की शिकायत पर अपनी बीवी को कुछ मत कहें । अल्लाह का वास्ता बीवी की शिकायत सुन कर कभी अपनी मां को कुछ मत कहिएगा, मां की एक एक आह निकलने से दुनिया और आख़ेरत दोनों बर्बाद होने का ख़तरा है, अगर अल्लाह न करे मां की ग़लती ही क्यों न सामने आ जाए फिर भी बहुत एहतेराम और सम्मान से उन्हें समझाएं या अपनी बहन द्वारा मां तक बात की सच्चाई को पहुंचाएं, बीवी द्वारा मां के लिए गिफ़्ट भिजवाएं, हदीस में भी है कि तोहफ़े लिया दिया करो इससे मोहब्बत बढ़ेगी।
आपके सामने बीवी की कितनी ही बड़ी ग़लती क्यों न बयान की जाए, या घर का कोई मेंबर मां, बहन, भाभी वग़ैरह कोई शिकायत करें तो उस समय आप किसी तरह को कोई क़दम न उठाएं, उस समय बीवी से कुछ न कहें, कम से कम इतना सब्र कर लें कि दो नमाज़ों का समय गुज़र जाए, यानी अगर ज़ोहरैन के समय कोई बात सुनने में आती है तो मग़रेबैन की नमाज़ के बाद समझाएं और अगर मग़रिब के समय कोई बान सुनने में आई तो सुबह की नमाज़ के बाद समझाएं।
कहने का मतलब यह है कि मर्द को भावनाओं में बहने के बजाए अक़्ल का इस्तेमाल करने की ज़रूरत होती है, क्योंकि एक तरफ़ मां है जिसके सम्मान करने का हुक्म दिया गया है दूसरी तरफ़ बीवी है जो हर सुख दुख की साथी है उसकी इज़्ज़त का ख़्याल भी ज़रूरी है, इसलिए आप को शिकवे शिकायत की सूरत में बेहद सूझबूझ से काम लेने की ज़रूरत है। और जब समझाएं तो ध्यान रहे कभी नाम लेकर मत कहें कि मां ऐसा कह रही थीं या बहन ने तुम्हारी यह शिकायत की है, बल्कि पैग़म्बर स.अ. की सीरत हमारे सामने है कि जब भी वह किसी के अमल से नाख़ुश होते थे तो आप बिना नाम लिए कहते थे कि पता नहीं लोगों को क्या हो गया है इस इस तरह का अमल करने लगे हैं जो कि सही नहीं है.....।
हमें भी पैग़म्बर स.अ. की सीरत पर अमल करते हुए सार्वजनिक बात कहनी चाहिए, जैसे यह कि देखो बहुत सी औरतों में यह बुरी आदत होती है कि वह इधर की बात उधर लगाती हैं और यह बेहद ग़लत बात है, मुझे ऐसा करने वालों से बहुत चिढ़ होती है ज़रा तुम ध्यान रखना......।
एक और अहम बात कि कभी दूसरों के सामने बीवी, मां या बहनों को मत समझाएं (अपमान तो बहुत दूर की बात है), बल्कि अकेले में समझाते हुए मोहब्बत और अपनाईयत का एहसास भी कराएं।
बीवी के सिलसिले में अपने स्टैंडर्ट को नीचे लाएं
शौहर की अधिकतर सोंच यह होती है कि बीवी उसके मेयार और कसौटी पर पूरी नहीं उतरी, तो ध्यान रखिए क़ुसूर उसका नहीं बल्कि आपके ऊंची कसौटी और मेयार का है और उसका इलाज यह है कि आप अपनी कसौटी और स्टैंडर्ट को नीचे लाएं, आप जब घर आते हैं तो सोंचते हैं कि उसने आपका क़ायदे से इस्तेक़बाल नहीं किया, क्या आपको एहसास है कि वह बेचारी घर गृहस्थी के कामों में कितना बिज़ी रही?
