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Date of publication : 23/12/2018 16:49
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नेक अख़लाक़ अहादीस की रौशनी में

पैग़म्बर स.अ. के ख़ादिम अनस से रिवायत है कि मैंने पैग़म्बर स.अ. की नौ साल तक ख़िदमत की, लेकिन इन नौ सालों में पैग़म्बर स.अ. ने एक बार भी मुझ से यह तक नहीं कहा कि तुम ने यह क्यों किया या तुम ने ऐसा क्यों किया...., मेरे किसी काम में कमी नहीं निकाली, मैंने इन नौ सालों में पैग़म्बर स.अ. के बदन की ख़ुशबू से बेहतर किसी ख़ुशबू को महसूस नहीं किया,

विलायत पोर्टल :  पैग़म्बर स.अ. और मासूमीन अ.स. नेक अख़लाक़ की बेहतरीन मिसाल हैं, और यह उनका बे मिसाल अख़लाक़ उनके किरदार और उनकी बातों से ज़ाहिर था, इन्हीं अज़ीम हस्तियों के बयान की रौशनी में हम अख़लाक़ के बुलंद मर्तबे तक पहुंच सकते हैं, जैसाकि हम यहां पर उनकी हदीसों से कुछ मिसालें पेश कर रहे हैं ताकि वह हमारी ज़िंदगी के लिए मिसाल बन सके।
पैग़म्बर स.अ. ने असहाब से फ़रमाया, क्या मैं तुम्हें बताऊं कि तुम में से कौन मुझ से ज़्यादा क़रीब है? असहाब ने कहा ऐ अल्लाह के रसूल ज़रूर बताईए तो आपने फ़रमाया जिसका अख़लाक़ बहुत अच्छा हो। (तर्जुमा उसूले काफ़ी, जिल्द 2, पेज 84, तोहफ़ुल उक़ूल, पेज 48)
आप ही का फ़रमान है कि, ख़ुशनसीब है वह शख़्स जो लोगों से अच्छे अख़लाक़ से मिलता है, उनकी मदद करता है और अपने शर से उन्हें महफ़ूज़ रखता है। (तोहफ़ुल उक़ूल, पेज 28)
इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. फ़रमाते हैं कि, अल्लाह ने अपने एक नबी से फ़रमाया, अच्छा अख़लाक़ गुनाहों को उसी तरह ख़त्म कर देता है जिस तरह सूरज बर्फ़ को पिघला देता है। (तोहफ़ुल उक़ूल, पेज 28, बिहारुल अनवार, जिल्द 71, पेज 383)
इमाम सादिक़ अ.स. ही की हदीस है कि आपने फ़रमाया, बेशक बंदा अपने अच्छे अख़लाक़ से दिन को रोज़ा रखने वाले और रात को नमाज़ क़ायम करने वाले का दर्जा हासिल कर लेता है। (वसाएलुश-शीया, जिल्द 8, पेज 56, तोहफ़ुल उक़ूल, पेज 48)
मासूमीन अ.स. के अख़लाक़ की कुछ मिसालें
हमारे मासूम रहबरों के जिस तरह नेक अख़लाक़ के बारे में बेहतरीन और सीख हासिल करने वाले बयान मौजूद हैं उसी तरह दोस्त और दुश्मन के सामने नेक अख़लाक़ की बेहतरीन मिसालें भी पेश की हैं, जिनको हम यहां पेश कर रहे हैं।
पैग़म्बर स.अ. के ख़ादिम अनस से रिवायत है कि मैंने पैग़म्बर स.अ. की नौ साल तक ख़िदमत की, लेकिन इन नौ सालों में पैग़म्बर स.अ. ने एक बार भी मुझ से यह तक नहीं कहा कि तुम ने यह क्यों किया या तुम ने ऐसा क्यों किया....,
मेरे किसी काम में कमी नहीं निकाली, मैंने इन नौ सालों में पैग़म्बर स.अ. के बदन की ख़ुशबू से बेहतर किसी ख़ुशबू को महसूस नहीं किया, एक दिन एक देहाती आया और पैग़म्बर स.अ. की रिदा को इतना ज़ोर से ख़ींचा कि उसका निशान आपकी गर्दन पर ज़ाहिर हो गया, उसका बार बार यही कहना था कि पैग़म्बर स.अ. उसे कुछ अता करें, पैग़म्बर स.अ. ने उसकी इस हरकत के बाद बहुत नर्म और मोहब्बत भरे लहजे में मुस्कुराते हुए फ़रमाया इसे कुछ दे दो, फिर यह आयत नाज़िल हुई कि बेशक आप अख़लाक़ के अज़ीम दर्जे पर पहुंचे हुए हैं। (सूरए क़लम, आयत 4, मुंतहल आमाल, जिल्द 1, पेज 31)
इमाम सज्जाद अ.स. के क़रीबी लोगों में से एक शख़्स इमाम अ.स. के पास आया और बुरा भला कहने लगा, लेकिन आप ख़ामोश रहे और कुछ जवाब नहीं दिया, जब वह शख़्स चला गया तो इमाम अ.स. ने वहां बैठे लोगों से फ़रमाया आप लोगों ने सुन लिया होगा कि उस शख़्स ने क्या कहा है, अब मैं चाहता हूं कि आप भी मेरे साथ चलें और मेरा जवाब सुन लें, इमाम अ.स. रास्ते में सूरए आले इमरान की आयत न. 134 की तिलावत करते हुए जा रहे थे जिसमें अल्लाह का इरशाद है कि जो लोग ग़ुस्से को पी जाते हैं और लोगों को माफ़ कर देते हैं और अल्लाह ऐसे एहसान करने वालों को पसंद करता है।
इमाम अ.स. के साथ चलने वाले लोग समझ गए थे कि इमाम अ.स. बख़्शिश और माफ़ी वाली आयत की तिलावत फ़रमा रहे हैं, इसलिए उस शख़्स को कोई तकलीफ़ नहीं पहुंचाएंगे, आप जब उसके घर पहुंचे तो आपने उसके ख़ादिम से फ़रमाया, कि अपने मालिक से कह दो कि अली इब्ने हुसैन (अ.स.) तुमको बुला रहे हैं, जब उस शख़्स ने सुना कि इमाम अ.स. तुरंत उसके पास आए हैं तो उसने दिल ही दिल में कहा कि इमाम अ.स. ज़रूर मुझे मेरे किए की सज़ा देंगे और बदला लेंगे, वह शख़्स यह सब सोंच कर ख़ुद को मुक़ाबले के लिए तैयार कर के इमाम अ.स. के पास आया, जैसे ही वह बाहर आया इमाम अ.स. ने फ़रमाया, मेरे अज़ीज़ तुमने अभी थोड़ी देर पहले मेरे बारे में जो बातें कहीं अगर यह बातें मुझ में पाई जाती हैं तो अल्लाह मुझे माफ़ करे और अगर मुझ में नहीं पाई जाती तो अल्लाह तुम्हें माफ़ करे।
उस शख़्स ने जब यह सुना तो बहुत शर्मिंदा हुआ और इमाम अ.स. की पेशानी को चूमते हुए माफ़ी मांगने लगा और कहा कि, मैंने जो कुछ कहा ग़लत कहा है, बेशक आप में यह सब बातें बिल्कुल नहीं पाई जाती हां मेरे अंदर ज़रूर यह बुराईयां मौजूद हैं। (मुंतहल आमाल, जिल्द 3, पेज 5)
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