आप ज़रा एक दिन घर का पूरा चार्ज संभाल कर देखिए तो आपको मालूम हो जाएगा कि वह आपके सारे काम मशीन की तरह अंजाम देती है, आपको खाना पकाने के लिए किसी बावर्ची, घर की सफ़ाई के लिए एक नौकर, कपड़े धाने के लिए एक लांडरी, बच्चों की देखभाल के लिए नौकरानी और घर की देख रेख करने के लिए एक चौकीदार का बंदोबस्त करना पड़ेगा। नौकरों की पूरी फ़ौज के बावजूद घर का ऐसा सिस्टम नहीं चलेगा जैसा यह मशीन चला रही है, लेकिन आपके दिमाग़ के स्टैंडर्ट की वजह से उसकी मेहनत और ख़िदमत की कोई क़ीमत नहीं है।
सालों साल गुज़रने के बावजूद आपने अपने ख़ुद के बनाए हुए स्टैंडर्ट से नीचे उतर कर बीवी के छिपे हुए वह कमाल और फ़ज़ीलतें जिन्हें अल्लाह ने शर्म और हया की चादर से ढ़ांप रखा है कभी झांका ही नहीं, आप आसमान से ज़मीन पर उतरें तो सही तब समझ में आएगा इस ज़मीनी मख़लूक़ में क्या जलवे अल्लाह ने छिपा कर रखे हैं।
गुड़ न दें गुड़ जैसी बात तो करें
शौहर इस आसान नुस्ख़ें को अपना कर तो देखे, इंशा अल्लाह उसकी सारी घरेलू परेशानियां दूर हो जाएंगी, बीवी उससे दिली मोहब्बत करने लगेगी, बच्चे भी आपके लहजे और मीठी ज़ुबान से प्रेरित हो कर घर के बाहर भी यही ज़ुबान इस्तेमाल करेंगे, मामला चाहे कितना गंभीर हो लेकिन कोशिश करें कि आपका लहजा और बात करने का अंदाज़ नर्म हो।
कभी कभी बड़े से बड़ा अदब लगाना काम नहीं करता जितना मीठे बोल काम कर जाते हैं, आज ही से शौहर अपना रवैया नर्म बना ले, अपनी ज़ुबान मीठी कर ले, धीरे धीरे दोस्तों, उठने बैठने वालों, बीवी और घर वालों से कह दे कि अगर मेरा लहजा सख़्त या तकलीफ़ देने वाला हो तो मुझे बाद में बता देना और उनके बताने के बाद उन कमियों को सही करने की कोशिश करे।
ज़्यादातर बीवी के कामों की तारीफ़ करें
सच पूछिए तो काम के ज़्यादा होने से बीवी इतना नहीं थकती जितना हौसला टूटने से थकती है, उसका सारा जोश और जज़्बा ठंडा पड़ जाता है, उसको अपनी ज़िंदगी बेकार, बे क़ीमत और कोल्हू के बैल की तरह लगने लगती है। जिसके दिल में ही यह एहसास हो कि बीवी खाना पकाने की जो ख़िदमत अंजाम दे रही है यह उसकी शरई ज़िम्मेदारी नहीं है तो वह उसके खाना पकाने और घरदारी की तारीफ़ करेगा, उसकी हिम्मत और बढ़ाएगा।
लेकिन जो शख़्स अपनी बीवी को नौकरानी समझता हो कि उसको तो यह काम ज़रूर अंजाम देना है, खाना पकाना तो उसका काम ही है, अगर अच्छा खाना पका रही है तो यह तो उसकी ड्यूटी है उसकी तारीफ़ करने की क्या ज़रूरत है......
तो ऐसा शख़्स कभी अपनी बीवी की तारीफ़ नहीं करेगा, और छोटी सी छोटी ग़लती पर जैसे नमक के ज़्यादा होने या शकर के कम होने पर घर में बदतमीज़ी का तूफ़ान खड़ा कर देगा, जिसका नतीजा यह होगा कि घर में लड़ाई झगड़ा होगा और ज़िंदगी जहन्नम की मिसाल बन जाएगा। याद रखिए यह इंसान की फ़ितरत है कि उसकी अच्छे कामों पर हौसला बढ़ाया जाए और हौसला बढ़ाने की ख़्वाहिश तभी जागती है जब हद से ज़्यादा हौसलों को तोड़ा गया हो, यह एक तरह का ज़ुल्म है क्योंकि जिस काम की तारीफ़ नहीं की जाती और उसको शाबाश नहीं कहा जाता, एक शुक्रिया का शब्द नहीं बोला जाता साथ ही उसके दिल को दुखाया जाता है, जिसके नतीजे में वह अधिकतर हिम्मत छोड़ देती है और उसकी कैपॉबिलिटीज़ ख़त्म हो जाती हैं। आज ही से अपनी तरीक़ा बनाईए कि छोटे छोटे कामों पर भी जैसे चाय बनाने पर, पानी का एक ग्लास देने पर ज़ुबान के साथ साथ दिल से शुक्रिया अदा करें, फिर देखिए बीवी कैसे आपकी क़द्र करती है और घर जन्नत की मिसाल बनता दिखाई देगा।
बीवी को दोस्त समझें नौकर नहीं
शौहर इस बात को ध्यान में रखे कि बीवी जैसा कोई वफ़ादार दोस्त नहीं हो सकता, आप ख़ुद ग़ौर करें कि आप अपने दोस्त पर क्या वैसी धौंस जमा सकते हैं जैसी नौकर पर जमाते हैं... कभी नहीं,
अगर ऐसा कर भी दिया तो सारे दोस्त आपको छोड़ कर अलग हो जाएंगे, दोस्तों के साथ नौकरों जैसा बर्ताव कोई भी अक़्लमंद इंसान नहीं कर सकता। हैरत है उन लोगों पर जो अपनी बीवी के साथ ऐसा बर्ताव करना चाहते हैं जिससे अच्छा कोई दोस्त नहीं हो सकता, क्योंकि यह बात कई बार देखी जा चुकी है कि ज़िंदगी में कभी कभी ऐसा मोड़ आता है जहां सारे दोस्त यहां तक रिश्तेदार साथ छोड़ कर चले जाते हैं और उस समय पर भी अगर कोई आपके साथ खड़ा रहता है तो वह आपकी बीवी होती है। इसी तरह बीमारी में जैसा आराम बीवी से पहुंचता है किसी दोस्त से क्या कभी कभी तो औलाद से भी नहीं पहुंचता, इसलिए बीवी पर धौंस जमाना सही नहीं है, आप अपनी बीवी से दोस्तों जैसा सुलूक रख कर देखिए कुछ ही समय में आपको अपने घर का माहौल जन्नत जैसा महसूस होने लगेगा।
बीवी की ख़िदमत को महसूस करें
आपने ख़ुद भी देखा होगा कि अगर औरत बीमार पड़ी हो, उठने की भी ताक़त न हो और उस हालत में शौहर भी बीमार पड़ जाए तो औरत अपनी बीमारी भूल जाती है, अपना आराम अपना सुकून अपनी बीमारी सब कुछ भूल कर शौहर की तीमारदारी में लग जाती है।
यह तो आप ख़ुद ही घरों में देखते होंगे कि औरतें ख़ुद खाना सबसे आख़िर में खाती हैं, पहले मर्दों को खिलाती हैं और अगर कोई मेहमान आ जाए तो अपने हिस्से का खाना मेहमान के लिए भेज देंगी, अगर आधी रात में शौहर कहीं सफ़र से वापस आए तो यह वफ़ादार बीवी अपना आराम और अपनी नींद क़ुर्बान कर के उसकी ख़िदमत में लग जाएगी।
अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखिए
आज ही फ़ैसला करें कि मैं दफ़्तर, दुकान, कारोबार और बाहर की ज़िंदगी के मामले घर के बाहर ही छोड़ कर आऊंगा, अगर कभी किसी बात पर ग़ुस्सा आ भी जाए तो तुरंत ख़ामोश हो जाएं, पैग़म्बर स.अ. फ़रमाते हैं कि जब तुम में से किसी को ग़ुस्सा आ जाए तो वह तुरंत ख़ामोश हो जाए या वहां से उठ कर किसी और जगह चला जाए। ग़ुस्से पर क़ाबू करने का एक इलाज यह भी है कि काग़ज़ लिखे कि अल्लाह तुझ पर इससे ज़्यादा क़ुदरत रखता है जितना तू अपनी बीवी और बच्चों पर रखता है और इसे ऐसी जगह लगा दे जहां बार बार उसकी निगाह पड़ती हो। क्योंकि आदमी को ग़ुस्सा उसी पर आता है जिसको अपने से कमज़ोर पाता है, अगर दूसरा ताक़तवर हो तो जल्दी ग़ुस्सा नहीं आता, इसलिए जब भी उस पर निगाह पड़ेगी तो दिल और दिमाग़ में अल्लाह की ताक़त और क़ुदरत आ जाएगी और ग़ुस्सा दूर हो जाएगा।
याद रखिए कि अगर शौहर और बीवी में यह तू तू मैं मैं और बक बक ख़त्म हो जाए तो यह घर के मासूम बच्चों पर बहुत बड़ा रहम होगा, वरना लड़ाई झगड़े के माहौल में घुट घुट कर पलने वाले बच्चे सहमे सहमे रहते हैं और आत्मविश्वास खो बैठते हैं।
जिस मासूम के दिमाग़ में हर समय बाप का तमांचा, मां के बहते आंसू का ख़्याल रहता हो, जिसके कानों में दादी और फ़ुफ़ी के झिड़कने की और किचेन में मां के सिसकने की आवाज़ गूंजती रहे तो उस बच्चे से अल्लाह की दी हुई क़ाबिलियत जिनसे वह इस दुनिया में न जाने कितने बड़े बड़े काम कर के मां बाप का नाम रौशन करता वह सब ख़त्म हो जाती है।
बीवी की इज़्ज़त करें लेकिन मुरीद मत बनें
यह जो बार बार शौहर के लिए नर्म रवैया अपनाने, औरत का हौसला बढ़ाने और उसकी ग़ैर मुनासिब बातों को भी बर्दाश्त करने की गुज़ारिश की जा रही है इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बीवी आप पर हाकिम है, वह आपको डांट और झिड़क सकती है लेकिन आप कुछ नहीं कह सकते, बल्कि आपकी हैसियत घर के मालिक और लीडर जैसी है इसलिए औरत के ग़ुलाम और मुरीद बन कर रहने को नहीं कहा जा रहा है।
क्योंकि आपकी ढ़ील, सुस्ती और जी हुज़ूरी की वजह से घर का सिस्टम चौपट हो सकता है, बच्चे कहीं के कहीं निकल सकते हैं, और आपकी हर समय की जी हुज़ूरी वाले रवैये को देख कर बेटियां अपने शौहरों से यही उम्मीद लगा लेंगी और उम्मीद के मुताबिक़ न मिलने पर घर भी बर्बाद हो सकते हैं जिसके ज़िम्मेदार आप होंगे। ध्यान रहे कि घर फ़िक़्ही क़ानून से नहीं बल्कि मोहब्बत से चलते हैं
दीनदार शौहर घर में हर समय फ़िक़्ही क़ानून न चलाएं क्योंकि घर आपसी मोहब्बत से चलते हैं क़ानून से नहीं, मिसाल के तौर पर अगर आप बीवी से कहें कि तुम अपने वालेदैन या किसी रिश्तेदार से मिलने नहीं जाओगी क्योंकि मेरी इजाज़त नहीं है और मेरी इजाज़त के बिना घर से बाहर क़दम रखना हराम है। क़ानून के सही होने में शक नहीं लेकिन यह क़ानून का ग़लत इस्तेमाल है, आयतुल्लाह हुसैन मज़ाहिरी अपनी एक किताब में एक मुज्तहिद का क़ौल नक़्ल करते हैं कि कुछ आदिल शिम्र से भी बदतर हैं।
क़ानून का ऐसा ग़लत इस्तेमाल ज़्यादातर दीनी और मज़हबी घरानों में पाया जाता है, जैसे कोई लड़की थोड़ा सा पढ़ लिख कर बड़े घमंड से कहती है मैं घर का काम नहीं करूंगी क्योंकि घर का काम मुझ पर वाजिब नहीं है, यह एक फ़िक़्ही क़ानून का ग़लत इस्तेमाल है, उन मुज्तहिद के क़ौल की रौशनी में यह लड़की आदिल है लेकिन शिम्र से बदतर है, क्योंकि यह आज नहीं तो कल इस घर को बर्बाद कर देगी। हालांकि आप मोमिन हैं लेकिन सख़्ती करते हैं, अम्र बिल मारूफ़ और नहि अनिल मुंकर में ज़रूरत से ज़्यादा सख़्त हैं तो आपकी यह सख़्ती और ज़रूरत से ज़्यादा रोक टोक एक दिन आपकी पाकीज़ा बीवी या आपकी नेक सीरत बेटी को ज़िद्दी और ख़राब कर देगी।
बीवी से अच्छा सुलूक करना और उसे हमेशा ख़ुश रखना
अगर आप किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री या किसी अमीर शख़्स के दामाद बनें और वह आपसे यह कहे कि देखो मेरी बेटी से अच्छा सुलूक करना और उसे हमेशा ख़ुश रखना, तो आप कैसे पूरे वुजूद से उसको ख़ुश रखने की कोशिश करेंगे और उसकी बुरी लगने वाली बातों को भी हंस कर सहन करेंगे, तो जब एक राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की बातों का इतना ख़्याल है तो अगर इस पूरी दुनिया का मालिक आपसे कहे कि बीवीयों से अच्छा सुलूक करो (सूरए निसा आयत 19) तो अब आपका रवैया अपनी बीवी के लिए कैसा होना चाहिए......।
अफ़सोस एक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री या उस अमीर बाप की हिदायत की इतनी परवाह और उसके हुक्म की इतनी अहमियत कि उसकी कड़वी बातों और डांट को भी झेल लेता है लेकिन अल्लाह की हिदायत और हुक्म की इतनी भी अहमियत नहीं जिनती एक फ़ासिक़ और फ़ाजिर बंदे की हो....
अफ़सोस.....
अगर आप अल्लाह की इस हिदायत को याद रखेंगे तो याद रखिए घर में कभी लड़ाई झगड़े का माहौल नहीं पैदा होगा और परिवार ख़ुशहाल ज़िंदगी गुज़ारेगा।
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